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500 बिलियन के ट्रेड का भरोसा, 30 ट्रिलियन की इकोनॉमी का लक्ष्‍य... पीयूष गोयल ने बताया विकसित भारत का रोडमैप, 10 प्‍वाइंट्स

Piyush Goyal NDTV Exclusive Interview: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बताया और द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा. साथ ही विकसित भारत लक्ष्‍य के प्रति अग्रसर होने का रोडमैप भी सामने रखा.

500 बिलियन के ट्रेड का भरोसा, 30 ट्रिलियन की इकोनॉमी का लक्ष्‍य... पीयूष गोयल ने बताया विकसित भारत का रोडमैप, 10 प्‍वाइंट्स
NDTV Profit Conclave के मंच पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कई मुद्दों पर बात की

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सभी आशंकाओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि देश के संवेदनशील कृषि क्षेत्र (Agriculture Secture) को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है. उन्होंने कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को अगले 5-6 वर्षों में 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने में मदद करेगा. NDTV Profit के 'इंडिया: द रियल डील' कॉन्क्लेव में NDTV ग्रुप के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने ट्रेड डील समेत कई विषयों पर विस्तार से अपने विचार रखे. यहां 10 प्‍वाइंट में पूरे इंटरव्‍यू का सार समझिए. 

1. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का ऐतिहासिक महत्व

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को भारत के लिए एक युगांतरकारी घटना बताया है. उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता और कूटनीतिक उतार-चढ़ाव के बाद मिली एक बड़ी जीत है. भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) के साथ भी डील की है, और अब अमेरिका के साथ यह समझौता भारत की वैश्विक साख को और मजबूत करता है. गोयल के अनुसार, यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नेशन फर्स्ट' (राष्ट्र प्रथम) विजन का परिणाम है, जहां भारत ने किसी दबाव के बिना, बराबरी के स्तर पर अपनी शर्तों को मनवाया है. यह समझौता दिल्ली और वाशिंगटन के बीच के आर्थिक संबंधों में एक नई जान फूंकने वाला साबित होगा.

2. 500 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य

भारत और अमेरिका के बीच वर्तमान व्यापार (Goods and Services) लगभग 200 बिलियन डॉलर से अधिक है. पीयूष गोयल ने विश्वास जताया है कि अगले 5 से 6 वर्षों में यह बढ़कर 500 बिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा. इस व्यापार समझौते से भारतीय निर्यातकों को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों जैसे चीन (35% टैरिफ) और वियतनाम (20% टैरिफ) के मुकाबले बड़ी बढ़त मिलेगी. कई औद्योगिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों पर टैरिफ जीरो रहेगा, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों की मांग में भारी उछाल आने की संभावना है. सरकार का मानना है कि इस डील से व्यापार में जो गति आएगी, वह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और जीडीपी दोनों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी.

3. संवेदनशील कृषि सेक्‍टर का पूर्ण संरक्षण

विपक्ष द्वारा कृषि क्षेत्र पर उठाई गई चिंताओं को खारिज करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है. उन्होंने उन वस्तुओं की एक लंबी सूची साझा की जिन्हें इस ट्रेड डील से पूरी तरह बाहर रखा गया है. इनमें मांस, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, चावल, गेहूं, चीनी, मक्का, बाजरा और कई फल शामिल हैं. इन उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है, जिसका मतलब है कि अमेरिकी किसानों का सस्ता माल भारतीय बाजारों में भरकर स्थानीय किसानों को नुकसान नहीं पहुँचा पाएगा. सरकार ने केवल उन्हीं वस्तुओं के आयात को अनुमति दी है जहाँ देश में भारी कमी है, ताकि उपभोक्ताओं को सही दाम पर चीजें मिल सकें.

4. सेब उत्पादकों के लिए विशेष 'कैलिव्रेटेड' सुरक्षा

भारत में सेब की सालाना खपत लगभग 26-27 लाख टन है, जबकि उत्पादन 21 लाख टन के आसपास होता है. इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने अमेरिका से सेब आयात के लिए एक बहुत ही संतुलित और 'कैलिव्रेटेड' कोटा सिस्टम बनाया है. गोयल ने बताया कि अमेरिका से आने वाले सेब पर 80 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) और 20 रुपये की ड्यूटी लगाई गई है. इस तरह, विदेशी सेब बाजार में 130-140 रुपये से कम में नहीं बिक पाएगा, जिससे हिमाचल और कश्मीर के स्थानीय सेब उत्पादक सुरक्षित रहेंगे. यह रणनीति दर्शाती है कि सरकार ने उपभोक्ताओं को विकल्प देने और किसानों के मुनाफे को बचाने के बीच एक बारीक संतुलन बनाया है.

