AI मार्केट करेक्शन बड़ा खतरा बनता जा रहा है. इसे लेकर विदेशी एजेंसी ने चेतावनी जारी की है. रेटिंग एजेंसी फिच ने चेतावनी दी है कि AI का तेज़ी से बढ़ता चलन और मार्केट में गिरावट (करेक्शन) का जोखिम, ग्लोबल क्रेडिट के लिए बड़े खतरे के तौर पर उभर रहे हैं. एजेंसी ने यह भी कहा है कि टेक कंपनियों की बढ़ती वैल्यूएशन और AI पर हो रहा भारी-भरकम खर्च, भविष्य में मिलने वाले अनिश्चित रिटर्न से कहीं ज़्यादा हो सकता है. अपनी तीसरी तिमाही की 'ग्लोबल रिस्क आउटलुक' रिपोर्ट में फिच ने कहा कि क्रेडिट के माहौल पर दो शॉर्ट-टर्म जोखिम हावी हैं. AI से जुड़े मार्केट करेक्शन का बढ़ता खतरा और अमेरिका-ईरान के बीच जारी टकराव अनिश्चितता की ओर बढ़ रहा है.
रेटिंग एजेंसी ने वैश्विक निगरानी संस्थाओं की हालिया चेतावनियों को दोहराते हुए कहा कि खासकर अमेरिका में, AI का तेज़ी से बढ़ता चलन आर्थिक विकास और कैपिटल मार्केट से गहराई से जुड़ गया है, जिससे किसी भी बड़े पैमाने पर बिकवाली का जोखिम बढ़ गया है. फिच ने कहा, एआई निवेश का पैमाना इतना बड़ा है कि अर्थव्यवस्था और समग्र पूंजी बाजार पर इस तरह के करेक्शन का काफी प्रभाव पड़ सकता है.
Fitch की रिपोर्ट में बताया गया है कि U.S. S&P 500 का 'साइक्लिकली एडजस्टेड प्राइस-टू-अर्निंग्स रेश्यो' (CAPE) 1990 के दशक के आखिर में आए 'डॉट-कॉम बूम' के समय देखे गए स्तर के करीब पहुंच गया है. वहीं, 2026 की पहली छमाही में U.S. कॉर्पोरेट बॉन्ड जारी करने में 26% की बढ़ोतरी हुई, जिसकी मुख्य वजह AI से जुड़े फंड जुटाने की गतिविधियां थी.
भविष्य में मार्केट में उथल-पुथल को लेकर अनिश्चितता
रिपोर्ट का अनुमान है कि IT सेक्टर में तेज़ी से हो रहे निवेश ने पहली तिमाही में U.S. की GDP ग्रोथ में सीधे तौर पर 1.4 प्रतिशत अंक का योगदान दिया. हालांकि, भविष्य में AI से होने वाली कमाई, रेगुलेशन, कॉम्पिटिशन और लेबर मार्केट में उथल-पुथल को लेकर अनिश्चितता के कारण मार्केट में काफ़ी बड़ी और लंबी गिरावट (मार्केट करेक्शन) आ सकती है, जिसके व्यापक मैक्रो-इकोनॉमिक असर हो सकते हैं.
कैपिटल मार्केट और अर्थव्यवस्थाएं AI से जुड़ना जोखिम
फिच ने कहा कि जिस हद तक कैपिटल मार्केट और अर्थव्यवस्थाएं AI से जुड़ी हैं, उससे क्रेडिट के लिए जोखिम पैदा हो गया है. भू-राजनीतिक जोखिम एक और बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है, खासकर हाल के हफ़्तों में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से बंद होने की वजह से. फिच का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक विकास दर धीमी होकर 2.4% हो जाएगी और अमेरिका में महंगाई दर साल के अंत तक 3.7% रहेगी, जो ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के असर को दर्शाता है.
इसने सूखे, बाढ़ और भीषण तूफ़ानों की आशंका को देखते हुए 'अल नीनो' (El Niño) मौसम पैटर्न को भी एक उभरते हुए क्रेडिट जोखिम के तौर पर चिह्नित किया है.
अमेरिका-ईरान संघर्ष महंगाई के दबाव को बढ़ा सकता है
रेटिंग एजेंसी ने चेतावनी दी कि यह घटनाक्रम अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े महंगाई के दबाव को और बढ़ा सकता है. एजेंसी ने कहा कि भारी कर्ज वाले और "जंक"-रेटिंग वाले देश विशेष रूप से जोखिम में होंगे, क्योंकि खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में उछाल से मौद्रिक नीति जटिल हो सकती है, सब्सिडी का खर्च बढ़ सकता है और सरकारी वित्त पर और दबाव पड़ सकता है.
फिच का कहना है कि लैटिन अमेरिका में, जहां खेती की लागत में खाद और डीज़ल का हिस्सा 50% से 70% के बीच है और खाद की सप्लाई का लगभग 30% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है, वहां लागत बढ़ने और फसल कम होने से एग्री-बिज़नेस के मुनाफ़े पर असर पड़ सकता है और पोर्ट, रेलवे और टोल रोड जैसे ट्रांसपोर्ट सेक्टर भी प्रभावित हो सकते हैं.
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