- जनवरी 2026 के मुकाबले सोने की कीमतें 22 प्रतिशत गिरकर 1,42,816 रुपये हो गई हैं
- एक्सपर्ट के अनुसार लंबी अवधि में वैश्विक चुनौतियों और महंगाई के चलते सोने की कीमतें फिर बढ़ने की संभावना है
- सोने की कीमतों में गिरावट से गोल्ड लोन बाजार प्रभावित होगा, जिससे डिफॉल्ट के मामले बढ़ सकते हैं
Gold Price Outlook: सोना, हमेशा से निवेश के लिए सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता रहा है. आम नागरिकों के साथ देश के केंद्रीय बैंक भी डॉलर का मुकाबला करने के लिए इस कीमती धातु पर अपना दांव लगा रहे हैं. हालांकि मौजूदा समय में इसकी कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. जनवरी 2026 में दाम 1.90 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गए थे, लेकिन अभी एमसीएक्स पर कीमतें 22% की गिरावट के साथ 1,42,816 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रही हैं. इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों के साथ ज्वेलर्स को हैरानी में तो डाला ही है, साथ में गोल्ड लोन मार्केट में भी हलचल देखने को मिल रही है.
इस 22 फीसदी की गिरावट के बाद अब निवेशक के मन में सवाल है कि, क्या सोना और सस्ता होगा? क्या ये खरीदारी करने का सही टाइम है? हां एक सबसे जरूरी बात कि इस गिरावट का उन लोगों और कंपनियों पर क्या असर होगा जो गोल्ड लोन के बिजनेस से जुड़े हैं? इन सभी सवालों के जवाब कमोडिटी मार्केट के एक्सपर्ट और केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने दिए.
सोने में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
एक्सपर्ट अजय केडिया ने बताया कि, किसी भी कमोडिटी में लगातार तेजी नहीं देखने को मिल सकती. सोने का ऑल टाइम हाई लेवल जियो पॉलिटिकल टेंशन और केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी के दम पर छुआ था. लेकिन अब बाजार में प्रॉफिट बुकिंग का दौर जारी है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और ग्लोबल स्टेज पर मार्जिन हाइक्स के चलते सोने में ये 22 फीसदी तक का करेक्शन देखने को मिला. ग्राहकों को इसे एक हेल्दी कंसॉलिडेशन के तौर पर देखना चाहिए. इसके बाद मार्केट को एक बार फिर उठने का मौका बनता है.
क्या है आगे का आउटलुक?
भले ही शॉर्ट टर्म में सोना प्रेशर में दिख रहा हो, लेकिन अजय केडिया लॉन्ग टर्म के लिए सोने को लेकर पॉजिटिव हैं. उनका मानना है कि वैश्विक चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं. ऐसे में केंद्रीय बैंक ज्यादा से ज्यादा सोना खरीदेंगे, साथ में महंगाई का प्रेशर लंबी अवधि में सोने को फिर से सपोर्ट देगा. हां इतना साफ है कि ये गिरावट निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर है. जो लोग महंगे दामों की वजह से सोना नहीं खरीद पाए थे, उनके लिए एंट्री का मौका बन रहा है. हालांकि, एक साथ सारा पैसा लगाने की गलती तो कतई ना करें. इसके लिए आप बाय ऑन डिप्स यानी हर छोटी-बड़ी गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी करें. डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड इसके लिए अच्छे ऑप्शन हो सकते हैं.
अगले 3 महीनों में कहा जा सकता है सोना?
केडिया एडवाइजरी के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट अमित गुप्ता के अनुसार अगले तीन महीनों के लिए एमसीएक्स गोल्ड को 1,35,000 रुपये के आस-पास सपोर्ट मिलेगा और इसकी कीमत 1,60,000 रुपये तक जा सकती है.
गोल्ड लोन सेगमेंट पर क्या होगा असर?
हालांकि, एक्सपर्ट अजय केडिया ने इस गिरावट के बीच गोल्ड लोन मार्केट से जुड़ा एक अलर्ट भी दिया है. उन्होंने कहा कि जब सोने की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों जैसे मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस का बिजनेस खूब फलता-फूलता है. लेकिन कीमतों में 22% की कमी इस पूरे गणित को बिगाड़ सकती है.
लोन-टू-वैल्यू की समस्या
अजय केडिया ने साथ ही लोन टू वैल्यू की समस्या का जिक्र किया. उन्होंने कहा, रिजर्व बैंक के नियम कहते हैं कि कंपनियां सोने की वैल्यू का एक फिक्स अमाउंट, आमतौर पर 75% तक ही लोन के रूप में दे सकती हैं. मान लीजिए किसी ने जब सोना 75,000 रुपये पर था, तब लोन लिया था. पर अब दाम गिरकर कम हो गए हैं, तो गिरवी रखे सोने की कीमत लोन के बाकी बचे अमाउंट से कम या उसके बराबर हो सकती है.
डिफॉल्ट के आंकड़ों में आ सकती है तेजी
अजय केडिया के अनुसार, जब सोने के दाम बहुत ज्यादा गिर जाते हैं, तो कई बार ग्राहक अपना सोना वापस छुड़ाने के बजाय लोन डिफॉल्ट करना ठीक समझते हैं, क्योंकि बाजार में उस सोने की कीमत अब उनके चुकाए जाने वाले पैसे से कम हो गई होती है. ऐसी कंडीशन में एनबीएफसी कंपनियों को अपना पैसा वसूलने के लिए गिरवी रखे सोने की नीलामी करनी पड़ती है. अगर बाजार में एक साथ बहुत सारा सोना नीलामी के लिए आता है, तो इससे कीमतों पर और ज्यादा प्रेशर बनता है.
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