Remittance: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा रेमिटेंस (विदेशों से भेजी गई रकम) पाने वाला देश बना हुआ है. बड़ी बात यह है कि अमेरिका-ईरान संकट के बावजूद खाड़ी देशों (GCC) में रहने वाले भारतीय प्रवासियों ने घर पैसे भेजने का सिलसिला मजबूती से जारी रखा है.
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रेमिटेंस क्या है और इसका महत्व?
सरल शब्दों में रेमिटेंस (Remittance) वह धन या सामान है, जो प्रवासी नागरिक विदेशों से सीधे अपने गृह देश में मौजूद अपने परिवारों या स्थानीय समुदायों को ट्रांसफर करते हैं. RBI के अनुसार रेमिटेंस बाहरी फाइनेंसिंग (External Financing) के सबसे स्थिर और भरोसेमंद हिस्सों में से एक है. यह वित्तीय बाजार के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता जैसी प्रतिकूल घटनाओं से काफी हद तक अछूता रहता है.
वैश्विक स्तर पर भारत का दबदबा: ‘वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026'
संयुक्त राष्ट्र (UN) की 'वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026' के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत $137.67 बिलियन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्तकर्ता देश रहा. वैश्विक पटल पर भारत की यह स्थिति इतनी मजबूत है कि उसे प्राप्त हुई रकम, सूची में उसके बाद आने वाले अगले तीन देशों क्रमशः मेक्सिको, फिलीपींस और फ्रांस को मिले कुल रेमिटेंस के लगभग बराबर (सिर्फ थोड़ा ही कम) थी.
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भारतीय रेमिटेंस में देशों की हिस्सेदारी
भारत सरकार के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत आने वाले पैसे में निरंतर और ऐतिहासिक वृद्धि देखी गई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रेमिटेंस सर्वे (2021) के अनुसार, भारत में आने वाले कुल धन में सर्वाधिक हिस्सेदारी संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की है.
देश के हिसाब से हिस्सेदारी (2020-21):
देश कुल रेमिटेंस में हिस्सेदारी
संयुक्त राज्य अमेरिका 23.4 %
संयुक्त अरब अमीरात 18.0 %
यूनाइटेड किंगडम 6.8 %
सिंगापुर 5.7 %
सऊदी अरब 5.1 %
कुवैत 2.4 %
ओमान 1.6
कतर 1.5
हांगकांग 1.1
ऑस्ट्रेलिया 0.7
मलेशिया 0.7
कनाडा 0.6
जर्मनी 0.6
इटली 0.1
फ़िलीपींस 0.0
नेपाल 0.0
अन्य 31.6
((RBI रेमिटेंस सर्वे, 2021)
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों में भारतीय प्रवासियों की स्थिति
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जनवरी 2026 में जारी आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी के छह प्रमुख देशों में लगभग 1 करोड़ (99.6 लाख) भारतीय प्रवासी निवास कर रहे हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र से भारत को भारी मात्रा में आर्थिक सहयोग प्राप्त होता है.
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