मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे युद्ध और तनाव का असर देश के एविएशन नेटवर्क पर भी दिख रहा है. देश के 6 बड़ी मेट्रो सिटीज के एयरपोर्ट्स में से 5 पर जून और जुलाई में उड़ानों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. सबसे ज्यादा असर चेन्नई और हैदराबाद पर पड़ा है, जहां 2 महीनों में फ्लाइटस ऑपरेशन में 20% की कमी दर्ज की गई है. एविएशन एनालिटिक्स फर्म 'सिरियम' (Cirium) के डेटा के अनुसार, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में भी डबल डिजिट यानी दोहरे अंकों में गिरावट देखी गई.
हालांकि, दिल्ली ने इस ट्रेंड के उलट प्रदर्शन किया. इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फ्लाइट ऑपरेशन्स में पिछले साल के मुकाबले जून में 8% और जुलाई में 2.5% की बढ़ोतरी हुई, जिससे ये ग्रोथ दर्ज करने वाला एकमात्र बड़ा मेट्रो एयरपोर्ट बन गया.
वेस्ट एशिया वॉर का साइड इफेक्ट
उड़ानों की संख्या और एयर ट्रैफिक में ये अंतर तब देखने को मिला है जब एयरलाइंस वेस्ट एशिया संघर्ष से जुड़ी कई तरह की दिक्कतों का सामना कर रही हैं. एयरस्पेस पर पाबंदियों के कारण एयरलाइंस को कई इंटरनेशनल रूट्स पर रास्ते बदलने और लंबी यात्राएं करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जबकि प्रमुख विदेशी डेस्टिनेशन्स की यात्रा को लेकर अनिश्चितता ने डिमांड को कमजोर कर दिया है. कुछ भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल सर्विसेज को कम या सस्पेंड भी किया है.
चेन्नई और हैदराबाद में सबसे बड़ी गिरावट
- चेन्नई में जून में फ्लाइट ऑपरेशन्स में साल-दर-साल 20% की कमी दर्ज की गई, इसके बाद जुलाई में 18.9% की गिरावट आई.
- हैदराबाद में भी लगभग ऐसी ही गिरावट देखी गई, जून में ऑपरेशन्स में करीब 20% और जुलाई में लगभग 19% की कमी आई.
- कोलकाता में फ्लाइट ऑपरेशन्स जून में 13.2% और जुलाई में 16.8% गिरे, जबकि बेंगलुरु में क्रमशः 11.7% और 10.1% की गिरावट दर्ज की गई.
- भारत के दूसरे सबसे व्यस्त एयरपोर्ट, मुंबई में जून में ऑपरेशन्स में साल-दर-साल 10.4% और जुलाई में 12.5% की गिरावट देखी गई.
- राजधानी दिल्ली में जून में फ्लाइट ऑपरेशन में साल-दर-साल 8%, जबकि जुलाई में 2.5% की बढ़ोतरी हुई.
छह बड़े मेट्रो एयरपोर्ट्स में दिल्ली एकमात्र अपवाद रहा. इसका बेहतर प्रदर्शन इसलिए भी अहम है क्योंकि यह भारत का सबसे बड़ा एविएशन हब है, जिसका घरेलू नेटवर्क काफी बड़ा है और यहां से बड़ी संख्या में कनेक्टिंग पैसेंजर्स यात्रा करते हैं.
घरेलू हवाई ट्रैफिक पर भी पड़ा असर
एयरपोर्ट के कामकाज में कमी के साथ-साथ घरेलू यात्रियों की संख्या में भी गिरावट आई. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई में भारतीय एयरलाइंस ने लगभग 1.2 करोड़ घरेलू यात्रियों को यात्रा कराई, जो पिछले साल इसी महीने में दर्ज 1.26 करोड़ यात्रियों की तुलना में 4.8% कम है.
