शैंपू आज हमारे रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्सा है. भारत में जड़ी-बूटियों से बने शैंपू के अलावा रासायनिक शैंपू भी काफी इस्तेमाल किया जाता है. माना जाता है कि जर्मनी के एक नाई जोसेफ विल्हेम राउश ने 1890 के दशक में दुनिया के पहले लिक्विड शैंपू का आविष्कार किया था. एक दूसरी मान्यता यह है कि शेख दीन मोहम्मद नाम के एक भारतीय अंग्रेज ने यह कारनामा 1814 में कर दिखाया था. आइए जानते हैं कि शैंपू का आविष्कार करने वाले शेख दीन मोहम्मद कौन थे. और इसके अलावा उनका योगदान क्या-क्या था.
कहां पैदा हुए थे दीन मोहम्मद
मोहम्मद का जन्म बिहार के पटना में 1759 में हुआ था. वो बचपन में ही अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में सैनिक के रूप में भर्ती हो गए थे. उन्होंने अंग्रेजों की सेना में 18 साल तक काम किया. इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे का मकसद दुनिया घूमना था. इसी क्रम में वो वह पहले आयरलैंड पहुंचे और वहां से वो इंग्लैंड गए.
इंग्लैंड उन्हें भा गया. उन्होंने 1810 में लंदन में उन्होंने एक रेस्टोरेंट खोला. उन्होंने अपने रेस्तरां का नाम रखा 'हिंदुस्तान कॉफी हाउस'. माना जाता है कि ब्रिटेन में यह पहला भारतीय रेस्टोरेंट था. उन्होंने 'द ट्रेवल्स ऑफ दीन मोहम्मद' नाम से अंग्रेजी में एक किताब भी लिखी थी.उनकी इस किताब को किसी भारतीय लेखक की अंग्रेजी में लिखी गई पहली किताब माना जाता है.
लंदन में पहला भारतीय रेस्टोरेंट किसने खोला था
दीन मोहम्मद को असली पहचान उनके रेस्टोरेंट और किताब से नहीं मिली. उन्हें पहचान दी उनके स्नान घर ने. उन्होंने 1814 में उन्होंने अपनी पत्नी जेन के साथ ब्राइटन में समुद्र किनारे पूल वैली इलाके में एक इनडोर स्नानघर खोला. इसमें वो अपने ग्राहकों की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से बने तेल से चंपी या कहें कि मालिश किया करते थे.इसमें गर्म पानी से स्नान की सुविधा मिलती थी. उन्होंने इस तकनीक को 'शैंपूइंग' नाम दिया. इसके अलावा वहां से भाप से नहाने (स्टीम बाथ) और खुशबूदार भारतीय तेलों से उपचार की सुविधा थीं. भारतीय तेलों से उपचार की इस पद्धति को आज अरोमा थेरेपी कहा जाता है.ब्राइटन में जहां दीन मोहम्मद का स्नानघर हुआ करता था, वहां आज क्वीन्स होटल है.

दीन मोहम्मद का ब्राइटन में 1851 में 92 साल की आयु में निधन हो गया था.
Photo Credit: The Regency Society of Brighton and Hove
यह उस समय लोगों के लिए यह सुविधा समुद्र के पानी में नहाने से बिल्कुल अलग थी. इस वजह से देखते ही देखते दीन मोहम्मद का यह स्नानागार लोकप्रिय हो गया.इसके बाद उन्हें राजा के दरबार में बुलाया गया. वहां उन्हें अपनी चंपी का प्रदर्शन करना था. उनके प्रदर्शन से खुश होकर प्रिंस रीजेंट ने अपने लिए एक निजी स्टीम बाथ बनवाने का आदेश दिया. उन्होंने दीन महोम्मद को 'रॉयल शैंपूइंग सर्जन' की पदवी से नवाजा. उन्हें ब्रिटेन के राजा जॉर्ज चतुर्थ और राजा विलियम चतुर्थ के लिए 'शैंपूइंग सर्जन' नियुक्त किया गया था. यह उस समय भारतीय मालिश और उससे जुड़ी उपचार पद्धति के विशेषज्ञ के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पद था.
दीन मोहम्मद का ब्राइटन ही 1851 में 92 साल की आयु में निधन हो गया. लेकिन ब्राइटन के सेंट निकोलस चर्च के कब्रिस्तान में उनकी कब्र के पत्थर पर उनकी उम्र 101 साल लिखी हुई है,हालांकि यह सही नहीं लगता है.
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