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Dollar vs Rupee : डॉलर के मुकाबले रुपया 95.40 के ऑल-टाइम लो पर, जानें गिरते रुपये को संभालने के लिए क्या है RBI का मास्टरप्लान?

Rupee at All-time Low: भारतीय रुपये में रिकॉर्ड गिरावट के बाद RBI एक्शन में आ गया है. रुपये को संभालने के लिए RBI अब 2013 में इस्तेमाल किए गए एक खास फॉर्मूले को फिर से लागू करने पर विचार कर रहा है.

Dollar vs Rupee : डॉलर के मुकाबले रुपया 95.40 के ऑल-टाइम लो पर, जानें गिरते रुपये को संभालने के लिए क्या है RBI का मास्टरप्लान?
Rupee at All-time Low: रुपये को बचाने के लिए RBI अपनाएगा '2013 वाला फॉर्मूला', डॉलर की किल्लत दूर करने के लिए बड़े कदम की तैयारी...

Rupee at All-time Low: अमेरिका-ईरान के बीच हुए हमलों ने भारतीय करेंसी को रिकॉर्ड गिरावट की ओर धकेल दिया है. मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 17 पैसे टूटकर 95.40 प्रति डॉलर के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर पहुंच गया. इससे पहले पिछले गुरुवार को रुपया 95.33 के रिकॉर्ड निचले स्तर को छू चुका था. 

रुपये की इस गिरावट ने अब रिजर्व बैंक की चिंता बढ़ा दी है, और इसी के चलते RBI भारतीय करेंसी को संभालने के लिए एक्शन मोड में नजर आ रहा है.

लगातार क्यों गिर रहा रुपया, ये है बड़ी वजह

भारतीय करेंसी में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं. सबसे अहम वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है.ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव $114 प्रति बैरल के पार जा पहुंचा है.वहीं वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) $105 के नीचे ट्रेड कर रहा है.  भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये पर पड़ता है.

इसके अलावा, विदेशी निवेशकों ने भी भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है. मार्च और अप्रैल के बीच करीब 19 अरब डॉलर की निकासी हुई है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट आई है.

विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट पर असर

भारत का फॉरेक्स रिजर्व पहले $728.5 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर था, जो अब घटकर करीब $698 बिलियन रह गया है. हालांकि RBI का कहना है कि यह स्तर अभी भी 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन लगातार गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है.

रुपये को संभालने के लिए RBI अब 2013 में इस्तेमाल किए गए एक खास फॉर्मूले को फिर से लागू करने पर विचार कर रहा है.

RBI का ‘2013 वाला फॉर्मूला' क्या है?

इस फॉर्मूले के तहत अनिवासी भारतीयों (NRI) से डॉलर जमा करवाने की स्कीम लाई जाती है.बैंक इन डॉलर डिपॉजिट को RBI के साथ आसान दरों पर स्वैप कर सकते हैं. इससे पहले 2013 में इसी तरीके से करीब $26 बिलियन जुटाए गए थे, जिससे रुपये को गिरने से रोकने में मदद मिली थी.

विदेशी निवेश बढ़ाने की तैयारी

RBI और सरकार एक और विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं.विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी बॉन्ड पर लगने वाला 5% विदहोल्डिंग टैक्स हटाया जा सकता है.इस कदम से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और देश में डॉलर का फ्लो बढ़ सकता है.2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड मार्केट में करीब $6.5 बिलियन का निवेश किया था, लेकिन 2026 में यह आंकड़ा घटकर करीब $1.1 बिलियन रह गया है. वहीं, इक्विटी मार्केट से कुल निकासी 2026 में $20 बिलियन से ज्यादा हो चुकी है.

रुपये की ऐतिहासिक गिरावट को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पहले भी कई कड़े कदम उठाए हैं. RBI ने डॉलर की बढ़ती मांग को कम करने के लिए तेल कंपनियों को स्पॉट मार्केट से अपनी खरीदारी कम करने की सलाह दी है. इसके साथ ही, फॉरेक्स मार्केट में सीधे हस्तक्षेप करने के अलावा, बैंकों द्वारा की जाने वाली आर्बिट्राज ट्रेडिंग पर भी लिमिट लगा दिया गया है ताकि करेंसी की अस्थिरता को कम किया जा सके.

एक्सपर्ट का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट तनाव जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव बना रहेगा. ऐसे में सरकार और RBI को डॉलर इनफ्लो बढ़ाने और ट्रेड डेफिसिट कम करने के लिए और कदम उठाने पड़ सकते हैं.

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