India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लगातार बातचीत (India-US Trade Talks) जारी है. इस बीच अमेरिकी सीनेट के सांसदों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि भारत में अमेरिकी दाल पर टैरिफ को कम कराया जाए. दालों के वैश्विक खपत में 27 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाला भारत, अमेरिकी दालों पर 30 फीसदी टैरिफ लगाता है. सांसदों का कहना है कि इससे अमेरिका के नॉर्थ डकोटा और मोंटाना जैसे दलहन उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को नुकसान हो रहा है. दालों पर टैरिफ कम होने पर किसानों की आय बढ़ेगी.
किन सांसदों ने पत्र में क्या कहा?
अमेरिकी सीनेट के दो सांसदों, केविन क्रेमर (नॉर्थ डकोटा) और स्टीव डाइन्स (मोंटाना) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भारत के साथ होने वाले किसी भी व्यापार समझौते (Trade Deal) में पल्स क्रॉप (दलहन) को प्राथमिकता देने की मांग की है. 16 जनवरी 2026, शुक्रवार को ट्रंप को भेजे गए पत्र में दोनों सीनेटरों ने कहा कि अमेरिका के कृषि उत्पादकों, खासकर नॉर्थ डकोटा और मोंटाना के किसानों के लिए भारत में बेहतर मार्केट एक्सेस सुनिश्चित करना जरूरी है.
पत्र में कहा गया है कि नॉर्थ डकोटा और मोंटाना अमेरिका में मटर (peas) समेत दलहनों के शीर्ष उत्पादक राज्य हैं, जबकि भारत दुनिया में दलहनों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और वैश्विक खपत में उसकी हिस्सेदारी लगभग 27% है. इसके बावजूद भारत में अमेरिकी दलहनों पर भारी टैरिफ लगाए गए हैं, जिससे अमेरिकी उत्पादकों को भारत में निर्यात के दौरान प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
'पीली मटर पर 30 फीसदी टैरिफ सही नहीं!'
दोनों सीनेटरों ने भारत में अमेरिकी पीली मटर (Yellow Peas) पर लगाए गए 30% टैरिफ को 'अनुचित' बताया है. पत्र के मुताबिक, भारत ने 30 अक्टूबर 2025 को इस टैरिफ की घोषणा की थी, जो 1 नवंबर 2025 से लागू हो गया. उनका कहना है कि इस तरह के हाई टैरिफ अमेरिकी किसानों के लिए भारत जैसे बड़े बाजार में अवसर सीमित कर देते हैं.
ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी हुई थी PM मोदी से बात
सीनेटरों ने ट्रंप से आग्रह किया कि ट्रेड वार्ताओं के दौरान भारत के साथ किसी भी समझौते में दलहन से जुड़े अनुकूल प्रावधान (favourable pulse crop provisions) शामिल किए जाएं और टैरिफ घटाने को प्राथमिक एजेंडा बनाया जाए. पत्र में यह भी कहा गया है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत हुई थी और इससे अमेरिकी उत्पादकों को बातचीत के “टेबल” तक पहुंचने में मदद मिली थी.
सीनेटरों के अनुसार, अमेरिका के किसान वैश्विक मांग को पूरा करने की क्षमता रखते हैं और यदि व्यापार के अवसर बढ़ें तो यह कदम अमेरिकी उत्पादकों के साथ-साथ भारतीय उपभोक्ताओं के लिए भी लाभकारी हो सकता है.
(इनपुट: ऋषभ भटनागर, NDTV Profit)
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