- अमेरिकी सीनेट में ग्राहम बिल पर आगे चर्चा शुरू करने के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 12 सांसदों ने विरोध किया
- दोनों सदनों से अगर बिल पास हुआ तो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है
- जब सीनेट में इस बिल पर वोटिंग हो रही थी तब यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की सीनेट गैलरी से देख रहे थे
अमेरिका की सीनेट ने एक ऐसे बिल पर चर्चा की मंजूरी दे दी है जिसका भारत पर बड़ा असर हो सकता है. अमेरिकी संसद के इस उच्च सदन ने मंगलवार, 28 जुलाई को रूस की तेल और गैस बेचने से होने वाली कमाई को निशाना बनाने वाले बड़े प्रतिबंध (सैंक्शन) वाले बिल को आगे बढ़ा दिया. बिल पास करने की ओर पहला कदम उठा लिया गया है. अगर अब यह बिल निचले सदन से भी पास हो जाता है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह पावर मिल जाएगा कि वह रूस से तेल खरीदने वाले भारत जैसे देशों पर 100 प्रतिशत का टैरिफ लगा सकते हैं. जब सीनेट में इस बिल पर वोटिंग हो रही थी तब यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की सीनेट गैलरी से देख रहे थे. रूस से जंग के बीच जेलेंस्की वॉशिंगटन पहुंचे थे, उन्होंने ट्रंप से मुलाकात की है और रूस के खिलाफ और सख्त कदम उठाने की मांग की है.
बिल पास हुआ तो क्या होगा?
सीनेट में इस बिल पर आगे चर्चा शुरू करने के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 12 सांसदों ने विरोध किया. इससे बिल की पहली प्रक्रिया पूरी हो गई है, लेकिन अभी इस पर और बहस होगी और उसके बाद अंतिम वोटिंग होगी. इस बिल में रूस के अधिकारियों, बड़े अमीर कारोबारियों (ओलिगार्क), वित्तीय संस्थानों और उस तथाकथित "शैडो फ्लीट" पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, जिसका इस्तेमाल रूस अपने तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है.
इस बिल के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह अधिकार भी मिलेगा कि वे रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों, जैसे चीन और भारत, से आने वाले सामान पर 100% तक का टैरिफ लगा सकें.
यह वोटिंग उस बैठक के कुछ घंटे बाद हुई, जिसमें जेलेंस्की ने व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने रिपब्लिकन सांसद लिंडसी ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा लिया. लिंडसी ग्राहम अमेरिकी कांग्रेस में यूक्रेन के सबसे मजबूत समर्थकों में गिने जाते थे. बाद में जेलेंस्की ने वोटिंग से पहले अमेरिकी सीनेटरों को भी संबोधित किया. उन्होंने यूक्रेन के समर्थन और रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने की अपील की. उन्होंने कहा कि लड़ाई लगातार तेज हो रही है और अमेरिका की अगुवाई में चल रही शांति कोशिशें अभी तक आगे नहीं बढ़ पाई हैं.
इस बिल का नाम लिंडसी ग्राहम के नाम पर रखा गया है. उन्होंने इस बिल के लिए एक साल से ज्यादा समय तक समर्थन जुटाया था. इसी महीने उनकी अचानक मौत से कुछ समय पहले व्हाइट हाउस के साथ इस बिल के बदले हुए मसौदे पर भी सहमति बन गई थी. गौरतलब है कि अमेरिकी संसद की निचली सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) पहले ही अपनी गर्मी की छुट्टियों पर जा चुकी है. इसलिए संभावना कम है कि यह बिल सितंबर से पहले वहां पेश किया जाएगा.
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