NSE Market Pulse Report: मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच दुनियाभर के बाजार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे हैं. वहीं अगर भारतीय शेयर मार्केट की बात करें तो जंग के दौरान चौथी तिमाही निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही. मार्च में खत्म हुए चौथी तिमाही में भारतीय निवेशकों को इक्विटी बाजार में बड़ा झटका लगा है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की 'मार्केट पल्स' रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली की वजह से इस तिमाही में भारतीय निवेशकों को करीब 12.6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
कच्चे तेल की कीमतों का प्रेशर
इस नुकसान के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में जंग के हालात रहे हैं. इस संकट ने दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया. नतीजन वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिसने भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश की अर्थव्यवस्था पर नेगेटिव असर डाला. इन सभी समस्या के चलते निफ्टी में मार्च तिमाही में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई. इसका पूरा असर घरेलू निवेशकों पर साफतौर पर दिखाई दिया.

NSE Market Pulse Report
कुल इक्विटी हिस्सेदारी में शानदार ग्रोथ
एक बात यहां क्लियर कर देने वाली है कि भले ही निवेशकों को चौथी तिमाही में 12.6 लाख करोड़ का जबरदस्त झटका लगा हो. साथ ही पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 में निवेशकों की टोटल एसेट्स 2.5 लाख करोड़ नेट कम हो गए हों पर लॉन्ग टर्म को देखते हुए स्थिति अभी भी पॉजिटिव बनी है. रिपोर्ट के अनुसार कोविड के टाइम यानी अप्रैल 2020 के बाद भारतीय निवेशकों ने शेयर बाजार में काफी निवेश किया, जिसकी वजह से उनकी टोटल इक्विटी एसेट्स बहुत तेजी से बढ़े हैं. आज भी ये एसेट्स लगभग 44 लाख करोड़ रुपये के हाई लेवल पर हैं. फिलहाल निवेशकों की टोटल इक्विटी में शेयर करीब 76.5 लाख करोड़ रुपये है, जो मार्च 2020 से अब तक करीब 29.6% की शानदार सालाना बढ़त दिखाती है. यानी सिंपल है कोविड के बाद लोगों का शेयर बाजार में निवेश लगातार बढ़ा है और इससे उनके एसेट्स में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है.
विदेशी निवेशकों का लगातार पैसा निकालना
देश के स्टॉक मार्केट पर विदेशी निवेशकों का भरोसा कम होना एक चिंता का विषय बना हुआ है. विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग की है. फाइनेंशियल ईयर 2026 में विदेशी निवेशकों ने देश के इक्विटी मार्केट से करीब 1.6 लाख करोड़ से ज्यादा का विदेशी पैसा निकाल लिया है. इससे निफ्टी में लिस्टेड कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी कम होकर सिर्फ 15.8 फीसदी रह गई है. रिपोर्ट के अनुसार ये 17 सालों में सबसे कम स्तर है.
निवेश के तरीकों में आया बदलाव
जंग के इस समय में एक स्ट्रक्चरल शिफ्ट देखने को मिला है. रिपोर्ट के अनुसार निवेशकों का सीधे बाजार में पैसा लगाने की दर 9.1 फीसदी पर आ गई है. ये 5 साल का सबसे निचला स्तर है. वहीं दूसरी तरफ मार्केट में अब इनडायरेक्ट इन्वेस्टमेंट तेजी से बढ़ रहा है. यानी आम निवेशक अब मार्केट में सीधे पैसा लगाने की बजाय म्यूचुअल फंड जैसी स्कीम में निवेश करना बेहतर समझ रहे हैं.
देशी निवेशकों ने दिखाई अपनी ताकत
एक तरफ विदेशी निवेशकों ने धड़ाधड़ पैसे शेयर मार्केट से निकाले, वहीं दूसरी तरफ देशी निवेशकों ने अपनी खरीदारी के दम पर मार्केट के संभालने में मदद की. सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान में लगातार हुए निवेश की वजह से घरेलू म्यूचुअल फंडों की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 11.4% के रिकॉर्ड लेवल पर आ गई.
एनएसई की ये रिपोर्ट बदलाती है कि जंग की वजह से हालात खराब हुए हैं लेकिन अभी कंट्रोल में हैं. देशी निवेशकों का भरोसा भारत के इस बाजार को संभाले हुए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की उम्मीदें जग रही हैं, अगर ऐसा होता है तो जल्द ही हमें एक बार फिर भारतीय शेयर मार्केट गुलजार होता हुआ नजर आएगा.
ये भी पढ़ें- नए रिकॉर्ड पर अदाणी ग्रुप, मार्केटकैप 20 लाख करोड़ के करीब, 2026 में जोड़े 5 लाख करोड़
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं