दिल्ली सरकार की नई EV पॉलिसी 2026 को इंडस्ट्री ने एक बड़ा और भविष्य को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम बताया है. इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि इससे राजधानी में सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन को भी नई रफ्तार मिलेगी. उनका मानना है कि यह पॉलिसी भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को और मजबूत बनाएगी.
प्रमुख इंडस्ट्री संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने कहा कि वह इस पॉलिसी को सफल बनाने के लिए सरकार और इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करेगा. संगठन का लक्ष्य एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और सस्टेनेबल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम तैयार करना है, जो आर्थिक विकास, इंडस्ट्रियल बदलाव और पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा.
PHDCCI ने बताई पॉलिसी की अहमियत
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि यह पॉलिसी क्लीन ट्रांसपोर्ट को दिल्ली के भविष्य के आर्थिक विकास और सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट का मजबूत आधार बनाती है. उन्होंने कहा कि इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा. घरेलू मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार होगा और EV सेक्टर में बड़ी संख्या में रोजगार के मौके बनेंगे.
उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी राष्ट्रीय स्तर पर 'मेक इन इंडिया' अभियान के उस लक्ष्य के अनुरूप है, जिसके तहत भारत को ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
EV खरीद से लेकर चार्जिंग नेटवर्क तक कई बड़े कदम
नई पॉलिसी में इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने पर फाइनेंशियल इंसेंटिव दिया जाएगा. पात्र वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में पूरी छूट मिलेगी. पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर भी इंसेंटिव मिलेगा. इसके साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़े स्तर पर विस्तार किया जाएगा और अलग-अलग कैटेगरी के वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बनाया जाएगा.
सरकार ने इस पॉलिसी की अवधि के दौरान EV इकोसिस्टम के विकास के लिए करीब 15,000 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव रखा है.
कई सेक्टर्स में बढ़ेगा निवेश
रिपोर्ट के मुताबिक यह पॉलिसी सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल तक सीमित नहीं है. इससे बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी, बिजली डिस्ट्रीब्यूशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस, फ्लीट मैनेजमेंट, फाइनेंसिंग, रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे कई सेक्टर्स में निवेश बढ़ने की संभावना है.
दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0 साल 2030 तक लागू रहेगी. इसके तहत,
- 30 लाख रुपए तक (एक्स-शोरूम) कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% छूट मिलेगी.
- इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर 30,000 रुपए तक, तीनपहिया वाहनों पर 50,000 रुपए तक का इंसेटिव मिलेगा.
- बीएस-IV या उससे पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर 1 लाख रुपए तक का इंसेंटिव दिया जाएगा.
पेट्रोल टू-व्हीलर और सीएनजी ऑटो पर भी होंगे नए नियम
नई पॉलिसी के मुताबिक 31 मार्च 2028 के बाद दिल्ली में नए पेट्रोल से चलने वाले मोटरसाइकिल और स्कूटर का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा. वहीं 2026 के आखिर के बाद नए सीएनजी ऑटो-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन भी बंद कर दिया जाएगा.
पीएचडीसीसीआई के CEO और महासचिव जनरल डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल का इस्तेमाल बढ़ेगा, वैसे-वैसे एडवांस्ड बैटरी टेक्नोलॉजी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, चार्जिंग इक्विपमेंट, डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट जैसी टेक्नोलॉजी की मांग भी तेजी से बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि इससे पूरे ईवी इंडस्ट्री और उससे जुड़े दूसरे सेक्टर्स में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
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