जुलाई में यह गिरावट तब आई जब साल के पहले सात महीनों में यात्रियों की संख्या थोड़ी ज़्यादा रही थी. एयरलाइंस ने जनवरी से जुलाई के बीच 9.84 करोड़ यात्रियों को यात्रा कराई, जबकि 2025 की इसी अवधि में यह संख्या 9.778 करोड़ थी, यानी 0.64% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इंडिगो टॉप पर, एयर इंडिया का भी मार्केट शेयर बढ़ा
जुलाई के कमजोर आंकड़ों का असर अलग-अलग एयरलाइंस के प्रदर्शन पर भी दिखा. इंडिगो ने महीने के दौरान 80.8 लाख यात्रियों को यात्रा कराई, जो जून में 89.2 लाख थी. एयर इंडिया ग्रुप (जिसमें एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस शामिल हैं) ने 28.8 लाख यात्रियों को यात्रा कराई, जबकि एक महीने पहले यह संख्या 32.2 लाख थी.
आकासा एयर के यात्रियों की संख्या 8.61 लाख से घटकर 6.65 लाख हो गई, जबकि स्पाइसजेट ने 1.87 लाख यात्रियों को यात्रा कराई, जो जून में 2.63 लाख थी. कम ट्रैफिक के बावजूद इंडिगो और एयर इंडिया का मार्केट शेयर बढ़ा
यात्रियों की संख्या में गिरावट के बावजूद दो सबसे बड़े एयरलाइन ग्रुप्स के मार्केट शेयर में कोई कमी नहीं आई. घरेलू बाज़ार में इंडिगो का शेयर जून के 66.3% से बढ़कर जुलाई में 67.4% हो गया. एयर इंडिया ग्रुप का शेयर भी 23.9% से बढ़कर 24% हो गया.
यह बढ़ोतरी तब हुई जब आकासा एयर का मार्केट शेयर 6.4% से घटकर 5.5% हो गया और स्पाइसजेट का शेयर 1.9% से घटकर 1.6% रह गया.
पैसेंजर लोड फैक्टर यानी उपलब्ध सीटों में से भरी हुई सीटों का अनुपात, इंडिगो, एयर इंडिया ग्रुप और आकासा एयर के लिए कम हो गया. स्पाइसजेट इसका अपवाद रही, जिसका लोड फैक्टर जून के 73.2% से सुधरकर जुलाई में 74.7% हो गया.
पहले की अपेक्षा कम फ्लाइट्स कैंसिल हुईं
इस सेक्टर पर भारी दबाव के बावजूद, तय घरेलू उड़ानों के रद्द होने की संख्या काफी कम रही. जुलाई में कुल मिलाकर उड़ानें रद्द होने की दर 0.62% रही, जिसमें तकनीकी दिक्कतें सबसे बड़ी वजह रहीं. कुल रद्द उड़ानों में से 39.9% तकनीकी दिक्कतों के कारण रद्द हुईं, जबकि 27.4% उड़ानें ऑपरेशनल कारणों से रद्द हुईं. DGCA के अनुसार, 22.7% उड़ानें खराब मौसम के कारण रद्द हुईं.
समय पर उड़ान भरने में इंडिगो सबसे आगे
जुलाई में तय घरेलू एयरलाइंस में समय पर उड़ान भरने के मामले में इंडिगो का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा. DGCA के समय पर उड़ान भरने के प्रदर्शन (OTP) के आकलन में शामिल 10 एयरपोर्ट्स पर, इंडिगो की 91.2% उड़ानें समय पर चलीं. इसके बाद अकासा एयर का नंबर रहा, जिसकी 90.8% उड़ानें समय पर चलीं, जबकि एयर इंडिया ग्रुप का OTP 88.5% रहा. अलायंस एयर का समय पर उड़ान भरने का प्रदर्शन 76% रहा. जिन एयरलाइंस का आकलन किया गया, उनमें स्पाइसजेट का OTP सबसे कम, यानी 34.6% रहा.
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