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NDTV Profit Conclave 2026: 'रूस हमारी मजबूरी समझता है', तेल आयात पर बोले CEA अनंत नागेश्वरन

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि आज की अनिश्चित दुनिया में भारत को स्वदेशी होने में हिचकिचाना नहीं चाहिए. आत्मनिर्भरता अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता है.

NDTV Profit Conclave 2026: 'रूस हमारी मजबूरी समझता है', तेल आयात पर बोले CEA अनंत नागेश्वरन

रूस-यूरेन वॉर और वैश्विक प्रतिबंधों के बीच भारत के रूसी तेल की खरीद हमेशा से दुनिया भर में चर्चा का विषय रही है. एनडीटीवी प्रॉफिट कॉन्क्लेव में भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने इस मुद्दे पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश भारत की ऊर्जा जरूरतों और उसकी मजबूरियों को बेहतर ढंग से समझने लगे हैं.

"मजबूरी भी है और जरूरत भी"

एनडीटीवी से बातचीत करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि रूस भी भारत की स्थिति से भली-भांति वाकिफ है. उन्होंने बताया कि जब रूस की बड़ी तेल कंपनियों जैसे 'रोसनेफ्ट' और 'लुकोइल' पर प्रतिबंध लगाए गए, तो भारत का अलर्ट रहना जरूरी था. भारत नहीं चाहता था कि उसकी वित्तीय प्रणाली इन प्रतिबंधों की चपेट में आए. उन्होंने आगे कहा कि रूस इस बात को जानता है कि बैन के बाद भारत ने सावधानी बरती. हम अपने बैंकिंग सिस्टम को जोखिम में नहीं डालना चाहते थे. 

बता दें कि भारत ने हाल के महीनों में रूसी तेल आयात में कटौती जरूर की. दिसंबर 2025 में रूस से इंपोर्ट घटकर करीब 1.38 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया, जो जून 2025 के शिखर स्तर से काफी कम है. रेटिंग एजेंसी मूडीज ने बताया था कि अगर भारत अचानक रूसी तेल आयात पूरी तरह बंद करता है, तो इससे महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

भारत के लिए क्या है खास?

CEA ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि अगर मध्य पूर्व में ईरान की स्थिति कंट्रोल से बाहर नहीं होती है और तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो भारत के तेल खरीद के नजरिए से बहुत बड़ा अंतर नहीं आएगा. उनके अनुसार $60 से $70 प्रति बैरल की कीमत भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कोई बड़ी समस्या नहीं रही है. हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को कच्चे तेल, उर्वरक और दूसरी जरूरी संसाधनों का बफर स्टॉक तैयार रखना चाहिए, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी बाधा का मुकाबला किया जा सके.

अमेरिका के साथ ट्रेड डील

इस चर्चा में हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भी जिक्र आया. अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने की वजह से लगाए अतिरिक्त 25% शुल्क को हटाने का फैसला किया है. इसके बदले में भारत अमेरिका से अपनी ऊर्जा खरीद और अन्य सामानों के आयात को बढ़ाने पर विचार कर रहा है. नागेश्वरन का मानना है कि अमेरिका के साथ टैरिफ कम होने से भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.4% तक जा सकती है, जो पहले के अनुमानों से ज्यादा है.

आत्मनिर्भरता को अपनाना जरूरी

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि आज की अनिश्चित दुनिया में भारत को स्वदेशी होने में हिचकिचाना नहीं चाहिए. आत्मनिर्भरता अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता है. भारत को अपनी प्राथमिकताओं का ध्यान खुद रखना होगा, चाहे वह ऊर्जा सुरक्षा हो या आर्थिक स्थिरता.

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