किसान आंदोलन की चेतावनी के बीच वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एनडीए की बैठक में FTA (Free Trade Agreement) यानी मुक्त व्यापार समझौता पर प्रजेंटेशन दिया है. बता दें FTA की वजह से किसानों ने इसका विरोध किया था, वहीं अब सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी थी. पीयूष गोयल ने NDA की बैठक में बताया कि मोदी सरकार ने अभी तक जो मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, उनसे देश के अलग-अलग राज्यों को किस तरह फ़ायदा पहुंचेगा. उन्होंने सांसदों से कहा कि इसके बारे में अपने संसदीय क्षेत्रों में बताएं.
पीयूष गोयल ने कहा कि यूपीए सरकार ने छोटे देशों से एफटीए किए थे और ऐसा करने से पहले हितधारकों से चर्चा नहीं की थी. यूपीए के एफटीए जीडीपी में मात्र दस ट्रिलियन डॉलर के थे जबकि मोदी सरकार के एफटीए 60 ट्रिलियन डॉलर के हैं. गौरतलब है कि पंजाब के कुछ किसान संगठनों ने हाल ही में एफटीए के विरोध में दिल्ली कूच की चेतावनी दी थी.
हालांकि गोयल ने प्रजेंटेशन में कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए डेयरी, अनाज, मसालों और कई अन्य कृषि उत्पादों को एफटीए से बाहर रखा गया है. मुक्त व्यापार समझौते आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार रणनीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ हैं. ये समझौते विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को सुगम बनाने, आयात-निर्यात शुल्कों को कम करने तथा व्यापारिक बाधाओं को समाप्त करने का कार्य करते हैं.
भारत सरकार वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ अपने एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक व्यापार समझौतों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है.
पीयूष गोयल ने बताए FTA के फायदे
मुक्त व्यापार समझौतों के प्रमुख लाभों में बाज़ार तक बेहतर पहुंच बनाना है. भारतीय निर्यातकों को विदेशी बाज़ारों में अपने उत्पादों और सेवाओं को बेचने के लिए व्यापक अवसर प्राप्त होते हैं. इससे गैर-शुल्क बाधाओं का निवारण होता है. मानकों, नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर व्यापार को निर्बाध बनाया जाता है. व्यापार निश्चितता और शुल्क पूर्वानुमेयता होती है. व्यवसायियों को एक स्थिर और पारदर्शी नीतिगत ढांचा मिलता है, जिससे दीर्घकालिक निवेश योजनाएं बनाना आसान होता है.व्यापार सुगमता बढ़ती है, जिससे सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करके समय और लागत की बचत होती है.
इससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलता है. यह एक स्थिर व्यापार वातावरण विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को आकर्षित करता है.वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में प्रवेश होता है. भारतीय उद्योग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक अभिन्न अंग बनते हैं. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नवाचार में मदद मिलती है. आधुनिक तकनीकों और नवाचारों तक पहुंच से घरेलू उत्पादकता में वृद्धि होती है. रोजगार और आय में वृद्धि होती है. निर्यात बढ़ने से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, जिससे नए रोजगार सृजित होते हैं और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है.
देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए उठा रहे कदम
गोयल ने कहा कि नए मुक्त व्यापार समझौतों के उपयोग के विभिन्न चरण हैं. इन समझौतों का पूरा लाभ उठाने और देश के प्रत्येक कोने तक इनके प्रभाव को पहुंचाने के लिए कई प्रमुख कदम उठाए जा रहे हैं. समग्र सरकारी दृष्टिकोण के माध्यम से संबंधित मंत्रालयों, सभी राज्य सरकारों और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के बीच पूर्ण समन्वय स्थापित किया जा रहा है. जागरूकता का प्रसार हो रहा है. डिजिटल पोर्टल और प्रत्येक जिले में विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापार समझौतों के लाभों की जानकारी फैलाई जा रही है. साथ ही समझौतों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए समर्पित निर्यात संवर्धन मिशन की स्थापना हो रही है.
ब्रांड संवर्धन और नेटवर्किंग की जा रही है. प्रमुख खरीदारों और आयातकों के साथ भारतीय ब्रांडों का प्रचार करना और व्यावसायिक संपर्क बढ़ाना.अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों का आयोजन हो रहा है. विदेशी धरती पर प्रदर्शनियों का आयोजन, प्रतिनिधिमंडलों की यात्रा और भंडारण सुविधाओं का विकास करना. अनुपालन और पंजीकरण में सहायता दी जा रही है. विदेशों में आवश्यक विधिक अनुपालनों और पंजीकरण प्रक्रियाओं को पूरा करने में सहयोग प्रदान करना.
वाणिज्य भवन में समर्पित प्रकोष्ठ बनाया गया है. निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग मंडलों और निर्यातकों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए वाणिज्य भवन में एक विशेष प्रकोष्ठ का गठन किया गया. भारत की अर्थव्यवस्था को वर्तमान चार ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक तीस ट्रिलियन डॉलर बनाना भी एफटीए का उद्देश्य है.
किन राज्यों को क्या होगा लाभ
दिल्ली (एनसीआर) को कपड़ा व परिधान, रत्न व आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में लाभ होगा. दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम से परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और चिकित्सा उपकरण को बढ़ावा मिलेगा. सूचना प्रौद्योगिकी, व्यापार परामर्श, पेशेवर सेवाओं में बढ़त होगी.
उत्तराखंड में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, प्लास्टिक, रबर, आभूषण, बेस मेटल्स. ऊधम सिंह नगर और देहरादून से प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, आभूषण और धातु उत्पाद. आयुष, योग और पर्यटन को बढ़ावा.
सिक्किम में औषधि निर्माण, मसाले, जैविक कृषि, चाय, पुष्प कृषि, हस्तशिल्प को प्रोत्साहन. टेमी चाय, बड़ी इलायची, अदरक, ऑर्किड, लकड़ी के शिल्प और कालीन और पर्यटन सेवाओं में वृद्धि.
महाराष्ट्र में कपड़ा, इंजीनियरिंग, फार्मा, रसायन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, आभूषण. इचलकरंजी से गारमेंट्स, पुणे से इंजीनियरिंग सामान, ठाणे-रायगढ़ से दवाइयां और मुंबई से आभूषण. वित्तीय सेवाएँ, सूचना प्रौद्योगिकी, परामर्श, रियल एस्टेट.
गुजरात में कपड़ा, रसायन, इंजीनियरिंग, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद.सूरत से कपड़ा व हीरे, भरूच-वडोदरा से रसायन व दवाइयां, राजकोट से इलेक्ट्रॉनिक्स, वेरावल से समुद्री उत्पाद. वित्तीय सेवाएँ, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स.
कर्नाटक में इंजीनियरिंग, चिकित्सा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, कपड़ा. बेंगलुरु-तुमकुरु से इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, बेंगलुरु से गारमेंट्स का निर्यात. सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, वैश्विक केंद् सेवाओं को बढ़ावा.
तेलंगाना में कपड़ा, चिकित्सा उपकरण, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स. हैदराबाद-वारंगल से कपड़ा और परिधान, हैदराबाद से दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग उत्पाद. सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, इंजीनियरिंग सेवाएँ.
आंध्र प्रदेश में समुद्री उत्पाद, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स. विशाखापत्तनम और काकीनाडा से झींगा व समुद्री उत्पाद; विशाखापत्तनम से दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक्स. वित्तीय, इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, रियल एस्टेट, समुद्री सेवाएं.
पश्चिम बंगाल में चाय, समुद्री उत्पाद, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद. उत्तर बंगाल से दार्जिलिंग चाय, दीघा और हल्दिया से समुद्री उत्पाद, पारम्परिक हस्तशिल्प.सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग डिजाइन सेवाएँ.
झारखंड में खनिज, ऊर्जा, बेस मेटल्स, ऑटो पार्ट्स, परिवहन. गोड्डा और बोकारो से धातु व पेट्रोलियम उत्पाद; पूर्वी सिंहभूम व धनबाद से वाहन पुर्जे. व्यावसायिक सेवाएं, इको-टूरिज्म.
बिहार में पेट्रोलियम उत्पाद, कृषि, रसायन, वस्त्र, चमड़ा व जूते. बेगूसराय से पेट्रोलियम ईंधन, पूर्वी चंपारण से कृषि उत्पाद, पटना से दवाइयां और वैशाली से चमड़े के जूते. शिक्षा, कौशल विकास, निर्माण और परिवहन सेवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा.
गोयल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते भारत की आर्थिक संप्रभुता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने के लिए अत्यधिक आवश्यक हैं. भारत के विभिन्न राज्य, वे उत्तर-पूर्व के हस्तशिल्प और कृषि क्षेत्र हों, दक्षिण और पश्चिम भारत के औद्योगिक व तकनीकी केंद्र हों, सभी इस वृहद व्यापार नीति से सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं.
यह भारत को वर्ष 2047 तक तीस ट्रिलियन डॉलर की वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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