ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है. मिडल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के बीच सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. इसी वजह से तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है, जिससे दुनियाभर के बाजारों पर दबाव बढ़ रहा है.इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के जुलाई फ्यूचर्स की कीमत करीब $111.21 प्रति बैरल तक पहुंच गई, जिसमें 0.73% की बढ़त दर्ज हुई. वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI ) भी बढ़कर करीब $106 प्रति बैरल पर पहुंच गया. दोनों ही बेंचमार्क लगातार चौथे महीने बढ़त दर्ज कर रहे हैं.
एक हफ्ते में करीब 12% की छलांग,$126 तक पहुंचा ब्रेंट
तेल की कीमतों में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. इस हफ्ते तेल की कीमतों में करीब 12% का उछाल दर्ज किया गया है.हाल ही में ब्रेंट का जून कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से पहले $126.41 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो मार्च 2022 यानी पिछले 4 साल का सबसे ऊंचा स्तर है. .इससे यह साफ हो गया है कि बाजार में सप्लाई को लेकर डर काफी ज्यादा है और आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं. इससे महंगाई बढ़ने की चिंता भी तेज हो गई है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर पेट्रोल-डीजल और बाकी ईंधन पर पड़ता है.
लगातार तनाव और सप्लाई में कमी की वजह से कच्चे तेल की कीमतें पिछले दो हफ्तों में 25% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं. इससे लग रहा है कि फिलहाल सप्लाई की कमी ज्यादा बड़ी समस्या है.
ट्रंप की घेराबंदी, ईरान संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना बड़ी वजह
तेल की कीमतों में आई इस हालिया तेजी की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को जारी रखने के संकेत दिए हैं. इससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने पर संशय के बादल गहरा गए हैं. ग्लोबल क्रूड ऑयल की कुल शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है, जो वर्तमान संघर्ष के कारण काफी हद तक बंद पड़ा है.
तेल की कीमतों में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखा है, जो दुनिया में तेल सप्लाई का एक अहम रास्ता है.अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर रोक लगाई हुई है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और बाजार में चिंता बढ़ रही है.
क्या और महंगा होगा कच्चा तेल?
दूसरी ओर, ईरान भी झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने संकेत दिए हैं कि वाशिंगटन के साथ किसी समझौते की संभावना बहुत कम है. उन्होंने साफ कर दिया है कि देश अपने परमाणु या मिसाइल कार्यक्रमों को नहीं छोड़ेगा और जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा. तनाव के इस माहौल ने बाजार में डर पैदा कर दिया है कि तेल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रह सकती है, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं.
एनर्जी कंपनी ConocoPhillips ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति ऐसे ही बनी रही तो जून तक कई देशों को तेल की कमी का सामना करना पड़ सकता है.कंपनी के मुताबिक फारस की खाड़ी से आने वाली सप्लाई पहले ही काफी हद तक खत्म हो चुकी है और नए विकल्प सीमित हैं.
मौजूदा हालात को देखते हुए अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है.स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना या बंद रहना आने वाले दिनों में तेल की कीमतों की दिशा तय करेगा, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.
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