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'आखिरकार मंजिल पर पहुंचा समझौता, दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती', भारत‑US टैरिफ डील से खुश हुए एक्सपर्ट्स

अमेरिका ने भारत से आने वाले उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली. यह फैसला प्रधानमंत्री मोदी और US राष्ट्रपति ट्रंप की बातचीत के बाद तुरंत प्रभाव से लागू हुआ. साथ ही अमेरिका ने रूसी तेल खरीद को लेकर लगाया गया दंडात्मक 25% शुल्क भी हटा दिया, जिससे दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक माहौल बना.

'आखिरकार मंजिल पर पहुंचा समझौता, दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती', भारत‑US टैरिफ डील से खुश हुए एक्सपर्ट्स
भारत-US टैरिफ डील पर एक्सपर्ट्स ने जताई खुशी.
फाइल फोटो
  • भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ डील ने दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दिया है.
  • अमेरिकी पूर्व ट्रेड अधिकारी मार्क लिंस्कॉट ने इस डील को लंबे समय से अटकी वार्ता का सफल समापन बताया है.
  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अमेरिका यात्रा को इस समझौते को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने वाला माना गया है.
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भारत‑अमेरिका टैरिफ डील की घोषणा के बाद अमेरिकी रणनीति विशेषज्ञों और व्यापार विश्लेषकों ने इसे दो देशों के आर्थिक रिश्तों में बड़ा मोड़ बताया है. अमेरिका के पूर्व असिस्टेंट यूएस ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव मार्क लिंस्कॉट ने कहा कि उनकी पहली प्रतिक्रिया थी, 'वाह! यह आखिरकार आ ही गया.' उन्होंने कहा कि यह समझौता लंबे समय से अटका था और दोनों देशों के वार्ताकारों ने महीनों तक इसका मसौदा तैयार करने में मेहनत की. उनके अनुसार यह साफ था कि इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए शीर्ष नेतृत्व की सीधी बातचीत जरूरी थी और वही सोमवार को हुआ.

लिंस्कॉट ने यह भी कहा कि ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति ने वार्ता को तेज करने में भूमिका निभाई, लेकिन कुल मिलाकर यह डील इस बात का संकेत है कि दुनिया की सबसे बड़ी और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे भारत की साझेदारी दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगी. उन्होंने बताया कि दोनों नेता अब एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

जयशंकर की US यात्रा से हो सकी डील

दूसरी ओर, साउथ एशिया विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अमेरिका यात्रा को इस डील के संदर्भ में बेहद सकारात्मक बताया. उनका कहना है कि यह सौदा दोनों देशों के संबंधों को उस दिशा में ले जा रहा है, 'जहां दोनों पक्ष उन्हें पहुंचाना चाहते थे.' कुगेलमैन के अनुसार, यह समझौता रिश्तों को स्थिर करेगा और लंबे समय से टल रहे QUAD समिट के लिए भी रास्ता खोल सकता है. उन्होंने संकेत दिया कि अगर यह होता है तो राष्ट्रपति ट्रंप भारत की यात्रा भी कर सकते हैं और इस डील को अपने लिए उपलब्धि के रूप में पेश कर सकते हैं.

एक्सपर्टस ने इस डील को बताया पॉजिटिव

इसके अलावा अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो माइकल रुबिन ने कहा कि अंततः टैरिफ का प्रभावी स्तर 18% ही रहेगा. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ 0% कर रहा है, तो अमेरिका को भी भारतीय उत्पादों पर समान टैरिफ नीति अपनानी चाहिए. हालांकि उन्होंने माना कि इस डील का समय राजनीतिक रूप से ट्रंप के लिए लाभकारी है, लेकिन उनकी 'आक्रामक बातचीत शैली' के कारण कुछ दीर्घकालिक जोखिम बने रहते हैं. फिर भी, उन्होंने डील को समग्र रूप से सकारात्मक बताया.

ट्रंप का बड़ा ऐलान- टैरिफ घटाया

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बता दें कि सोमवार रात US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर लगने वाला टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया, जिसे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है. यह घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद की, जिसके बाद उन्होंने लिखा कि यह फैसला 'दोस्ती और सम्मान' के आधार पर लिया गया है. यह कटौती तुरंत प्रभाव से लागू होगी, और इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में स्पष्ट प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी. खासतौर पर चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे एशियाई निर्यात प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले, जिन पर अब भी कहीं अधिक शुल्क लगता है.

टैरिफ में कमी के साथ ही अमेरिका ने वह 25% अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क (Penalty Tariff) भी हटाया है जो भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर लगाया गया था. ट्रंप प्रशासन ने पुष्टि की कि भारत ने अब रूसी तेल खरीद रोकने और अमेरिकी ऊर्जा सहित कई श्रेणियों में बड़े पैमाने पर आयात बढ़ाने पर सहमति दी है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम एक बड़े आर्थिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल व्यापारिक अनिश्चितताओं को दूर करता है, बल्कि भारत‑अमेरिका रिश्तों में नए चरण की शुरुआत भी दर्शाता है. इस फैसले से भारतीय बाजार भावना सुधरी है और निर्यात‑उन्मुख उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है.

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