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आम नागरिक को बड़ी राहत, अब CNG, LNG और हाइड्रोजन पंपों पर नहीं होगी घपलेबाजी, सरकार ने बदले नियम

Legal Metrology Rules 2013: सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियम 2013 में बदलाव करते हुए एक बड़ा फैसला लिया है. अब सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं, बल्कि सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन जैसे ईंधनों के डिस्पेंसर की जांच भी सरकारी सेंटर्स पर की जाएगी.

आम नागरिक को बड़ी राहत, अब CNG, LNG और हाइड्रोजन पंपों पर नहीं होगी घपलेबाजी, सरकार ने बदले नियम
Legal Metrology Rules 2013: धोखेधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियम, 2013 में बड़ा बदलाव किया है.

Legal Metrology Rules 2013: देश में सीएनजी, एलपीजी डीलर अब सावधान को जाएं, क्योंकि गैस भरते समय अब किसी भी तरह की घपलेबाजी नहीं चल पाएगी. दरअसल पिछले कुछ सालों से सीएनजी-एलपीजी के वाहनों में के लिए डिमांड बढ़ी है. अभी मिडिल ईस्ट में टेंशन के चलते वैश्विक बाजार में तेल और गैस की किल्लत है. इसी बीच भारत से कई मामले ऐसे सामने आए, जिसमें पेट्रोल पंप पर फ्यूल की मापतौल में गड़बड़ियां पाई गईं. इन सभी बातों को देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए लीगल मेट्रोलॉजी नियम, 2013 में बदलाव किया है.  

इन 5 फ्यूल की होगी सरकारी सेंटर पर जांच

इस बदलाव के जरिए ये पक्का करना है कि ईंधन की मापतौल में कोई गड़बड़ी ना हो और सिस्टम मजबूत बने. इसके लिए सरकार ने पेट्रोल-डीजल के साथ अब सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और यहां तक कि फ्यूचर का फ्यूल माने जा रहे हाइड्रोजन की क्वांटिटी की जांच हाई-टेक सरकारी सेंटर्स पर करने का फैसला लिया है.

दरअसल सरकार ने नए नियमों के जरिए सरकारी जांच केंद्रों का दायरा बढ़ा दिया है. पहले ये सेंटर सिर्फ पेट्रोल और डीजल की मशीनों की जांच करते थे पर अब यहां नए तरह के ईंधन के मशीनों की भी जांच हो सकेगी, इसमें सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन जैसे फ्यूल डिस्पेंसर शामिल हैं. अब कुल मिलाकर पांच तरह के फ्यूल डिस्पेंसर की जांच इन केंद्रों पर होगी. 

किसे और कब जांच कराने की जरूरत

  • नियम के अनुसार हर पेट्रोल पंप को समय-समय पर जांच कराना जरूरी है. जो नए पेट्रोल पंप अभी शुरू हुए हैं, उन्हें काम शुरू करने से पहले ही अपनी मशीनों की जांच करवानी पड़ती है, जिससे ये पता चल सके कि वो सही काम कर रही हैं या नहीं.
  • इसके अलावा, हर पेट्रोल पंप की मशीनों की हर 6 महीने में दोबारा जांच और वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है, जिससे ग्राहकों को सही मात्रा में तेल मिल सके.

जानें कितनी लगेगी वेरिफिकेशन फीस

सरकार ने फ्यूल मशीनों की जांच के लिए फीस भी तय की है, जिससे पूरा प्रोसेस ठीक तरह से काम कर सके. अब पेट्रोल और डीजल के हर नोजल की जांच के लिए 5,000, सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन जैसे फ्यूल के लिए 10,000 हजार रुपये फीस प्रति नोजल देनी होगी. इसका मकसद ये है कि इन मशीनों की जांच होती रहे, जिससे ये पक्का हो सके कि गाड़ी चालकों को पूरा ईंधन मिले और उन्हें किसी तरह का नुकसान ना हो.

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क्या हैं GATCs और क्यों पड़ी इनकी जरूरत?

GATCs यानी सरकारी जांच केंद्रों ऐसे केंद्र होते हैं, जहां वजन और माप की जांच होती है. इन सेंटर्स पर मॉर्डन मशीनों के साथ एक्सपर्ट रहते हैं, जो बताते हैं कि इनसे निकलने वाला फ्यूल ठीक है या नहीं. इन सेंटर्स की जरूरत इसलिए हुई क्योंकि पेट्रोल पंप या दूसरे फ्यूल स्टेशनों की मशीनों में कोई गड़बड़ी ना हो और लोगों को सही फ्यूल मिल सके.

आम नागरिक को कैसे मिलेगा इसका फायदा?

देश में सीएनजी और एलपीजी गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ी है. इसके अलावा हाइड्रोजन स्टेशन भी तेजी से बन रहे हैं. इसलिए इन सभी फ्यूल मशीनों को नियमों के दायरे में लाना एक सटीक कदम माना जा रहा है. इससे आम लोगों को सीधा फायदा ये होगा कि उन्हें हर बार सही क्वांटिटी में फ्यूल मिलेगा. अब गड़बड़ी या धोखाधड़ी की गुंजाइश कम होगी.

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