- भारत मौसम विभाग ने जून से सितंबर 2026 के बीच दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून में औसत से कम बारिश की संभावना जताई है
- जुलाई के बाद El Niño की सक्रियता मॉनसून की बारिश पर प्रभाव डाल सकती है, जो अगस्त-सितंबर में अधिक होगी
- मॉनसून का प्रभाव खरीफ फसलों की बुआई पर महत्वपूर्ण होता है, जो ज्यादातर जून और जुलाई में होती है
भारत मौसम विभाग (IMD) ने जून से सितंबर 2026 के बीच दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून को लेकर अपनी लॉन्ग रेंज फोरकास्ट रिपोर्ट सोमवार को जारी की. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मॉनसून सीजन के दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में औसत से कम बारिश होने का पूर्वानुमान है. मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के आंकलन के अनुसार, दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान El Niño कंडीशंस विकसित हो सकती हैं, जो मॉनसून की चाल और बारिश को प्रभावित कर सकती हैं.
जुलाई के बाद सक्रिय हो सकता है El Niño: डॉ. मोहपात्रा
एनडीटीवी से बातचीत में भारत मौसम विभाग के डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहपात्रा ने कहा, “मॉनसून सीजन‑2026 के दौरान औसत से कम बारिश के पूर्वानुमान की एक अहम वजह जुलाई के बाद El Niño कंडीशंस का सक्रिय होना है. हमारा अनुमान है कि जून तक कंडीशंस न्यूट्रल रहेंगी, लेकिन इसके बाद El Niño का ज्यादा असर अगस्त और सितंबर महीनों में मॉनसून की बारिश पर पड़ सकता है.”
कृषि और खरीफ सीजन के लिए अहम है मॉनसून
दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून सीजन कृषि क्षेत्र, विशेषकर कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ता है. डॉ. एम. मोहपात्रा ने बताया कि भारत में अधिकतर खरीफ फसलों की बुआई जून और जुलाई के दौरान हो जाती है.
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खरीफ बुआई पर ज्यादा असर की संभावना नहीं
भारत मौसम विभाग के अनुसार, भले ही मॉनसून‑2026 में कुल बारिश औसत से कम रहने का अनुमान है, लेकिन इसका मुख्य खरीफ फसलों की बुआई पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है.
देशभर में 92% सामान्य मानसूनी बारिश का अनुमान
मौसम विभाग की पहली लॉन्ग रेंज फोरकास्ट रिपोर्ट के मुताबिक, जून से सितंबर 2026 के बीच देशभर में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का 92 फीसदी मानसूनी बारिश होने की संभावना जताई गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है, जबकि पूर्वोत्तर, उत्तर‑पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान है. भारत मौसम विभाग अब दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून को लेकर दूसरी लॉन्ग रेंज फोरकास्ट रिपोर्ट मई के अंत में जारी करेगा.
पिछले साल समय से पहले पहुंचा था मॉनसून
आमतौर पर दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून 1 जून के आसपास केरल तट पर पहुंचता है. हालांकि पिछले साल मानसून 1 जून 2025 से आठ दिन पहले, 24 मई को केरल पहुंच गया था। इसके बाद मानसून ने 29 जून को, यानी औसत से 9 दिन पहले, पूरे देश को कवर कर लिया था.
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