IDBI Bank Share Price: IDBI बैंक के शेयर में गुरुवार, 15 अक्टूबर को अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली. एक दिन पहले करीब 9% की तेजी के बाद शेयर 7.5% तक टूट गया. इसकी वजह कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स (Fairfax Financial Holdings) की ओर से बैंक में 60.72% हिस्सेदारी खरीदने की डील (IDBI deal) को कैबिनेट की मंजूरी मिलना है. करीब ₹52,878 करोड़ के इस डील को मंजूरी मिलने के बाद निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग की, जिससे शेयर देखते ही देखते धड़ाम से गिरे.
एक दिन पहले 9% उछला, आज 7% टूटा शेयर
आज यानी गुरुवार को IDBI बैंक का शेयर बीएसई (BSE) पर 7.54% गिरकर ₹83.62 पर आ गया. वहीं, एनएसई (NSE) पर भी इसमें 7.48% की गिरावट आई और भाव ₹83.62 तक पहुंच गया. सुबह करीब 10 बजे शेयर 7.45% गिरकर ₹83.70 के इंट्राडे लो पर कारोबार करता दिखा. बाद में इसका भाव ₹84.20 के आसपास था, जो करीब 7% की गिरावट थी. इससे एक दिन पहले, बुधवार को डील की घोषणा से पहले IDBI बैंक के शेयर में करीब 9% की तेजी आई थी. इस उछाल से बैंक के बाजार मूल्यांकन में ₹8,086 करोड़ का इजाफा हुआ था. अब तेजी के बाद मुनाफावसूली ने शेयर को नीचे खींच लिया.
₹52,878 करोड़ में बिकेगी 60.72% हिस्सेदारी
केंद्रीय कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने फेयरफैक्स की सब्सिडियरी M/s 10955230 Canada Inc को IDBI बैंक का रणनीतिक खरीदार मंजूर किया है. कंपनी बैंक में कुल 60.72% हिस्सेदारी खरीदेगी. यह सौदा करीब 5.5 अरब डॉलर यानी ₹52,878 करोड़ का है.
₹81 प्रति शेयर तय हुई कीमत
सरकारी बयान के मुताबिक, फेयरफैक्स ₹81 प्रति शेयर के भाव पर हिस्सेदारी खरीदेगी. यह दो स्वतंत्र वैल्यूएशन एजेंसियों की ओर से तय ₹75.99 प्रति शेयर की उचित कीमत से ज्यादा है.कनाडा के अरबपति प्रेम वत्सा के नेतृत्व वाली फेयरफैक्स के साथ यह डील भारतीय बैंकिंग सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश माना जा रहा है. इससे IDBI बैंक के निजीकरण की लंबे समय से चल रही प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
सरकार और LIC के पास भी रहेगी हिस्सेदारी
इस डील के पूरी होने के बाद केंद्र सरकार के पास बैंक की 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी बची रहेगी.वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह सरकार का शेयर बेचना नहीं, बल्कि बैंक को नए सिरे से मजबूत करना है. उन्होंने साफ किया कि सरकार और LIC बैंक में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखेंगे.पहले बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण उसे सरकार और बाद में LIC से पूंजी की मदद लेनी पड़ी थी. IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई थी, लेकिन इस साल की शुरुआत में शुरुआती बोलियां सरकार की तय न्यूनतम कीमत से कम रहने के कारण प्रक्रिया को झटका लगा था.
अभी बाकी हैं RBI और CCI की मंजूरियां
कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी सौदा पूरा होने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) और अन्य संबंधित नियामक संस्थाओं की मंजूरी जरूरी है. RBI खरीदार की वित्तीय और नियामकीय पात्रता की जांच करेगा. सफल बोलीदाता को नियामकीय शर्तें पूरी करने का रोडमैप भी देना होगा.
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
डील की मंजूरी के बावजूद शेयर में गिरावट दिखाती है कि बाजार में खबर आने के बाद मुनाफावसूली हो सकती है. निवेशकों को केवल डील की घोषणा के आधार पर फैसला लेने के बजाय नियामकीय मंजूरियों, सौदे की प्रगति और बैंक के वित्तीय प्रदर्शन पर भी नजर रखनी चाहिए.
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