जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची अपने तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत की राजधानी नई दिल्ली पहुंच चुकी हैं. 1 जुलाई से 3 जुलाई तक चलने वाले इस दौरे का मुख्य केंद्र 16वां 'भारत-जापान शिखर सम्मेलन' है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आईं सानाए ताकाइची का यह बतौर प्रधानमंत्री पहला भारत दौरा है. इस यात्रा को लेकर दोनों देशों के कूटनीतिक गलियारों में भारी उत्साह है और उम्मीद की जा रही है कि यह दौरा आने वाले दशक में दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा.
इस बेहद अहम दौरे का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक मकसद 'मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत' (FOIP) क्षेत्र की परिकल्पना को साकार करना है. इसके लिए दोनों देशों का साथ आना बेहद जरूरी माना जा रहा है.
ようこそ、インドへ, Prime Minister Sanae Takaichi!
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) July 1, 2026
A very warm welcome to Prime Minister Sanae Takaichi of Japan who arrives in New Delhi on an Official Visit. PM Takaichi was received by MoS @DrJitendraSingh.
The visit marks an important step in taking forward the Special… pic.twitter.com/N4mvBcWvu4
सम्मेलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम ताकाइची के बीच पिछले साल अगस्त में पीएम मोदी की जापान यात्रा के दौरान घोषित 'अगले दशक के लिए भारत-जापान संयुक्त विजन' पर विस्तृत चर्चा होगी. भारत और जापान इस बात पर मंथन करेंगे कि कैसे निवेश, इनोवेशन और ऊर्जा सुरक्षा सहित आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्रों में आपसी पूरक सहयोग को और मजबूत किया जाए.
प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने भारत आने से पहले कहा कि भारत की इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (आईपीओआई) और महासागर पर आधारित सहयोग के उदाहरण पहले से ही स्पष्ट हैं.

सानाए ताकाइची
AI, सेमीकंडक्टर चिप और फार्मा को लेकर भारत की उम्मीदें क्या हैं?
इस शिखर सम्मेलन से भारत को बहुत बड़ी उम्मीदें हैं. नई दिल्ली इस बैठक के जरिए अत्याधुनिक तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी सेक्टर में जापान से बड़ा सहयोग हासिल करना चाहती है. भारत का सबसे बड़ा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर (चिप) सेक्टर पर है. भारत खुद को ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश में जुटा है और इसमें जापान की उन्नत तकनीक और निवेश भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं.
इसके अलावा, भारत दवा क्षेत्र, एडवांस्ड बैटरी तकनीक और क्रिटिकल मिनिरल्स की खोज के क्षेत्र में जापान के साथ बड़े समझौतों को अंतिम रूप देने की तैयारी में है. भारत की कोशिश है कि जापान की मदद से देश में हाई-टेक मोबिलिटी पार्टनरशिप को बढ़ावा दिया जाए, ताकि भविष्य के परिवहन और ऑटोमोबाइल सेक्टर को नई दिशा मिल सके.

Photo Credit: Ministry Of Foreign Affairs, Japan
क्लीन एनर्जी पर बड़ा दांव और वैश्विक संकटों से निपटने की तैयारी
बिजली और ऊर्जा के क्षेत्र में भारत इस दौरे से एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने की उम्मीद कर रहा है. खासकर ओडिशा में जापानी सहायता से शुरू होने वाले एक बड़े 'ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट' पर दोनों देशों के बीच अहम बातचीत होनी है. इसके साथ ही बायोगैस सहयोग को मजबूत करने और पूरे एशिया में क्षेत्रीय ऊर्जा ग्रिड को लचीला बनाने के लिए 'पावर एशिया' (POWERR Asia) जैसी पहलों पर भी भारत का पूरा जोर रहेगा.
जापानी पीएम ताकाइची के इस दौरे में रक्षा और सुरक्षा भी एक बड़ा एजेंडा है. हाल ही में जापान ने अपने हथियारों के ट्रांसफर से जुड़े नियमों में ढील दी है, जिससे अब भारत के साथ डिफेंस को-प्रोडक्शन और को-डेवलपमेंट (साझा उत्पादन और विकास) के नए रास्ते खुल गए हैं. भारत चाहता है कि वह जापान की बेहतरीन सैन्य तकनीक, रोबोटिक्स और शिपबिल्डिंग कला का लाभ उठाए.
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