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WPI Data April 2026: अप्रैल में थोक महंगाई उछलकर 8.3% पर पहुंची, तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन!

India Wholesale Inflation Data April 2026: थोक कीमतों में आई इस तेज वृद्धि ने आने वाले समय में खुदरा महंगाई और आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ सकता है.

WPI Data April 2026: अप्रैल में थोक महंगाई उछलकर 8.3% पर पहुंची, तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन!
India WPI Inflation April 2026: फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में 1.98% रही जो मार्च में यह 1.90% थी.

April 2026 WPI Inflation Data: भारत में महंगाई को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है. भारत की थोक महंगाई दर में अप्रैल महीने में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर (WPI Inflation) साल-दर-साल आधार पर उछलकर 8.3% पर पहुंच गई, जो करीब 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. इसकी सबसे बड़ी वजह पेट्रोल-डीजल, LPG, कच्चे तेल और बिजली की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही. मिडिल ईस्ट संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है.

अप्रैल में थोक महंगाई दर में बड़ा उछाल

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर 8.30% रही, जबकि पिछले महीने यानी मार्च में यह 3.88% पर थी. यानी सिर्फ एक महीने में होलसेल इंफ्लेशन में बड़ा उछाल देखने को मिला है. यह तेजी मुख्य रूप से ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आई है.

Fuel और Power Prices ने बढ़ाई महंगाई

थोक महंगाई के फ्यूल एंड पावर कैटेगरी में अप्रैल के दौरान भारी उछाल दर्ज किया गया.फ्यूल एंड पावर इन्फ्लेशन अप्रैल में बढ़कर 24.71% हो गई  जबकि मार्च में यह सिर्फ 1.05% थी.यानी एक महीने में इस कैटेगरी में बहुत तेज बढ़ोतरी देखने को मिली.

Crude Oil इंफ्लेशन 88% के पार

कच्चे तेल यानी Crude Petroleum में महंगाई अप्रैल में 88.06% तक पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 51.5% थी.मिडिल ईस्ट संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा के कारण भारत को आयात होने वाले तेल की लागत तेजी से बढ़ी है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक तेल कीमतों का सीधा असर घरेलू महंगाई पर पड़ रहा है.

Petrol-Diesel और LPG की कीमतों का क्या असर पड़ा?

ईंधन से जुड़े कई उत्पादों में भी महंगाई तेज हुई....

  • LPG Inflation अप्रैल में 10.92% रही, जबकि मार्च में यह -1.54% थी
  • पेट्रोल में महंगाई 32.40% पहुंच गई, जो मार्च में 2.50% थी
  • हाई-स्पीड डीजल (HSD) में महंगाई 25.19% रही, जबकि मार्च में यह 3.26% थी

हालांकि सरकार ने अभी तक घरेलू LPG और पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी नहीं की है.

सरकार ने क्यों नहीं बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम?

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% की तेजी आने के बावजूद सरकार ने अब तक पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG के रेट स्थिर रखे हैं ताकि आम लोगों पर बोझ कम पड़े.हालांकि कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है.

Food Inflation में हल्की बढ़ोतरी

खाद्य वस्तुओं की महंगाई में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में 1.98% रही जो मार्च में यह 1.90% थी. वहीं नॉन-फूड आर्टिकल इन्फ्लेशन बढ़कर 12.18% पहुंच गई, जो मार्च में 11.5% थी.

सरकार ने बताई महंगाई बढ़ने की वजह

वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अप्रैल 2026 में इंफ्लेशन रेट मुख्य रूप से इन वजहों से बढ़ा है...

  • मिनिरल ऑयल की कीमतें बढ़ना
  • क्रूड पेट्रोलियम और नेचुरल गैस महंगा होना
  • मेटल की कीमतों में तेजी
  • मैन्युफैक्रिंग प्रोडक्ट्स की लागत बढ़ना
  • नॉन-फूड आर्टिकल की कीमतों में इजाफा

West Asia Crisis का भारत पर कितना असर?

मिडिल ईस्ट संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल सप्लाई पर असर के कारण भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ गया है. भारत अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है.ऊंचे तेल दामों का असर ट्रांसपोर्ट, बिजली, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा की कई चीजों की लागत पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बना रहता है. थोक महंगाई बढ़ने का असर आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई पर भी पड़ सकता है.अगर ईंधन और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने के सामान, गैस और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें और महंगी हो सकती हैं.

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