- ED ने बंगाल के कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के को-फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया
- I-PAC ने साल 2021 से तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार को चुनावी रणनीति और कैंपेन मैनेजमेंट में मदद दी है
- ED ने दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई समेत कई शहरों में विनेश चंदेल और अन्य संबंधित ठिकानों पर छापेमारी भी की है
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारियों के मुताबिक यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है. ED ने चंदेल को दिल्ली से मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई. इस कार्रवाई के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि I-PAC पिछले कुछ सालों से कई बड़े राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करती रही है. I-PAC यानी इंडियन पॉलटिकल एक्शन कमेटी साल 2021 से तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार को चुनावी रणनीति और कैंपेन मैनेजमेंट में मदद दे रही है.
ईडी कई ठिकानों पर कर चुकी है छापेमारी
इस मामले में ED पहले भी लगातार कार्रवाई करती रही है. 2 अप्रैल को एजेंसी ने दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई समेत कई शहरों में एक साथ छापेमारी की थी. इस दौरान दिल्ली में विनेश चंदेल के ठिकानों के अलावा बेंगलुरु में I-PAC के को-फाउंडर ऋषि राज सिंह के ठिकानों और मुंबई में AAP के पूर्व कम्युनिकेशन इंचार्ज विजय नायर से जुड़े स्थानों पर भी तलाशी ली गई. इससे पहले 8 जनवरी को कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और इसके फाउंडर प्रतीक जैन के घर पर भी रेड की गई थी, जो उस समय काफी विवादों में आ गई थी.
The arrest of Vinesh Chandel, co-founder of I-PAC, barely 10 days before the Bengal elections, is not just alarming- It shakes the very idea of a level playing field.
— Abhishek Banerjee (@abhishekaitc) April 13, 2026
At a time when WB should be moving toward free and fair elections, this kind of action sends a chilling message:…
क्या है मामला?
यह मामला नवंबर 2020 में दर्ज CBI की FIR से शुरू हुआ था, जिसमें पश्चिम बंगाल के आसनसोल इलाके के पास इस्टर्न कॉलफील्ड लिमिटेड की खदानों खासतौर पर कुनुस्तोरिया और कजोरा इलाके में बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी और अवैध खनन का आरोप लगाया गया था. जांच एजेंसियों के मुताबिक इस अवैध कारोबार से करोड़ों रुपये की कमाई की गई और इस पैसे को हवाला नेटवर्क के जरिए अलग-अलग जगहों पर भेजा गया.
ED का दावा है कि इस कोयला घोटाले से जुड़े हवाला ऑपरेटरों ने I-PAC की कंपनी तक करोड़ों रुपये पहुंचाए. एजेंसी के अनुसार करीब 20 करोड़ रुपये इस नेटवर्क के जरिए I-PAC तक पहुंचे. जांच में यह भी सामने आया है कि इन पैसों को मुंबई की एक अंगड़िया फर्म के जरिए ट्रांसफर किया गया, जो पहले दिल्ली शराब घोटाले की जांच में भी एजेंसियों के रडार पर आ चुकी है.
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