अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने 1974 के व्यापार अधिनियम की 'धारा 301' (Section 301) के तहत भारत सहित दुनिया के 60 देशों पर 10% से लेकर 12.5% तक अतिरिक्त सीमा शुल्क (Additional Tariffs/Duties) लगाने का एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया है. अमेरिका का कहना है कि ये देश जबरन श्रम (Forced Labor) से तैयार होने वाली वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं. ट्रंप प्रशासन की इस नई टैरिफ नीति के प्रस्ताव से वैश्विक बाजारों में खलबली मच गई है.
भारत सरकार की पहली प्रतिक्रिया
अमेरिका द्वारा भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने के इस प्रस्ताव पर बुधवार को भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत इस मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है.
-
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'धारा 301 की कार्यवाही के तहत भारत इस मामले पर अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखे हुए है. भारत अमेरिका के साथ एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (Framework Agreement) को अंतिम रूप देने के लिए भी चर्चा कर रहा है, जिसकी घोषणा 2 फरवरी 2026 को की गई थी. ये 7 फरवरी 2026 को जारी दोनों देशों के संयुक्त वक्तव्य के अनुरूप है.'
अभी अंतिम फैसला नहीं, जुलाई में पब्लिक हियरिंग
मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने इस प्रस्तावित शुल्क को अभी अंतिम रूप नहीं दिया है. अमेरिका ने सभी संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) को अपनी बात रखने का मौका दिया है. जो लोग इस मामले में सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearing) का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे 22 जून 2026 तक अपना अनुरोध भेज सकते हैं. इसके अलावा, इस प्रस्ताव पर लिखित आपत्तियां या टिप्पणियां 6 जुलाई 2026 तक जमा की जा सकती हैं.
इस पूरे विवाद पर 7 जुलाई 2026 को अमेरिका में एक सार्वजनिक सुनवाई आयोजित होगी. अमेरिकी प्रशासन इन सभी प्राप्त टिप्पणियों और गवाहियों की समीक्षा करने के बाद ही टैक्स लगाने पर कोई आखिरी फैसला लेगा.
टैक्स प्रस्ताव से किसे मिली राहत?
वाणिज्य मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि इस नए टैरिफ प्रस्ताव से कुछ भारतीय उद्योगों को बड़ी राहत मिल सकती है. बयान के अनुसार, 'धारा 232' के दायरे में आने वाले उत्पादों और कुछ अन्य विशिष्ट सामानों को इस नए टैक्स प्रस्ताव से पूरी तरह बाहर रखा गया है.
इसके साथ ही, कपड़ा और परिधान (Textile and Apparel) क्षेत्र के उत्पादों के लिए एक विशेष व्यवस्था (Special Mechanism) का प्रस्ताव दिया गया है. इसके तहत चुनिंदा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से एक निश्चित मात्रा (Quotas) में आने वाले टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स को कम शुल्क दरों पर अमेरिका में प्रवेश मिल सकता है.
मार्च में शुरू हुई थी जांच
इस पूरे विवाद की नींव इसी साल 12 मार्च, 2026 को पड़ी थी, जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भारत सहित 60 देशों के खिलाफ जबरन श्रम से जुड़ी वस्तुओं के आयात को न रोक पाने की जांच शुरू की थी. अब जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमेरिका ने इन देशों के खिलाफ भारी-भरकम अतिरिक्त ड्यूटी लगाने का यह नया ड्राफ्ट तैयार किया है, जिस पर भारत सरकार की पैनी नजर बनी हुई है.
ये भी पढ़ें: इधर मार्केट में संकट, उधर सोने-चांदी ने मार दी पलटी! एक्सपर्ट ने बताया- कहां तक गिरेंगे भाव
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं