केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को ऐलान किया है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स के कारोबार के भगोड़े सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया को संयुक्त अरब अमीरात से वापस लाने में कामयाबी हासिल की है. उन्होंने इसे 'नशीले पदार्थों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस' की दिशा में एक 'बड़ी उपलब्धि' बताया है. ड्रग माफिया वीरेंद्र सिंह बसोया को UAE से दिल्ली लाया जा चुका है. बसोया 13 हजार करोड़ की ड्रग्स बरामदगी मामले में आरोपी है. दिल्ली, गुजरात और पंजाब से ड्रग्स बरामद की गई थी. यह ऑपरेशन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चलाया था. इससे पहले ही बसोया दुबई भाग गया था. इसके बाद, एनसीबी में भी उसके खिलाफ केस दर्ज किया था.
सोशल मीडिया पोस्ट में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, "मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और सख्त रवैया अपनाते हुए उनके पूरे नेटवर्क को खत्म कर रही है."
Modi govt is relentlessly tracking down drug traffickers hiding abroad and destroying their entire ecosystem with a ruthless approach.
— Amit Shah (@AmitShah) August 14, 2026
Creating a new milestone in the policy of zero tolerance against narcotics, the NCB secured the return of fugitive drug kingpin Virender Singh…
अमित शाह ने कहा, "ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर तक की जांच के जरिए अपराधी का पता लगाकर हमारी एजेंसियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे भारतीय कानून की पकड़ से बच नहीं सकते."
कौन है वीरेंद्र सिंह बसोया?
दिल्ली से लेकर गुजरात, पंजाब और विदेश तक फैले करीब 13 हजार करोड़ रुपये के ड्रग्स नेटवर्क में जिस नाम को जांच एजेंसियां कथित तौर पर मास्टरमाइंड के तौर पर देख रही थीं, वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरू वही है. लंबे वक्त से विदेश में रह रहा बसोया अब भारतीय जांच एजेंसियों की गिरफ्त में है. एनसीबी ने उसे UAE से भारत प्रत्यर्पित करवाया है. यह घटनाक्रम 13 हजार करोड़ के ड्रग्स सिंडिकेट की जांच में बड़ा मोड़ माना जा रहा है.
13 हजार करोड़ के ड्रग्स की पूरी कहानी क्या है?
इस पूरे मामले की शुरुआत अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की कार्रवाई से हुई थी. 1 अक्टूबर 2024 को मिली गुप्त सूचना के आधार पर महिपालपुर एक्सटेंशन में छापेमारी की गई. यहां से तुषार गोयल, हिमांशु कुमार और औरंगजेब सिद्दीकी को पकड़ा गया. इनके कब्जे से करीब 16 किलो कोकीन जैसा पदार्थ मिला और इसी इमारत से पुलिस ने करीब 547 किलो कोकीन और 39.706 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया.
इसके बाद जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, ड्रग्स की नई खेप सामने आती गई. 3 अक्टूबर को अमृतसर एयरपोर्ट से जतिंदर सिंह गिल उर्फ जस्सी को गिरफ्तार किया गया. 5 अक्टूबर को पंजाब में उसके इस्तेमाल वाली फॉर्च्यूनर की तलाशी में करीब 1.096 किलो ड्रग्स मिली. कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक यह गाड़ी वीरेंद्र बसोया के भाई रविंदर की थी.
इन सभी बरामदगियों को जोड़ने पर जांच में कुल 1,289 किलो कोकीन/मेफेड्रोन और करीब 39.7 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा सामने आया. बाद में भी जांच आगे बढ़ती रही और जनवरी 2026 में इसी सिंडिकेट से जुड़े होने के आरोप में सिक्किम से तिलक प्रसाद शर्मा की गिरफ्तारी की खबर सामने आई. इस मामले में कुल 14 आरोपी गिरफ्तार हुए है और दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट भी पेश कर दी है.
वीरेंद्र बसोया का नाम कैसे सामने आया?
पुलिस की जांच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क के तार विदेशों तक जुड़े हुए थे. वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरू और सैंडिप संसार धुने को कथित किंगपिन बताया गया है. जांच में इस नेटवर्क के कनेक्शन UK, मलेशिया, पाकिस्तान, थाईलैंड और दुबई तक सामने आने की बात सामने आई.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ड्रग्स की सप्लाई के लिए कई कंपनियों और कथित फर्जी कारोबारी ढांचे का इस्तेमाल किया गया. पुलिस की जांच में Pharma Solution Services, RM Biochem और Life Saver Pharma नाम की कंपनियों का जिक्र है. इनके ई-मेल खातों की लोकेशन पाकिस्तान और मलेशिया से जुड़ने की बात जांच में सामने आई.
जांच में यह भी सामने आया कि दक्षिण अमेरिका से ड्रग्स को दुबई के रास्ते भारत लाया जाता था. गुजरात के अंकलेश्वर में फार्मा और केमिकल कंपनियों की आड़ में ड्रग्स को प्रोसेस करने और फिर मेडिकल कंसाइनमेंट के नाम पर आगे भेजने का आरोप है. इसके बाद दिल्ली-NCR समेत दूसरे शहरों तक इसकी सप्लाई की जाती थी.
ड्रग्स की डिलीवरी का तरीका भी बेहद खास था
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह नेटवर्क सीधे फोन पर बातचीत करने के बजाय अलग-अलग सुरक्षित और कोडेड तरीकों का इस्तेमाल करता था. जांच में पेड और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के इस्तेमाल तथा क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भुगतान की बात सामने आई थी. ड्रग्स की डिलीवरी के लिए लोकेशन और पिकअप प्वाइंट साझा किए जाते थे.
ड्रग्स को कभी केमिकल कंसाइनमेंट तो कभी कार्डबोर्ड बॉक्स में कपड़ों या नमकीन के पैकेटों के बीच छिपाकर भेजने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क की सप्लाई दिल्ली, पंजाब, मुंबई, हैदराबाद और गोवा तक पहुंच रही थी और कुछ ड्रग्स की खपत पार्टियों और म्यूजिक इवेंट्स में होने का आरोप है.
970 किलो मेफेड्रोन वाला मामला भी बसोया से जुड़ा
वीरेंद्र बसोया का नाम इससे पहले भी बड़े ड्रग्स केस में सामने आ चुका था. NCB के दस्तावेजों के मुताबिक, पुणे पुलिस ने 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई करते हुए दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किया था. इनके कब्जे से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद हुई थी.
जांच एजेंसी के मुताबिक, दिवेश भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया कथित तौर पर वीरेंद्र बसोया के निर्देश पर काम कर रहे थे. यानी एक तरफ दिल्ली और गुजरात में कोकीन का बड़ा नेटवर्क सामने आया, तो दूसरी तरफ पुणे की जांच में मेफेड्रोन को विदेश भेजने की कथित साजिश में भी बसोया का नाम सामने आया.
बसोया का भाई भी हुआ था गिरफ्तार...
इस पूरे नेटवर्क की जांच में वीरेंद्र के भाई रविंदर बसोया का नाम भी सामने आया. 5 अक्टूबर 2024 को जिस फॉर्च्यूनर से करीब 1.096 किलो ड्रग्स बरामद हुई थी, वह रविंदर की थी और इसका इस्तेमाल जतिंदर सिंह गिल उर्फ जस्सी कर रहा था. रविंदर को बाद में दिसंबर 2024 में इस ड्रग्स केस में गिरफ्तार किया गया था. यानी जांच के दायरे में सिर्फ वीरेंद्र बसोया ही नहीं आया, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों की भूमिका भी जांची गई.
बेटा ऋषभ भी जांच के घेरे में...
वीरेंद्र बसोया के बेटे ऋषभ बसोया का नाम भी इसी नेटवर्क में सामने आया है. दिल्ली पुलिस की जांच के मुताबिक, ऋषभ की SUV का इस्तेमाल ड्रग्स की खेप लेने के लिए किया गया था. जांच में यह आरोप सामने आया कि उसने अपनी फॉर्च्यूनर जतिंदर सिंह गिल उर्फ जस्सी को उपलब्ध कराई थी. बाद में इसी वाहन से पंजाब में ड्रग्स बरामद हुई.
जांच में ऋषभ और जस्सी के बीच संपर्क के सबूत के तौर पर दिल्ली के हुडको प्लेस और पंचशील एन्क्लेव इलाके के एक होटल की CCTV फुटेज का भी उल्लेख हुआ है. पुलिस का आरोप है कि ऋषभ सिर्फ परिवार का सदस्य नहीं था, बल्कि नेटवर्क के लॉजिस्टिक्स और ड्रग्स की आवाजाही में उसकी सक्रिय भूमिका थी.
वीरेंद्र बसोया दक्षिणी दिल्ली के पिलांजी गांव का रहने वाला है. 2023 में उसके बेटे ऋषभ की शादी उत्तर प्रदेश के नोएडा से जुड़े एक पूर्व विधायक की बेटी से हुई थी और शादी दिल्ली एयरपोर्ट के पास एक आलीशान फार्महाउस में हुई थी. शादी के अगले ही दिन पुणे पुलिस ने उसके घर में रेड की. वीरेंद्र बसोया रेड होने के पहले हो परिवार समेत विदेश भाग गया था.
अक्टूबर 2024 में दिल्ली ड्रग्स केस सामने आने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ Look-Out Circular जारी किया था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह भारत से बाहर रहकर नेटवर्क को चला रहा था. पुलिस की कार्रवाई के बाद वह भारत नहीं लौटा और विदेश में ही रहा. अब उसके खिलाफ लंबी अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के बाद UAE से भारत प्रत्यर्पण हुआ है. यह कार्रवाई भारत और UAE के बीच अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय के जरिए हुई.
अब जांच एजेंसियों को सीधे उससे पूछताछ का मौका मिलेगा. खास तौर पर विदेश से भारत तक ड्रग्स पहुंचाने का नेटवर्क, हवाला और मनी ट्रेल, विदेशी संपर्क, पाकिस्तान-दुबई कनेक्शन, कथित फर्जी कंपनियों और नेटवर्क में उसके बेटे ऋषभ समेत दूसरे आरोपियों की भूमिका की जांच अहम होगी.
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