5. लेबर-ओरिएंटेड सेक्टर्स को बड़ी राहत

इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ उन क्षेत्रों को मिलेगा जहाँ सबसे ज्यादा रोजगार सृजन होता है. टेक्सटाइल (कपड़ा), फुटवियर, स्पोर्ट्सवेयर, चमड़ा उत्पाद और खेल सामग्री जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariff) घटकर 18% पर आ गया है. पीयूष गोयल ने कहा कि यह उन MSMEs के लिए संजीवनी है जो पहले भारी टैक्स के कारण पिछड़ रहे थे. स्मार्टफोन, फार्मास्युटिकल, रत्न और आभूषण जैसे कई औद्योगिक सामानों को अमेरिका में 'जीरो ड्यूटी' एक्सेस मिलता रहेगा. इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि देश के छोटे और मध्यम उद्योगों में निजी निवेश (Private Capex) की एक नई लहर आने की उम्मीद है.

6. हाई-टेक और भविष्य की तकनीक तक पहुंच

भारत आज केवल पारंपरिक सामान ही नहीं बेचना चाहता, बल्कि आधुनिक तकनीक भी हासिल करना चाहता है. पीयूष गोयल ने बताया कि इस डील से भारत को डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन, क्वांटम कंप्यूटिंग और उच्च गुणवत्ता वाले ICT उत्पादों के लिए जरूरी उपकरण आसानी से मिल सकेंगे. इसके अलावा, विमानों के इंजन और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति भी तेज होगी, जो भारत के बढ़ते एयरोस्पेस इकोसिस्टम के लिए अनिवार्य है. अमेरिका के साथ गहरे होते संबंधों का अर्थ है कि संवेदनशील और अत्याधुनिक तकनीक का प्रवाह भारत की ओर निर्बाध रूप से होगा, जो 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित होगा.

7. फार्मा और दवाओं पर 'जीरो ड्यूटी' 

भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग ने दुनिया भर में अपनी धाक जमाई है, और इस समझौते ने उसे और मजबूती दी है. अमेरिकी कानून की धारा 232 (Section 232) के तहत चल रही राष्ट्रीय सुरक्षा जांच के बावजूद, भारत को भरोसा दिया गया है कि जेनेरिक दवाओं और उनके रसायनों पर जीरो ड्यूटी जारी रहेगी. पीयूष गोयल ने साफ किया कि धारा 232 एक प्रक्रियात्मक मामला है और इससे भारतीय फार्मा निर्यात पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. भारतीय दवा कंपनियां अमेरिका के विशाल बाजार में अपनी सस्ती और प्रभावी दवाओं की आपूर्ति जारी रख सकेंगी, जिससे उनकी प्रॉफिटिबैलिटीऔर वैश्विक पैठ दोनों में इजाफा होगा.

8. H1B वीजा और बदलता वर्क कल्चर

वीजा के मुद्दे पर एक अलग नजरिया रखते हुए गोयल ने कहा कि अब वह दौर चला गया जब भारतीय कंपनियां H1B वीजा के लिए संघर्ष करती थीं. कोविड के बाद दुनिया बदल गई है और अब कंपनियां अमेरिका में लोग ले जाने के बजाय भारत में ही 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' (GCCs) बनाने को प्राथमिकता दे रही हैं. भारत में आज 1800 से अधिक GCCs चल रहे हैं. वहां काम करने वाले इंजीनियर न केवल भारत में अपने परिवार के साथ रहते हैं, बल्कि यहीं खर्च करते हैं और यहीं टैक्स देते हैं. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है और व्यवसायों के लिए भी यह अधिक लागत प्रभावी (cost-effective) साबित हो रहा है.

9. विकसित देशों के साथ नई रणनीतिक साझेदारियां

पीयूष गोयल ने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि पहले केवल प्रतिस्पर्धी विकासशील देशों के साथ समझौते किए जाते थे, जिससे भारत को नुकसान होता था. वर्तमान सरकार की रणनीति केवल विकसित देशों (जैसे ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ईयू और अब अमेरिका) के साथ समझौते करने की है, क्योंकि ये अर्थव्यवस्थाएं भारत की पूरक (complementary) हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं. उन्होंने घोषणा की कि कनाडा, जीसीसी (6 देशों का समूह) और दक्षिण अफ्रीका के साथ भी बातचीत अंतिम चरणों में है. भारत अब दुनिया के हर कोने में अपने आर्थिक पदचिह्न छोड़ रहा है, जो इसे 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

10. वैश्वीकरण (Globalization) पर भारत का रुख

अंत में, पीयूष गोयल ने उन तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया कि वैश्वीकरण पीछे हट रहा है. उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल के बावजूद भारत का व्यापार इस वर्ष 5-6% की दर से बढ़ेगा. भारत आज चीन के विकल्प के रूप में उभर रहा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है. 'चीन + 1' की रणनीति के तहत दुनिया की नजरें भारत पर हैं. यह व्यापार समझौता केवल दो देशों के बीच की डील नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अब दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का एक अनिवार्य और अटूट हिस्सा बन चुका है.

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