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क्या कम दाम में बिक रहा है IDBI बैंक? सरकार ने बताया ₹3,917 करोड़ का पूरा हिसाब, जानें क्या है पूरा मामला

IDBI Bank Sale: सरकार और LIC मिलकर बैंक की 60.72% हिस्सेदारी कनाडा की 'Fairfax' कंपनी को करीब ₹53,000 करोड़ में बेच रहे हैं.सरकार ने कहा कि बैंक में बची हुई हिस्सेदारी से सरकार को भविष्य में भी फायदा मिलता रहेगा.

क्या कम दाम में बिक रहा है IDBI बैंक? सरकार ने बताया ₹3,917 करोड़ का पूरा हिसाब, जानें क्या है पूरा मामला
IDBI Bank Stake Sale: सरकार ने बैंक की बिक्री और वैल्यूएशन पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है.
NDTV इंडिया

IDBI Bank Privatisation:  IDBI बैंक की बिक्री को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार ने सफाई दी है. खासकर बैंक की वैल्यूएशन, बोली की कीमत और दूसरे राउंड की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे. अब DIPAM ने साफ किया है कि बैंक की बिक्री का पूरा प्रोसेस तय सरकारी नियमों के तहत हुआ है. सरकार के मुताबिक, दूसरे राउंड की बोली से बैंक की कीमत में ₹3,917 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, कनाडा की Fairfax कंपनी ₹81 प्रति शेयर के भाव पर बैंक में हिस्सेदारी खरीद रही है, जबकि दो स्वतंत्र एजेंसियों ने इसकी फेयर वैल्यू ₹75.99 तय की थी.

क्या सरकार ने कम कीमत पर बेचा IDBI बैंक?

DIPAM के मुताबिक, बैंक की बिक्री के लिए रिजर्व प्राइस यानी न्यूनतम तय कीमत को न तो घटाया गया और न ही बढ़ाया गया. पहले राउंड की बोलियों को मंजूरी नहीं मिली थी, इसलिए उस राउंड की प्रक्रिया वहीं खत्म हो गई. इसके बाद दूसरे राउंड यानी बेस्ट ऑफर राउंड के लिए नया तरीका तय किया गया. इसकी मंजूरी कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) से मिले अधिकारों के तहत कोर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज ऑन डिसइन्वेस्टमेंट (CGD) ने दी थी.

कैसे तय हुई बैंक की कीमत?

सरकार ने बताया कि बोली लगाने वाली कंपनियां अपनी तरफ से बैंक की वैल्यू तय करती हैं और अपनी कीमत गोपनीय तरीके से देती हैं. इसके अलावा दो स्वतंत्र एजेंसियों से बैंक की वैल्यूएशन कराई गई. यह पूरी प्रक्रिया डबल ब्लाइंड रखी गई, यानी बोली लगाने वालों को वैल्यूएशन की जानकारी नहीं थी और वैल्यूएशन करने वाली एजेंसियों को बोली की कीमत नहीं पता थी. CGD के पास दोनों जानकारियां थीं.

बैंक की वैल्यूएशन में लिस्टेड सरकारी बैंकों की तुलना की गई. वहीं, बैंक की संपत्तियों के साथ विवादित टैक्स मांगों को भी ध्यान में रखा गया. IDBI का शेयर भाव काफी उतार-चढ़ाव वाला और कम कारोबार वाला होने के कारण उसे वैल्यूएशन का आधार नहीं बनाया गया.

₹627 करोड़ की टैक्स देनदारी पर भी दी सफाई

बैंक की बिक्री में संभावित टैक्स देनदारी को लेकर भी सवाल थे. DIPAM ने बताया कि इसके लिए ₹627 करोड़ की इंडेम्निटी का प्रावधान रखा गया है. यह रकम तभी देनी होगी, जब अतिरिक्त टैक्स की मांग का भुगतान करना पड़ेगा. इसके मुकाबले दूसरे राउंड में बोली की कीमत ₹3,917 करोड़ बढ़ी है. सरकार ने इसे कम संभावना वाला मामला बताया है.

₹53,000 करोड़ में बिक रही 60.72% हिस्सेदारी

14 अक्टूबर को कैबिनेट ने IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी करीब ₹52,878 करोड़ में बेचने को मंजूरी दी थी. इसमें सरकार की 30.48% हिस्सेदारी करीब ₹26,620 करोड़ और LIC की 30.24% हिस्सेदारी करीब ₹26,440 करोड़ की है. कनाडा की Fairfax के साथ यह सौदा होगा. यह भारतीय बैंकिंग सेक्टर में सबसे बड़े विदेशी निवेश में से एक होगा.इस सौदे के बाद भी सरकार और LIC बैंक में अपनी बाकी हिस्सेदारी बनाए रखेंगे. 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, सरकार की करीब 15% और LIC की करीब 19% हिस्सेदारी रहेगी. इससे बैंक के आगे बढ़ने पर दोनों को भविष्य में भी फायदा मिल सकता है.

कब पूरा होगा IDBI बैंक का सौदा?

यह सौदा चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है. हालांकि, इसके लिए RBI की मंजूरी जरूरी होगी. बैंक कर्मचारियों की ओर से नौकरी की शर्तों, पेंशन और दूसरे लाभों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. जिसपर सरकार ने कहा कि कर्मचारियों को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है.

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