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तेल नहीं, SIP और FII की बिकवाली है जिम्मेदार, गिरते रुपये पर जेफरीज का बड़ा अनुमान

Jefferies report on Rupee: गिरते रुपये पर जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है. रिपोर्ट में साफ कहा है कि रुपये की कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती हुई कीमतें नहीं है.

तेल नहीं, SIP और FII की बिकवाली है जिम्मेदार, गिरते रुपये पर जेफरीज का बड़ा अनुमान
Jefferies Report on Rupee: जेफरीज ने अनुमान लगाया कि आखिर क्यों भारतीय करेंसी कमजोर हो रही है.

Jefferies Report on Rupee: देश की करेंसी यानी रुपये पर दबाव साफ नजर आ रहा है. मिडिल ईस्ट में चल रहे टेंशन की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी आई, जिसके चलते कई देशों की करेंसी पर नेगेटिव असर देखने को मिला. पर भारतीय करेंसी यानी रुपये के मामले में ऐसा नहीं है. देश का रुपया तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से नहीं बल्कि विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने की वजह से नीचे जा रहा है. ये अनुमान ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में लगाया है.

'कच्चे तेल की कीमतों ने रुपया कमजोर नहीं किया'

अमूमन माना जाता है कि कच्चे तेल की कीमतें इंटरनेशल मार्केट में जब भी बढ़ती हैं, देश का करेंट अकाउंट डेफिसिट होने से देश की करेंसी कमजोर होती है. पर जेफरीज की रिपोर्ट कुछ और ही हालात बयां कर रही है. दरअसल ब्रोकरेज फर्म ने नई रिपोर्ट आईएनआर प्रेशर-द डाउनसाइड ऑफ एसआईपी पब्लिश की है. इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि देश में मजबूत हो रहे एसआईपी और लगातार विदेशी बिकवाली के चलते रुपया कमजोर हो रहा है, ना कि कच्चा तेल महंगा होने से. 

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय मार्केट में पिछले कुछ समय में .म्यूचुअल फंड और एसआईपी के जरिए जमकर पैसा आया है. इसके अलावा ईपीएफओ के साथ एनपीएस का निवेश भी लगातार मार्केट में हो रहा है. शानदार घरेलू के निवेश के चलते विदेशी निवेशक के साथ प्राइवेट इक्विटी फर्म और फॉरेन प्रमोटर्स धीरे-धीरे करके भारतीय मार्केट से बाहर होते चले गए. ऐसा इसलिए क्योंकि जब घरेलू मौर्चे से पैसा आया को कंपनियों की वैल्यूएशन बढ़ती चली गई. विदेशी निवेशकों को प्रॉफिट बुकिंग का मौका दिखा, और अपने शेयर्स वो लगातार निकालते रहे. 

दूसरी तरफ देसी निवेशक जमकर खरीदारी कर ही रहे थे तो बाजार को लगातार सपोर्ट मिलता रहा. यानी किसी बड़ी गिरावट का शिकार शेयर मार्केट नहीं हुआ. 

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दो साल में विदेशी निवेशकों ने कितना निकाला डॉलर?

ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो सालों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय मार्केट से लगभग 78 अरब डॉलर निकाल लिए हैं. एफपीआई की बात करें तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में रिकॉर्ड 21 अरब डॉलर रुपये निकाले गए. वहीं फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में भी ये सिलसिला लगातार बना हुआ है. अगर अप्रैल 2025 से अभी तक की बात करें तो एफपीआई अकेले 44 अरब डॉलर मार्केट से निकाल चुके हैं.  

कैपिटल अकाउंट पर पड़ा असर

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि देशी निवेशकों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स में ज्यादा बड़ी गिरावट नहीं दिखी हो, पर इस पूरे मामले ने देश के कैपिटल अकाउंट पर बुरा असर डाला है. विदेशी पैसा जब भी देश से बाहर जाता है तो देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ती है. फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कैपिटल अकाउंट सरप्लस जीडीपी का सिर्फ 0.5 फीसदी रह गया. रिपोर्ट में इसे ऑल टाइम लो में रिपोर्ट किया गया. 

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शुभम उपाध्याय
shubham.upadhyay@ndtv.com
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