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EPF पर कैबिनेट का बड़ा फैसला, मिनिमम सैलरी लिमिट ₹15,000 से बढ़ा कर ₹25,000 की

EPFO से जुड़ी पेंशन और सुरक्षा योजनाओं के लिए सैलरी लिमिट को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है. PM मोदी की अध्‍यक्षता में कैबिनेट ने ये बड़ा फैसला लिया. इससे ज्‍यादा कर्मचारी EPF और EPS जैसी योजनाओं के दायरे में आ पाएंगे. पूरी डिटेल अंदर पढ़ें.

EPF पर कैबिनेट का बड़ा फैसला, मिनिमम सैलरी लिमिट ₹15,000 से बढ़ा कर ₹25,000 की
EPF के लिए सैलरी लिमिट बढ़ाई गई, आपको क्‍या फायदे होंगे?
(NDTV File Photo)

केंद्र सरकार ने EPF और EPS कवरेज के लिए लागू वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 करने का फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में ये फैसल लिया गया. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने कैबिनेट के इस फैसले के बारे में बताते हुए कहा कि विश्‍वकर्मा जयंती के मौके पर सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है.  

वेतन सीमा बढ़ाए जाने से ज्यादा कर्मचारियों को EPF और EPS जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाया जा सकेगा. इससे कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग और सोशल सिक्‍योरिटी का कवरेज बढ़ सकता है. 

51 लाख से ज्‍यादा अतिरिक्‍त कर्मचारियों को फायदा 

केंद्रीय मंत्री ने बताया, 'प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने श्रम और रोजगार मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की बात कही गई है. इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारियों के अनिवार्य EPFO ​​कवरेज के दायरे में आने की उम्मीद है, जिससे श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा काफी बढ़ जाएगा.'

इससे पहले 2014 में बढ़ाई गई थी सैलरी लिमिट 

2004 से 2014 के दशक में EPFO ​​वेतन सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ था, लेकिन सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया था. मौजूदा फैसला इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए वेतन सीमा को 25,000 रुपये कर रहा है. ऐसा इसलिए ताकि पिछले कुछ वर्षों में वेतन में लगातार वृद्धि, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखा जा सके.

सितंबर 2014 में वेतन सीमा में पिछली बार बदलाव के बाद से भारत में वेतन में लगातार वृद्धि, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार का विस्तार देखा गया है. कई राज्यों और कामों में, न्यूनतम वेतन भी मौजूदा सीमा के करीब पहुंच गया है. इसलिए, सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने से EPFO ​​का फ्रेमवर्क बढ़ते वेतन के स्तर के हिसाब से अपडेट हो जाता है और इससे ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिलता है.

अभी क्‍या प्रावधान है और आगे कैसे फायदा होगा? 

अभी, अगर कोई नया कर्मचारी 15,000 रुपये प्रति माह से ज्यादा वेतन पर नौकरी शुरू करता है, तो वह अपने-आप EPF फ्रेमवर्क के दायरे में नहीं आता है और अनिवार्य भविष्य निधि, पेंशन और उससे जुड़ी बीमा सुरक्षा से बाहर रह सकता है. वेतन सीमा को 25,000 करने से 15,000 से 25,000 रुपये के बीच वेतन वाले कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा कानूनी सामाजिक सुरक्षा फ्रेमवर्क के दायरे में आ जाएगा. इस कदम से रोजगार के औपचारिक होने, कर्मचारियों को बनाए रखने और रिटायरमेंट के बाद की लंबी अवधि की सुरक्षा को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

EPS और EDLI जैसी योजनाओं का लाभ मिलेगा 

इस मंजूरी से भविष्य निधि बचत, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन सुरक्षा और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा सुरक्षा तक पहुंच बढ़ेगी, जो लागू योजना के प्रावधानों के अनुसार होगी. इससे कानूनी योगदान और पेंशन-योग्य वेतन फ्रेमवर्क को मौजूदा वेतन स्तरों के अनुरूप बेहतर ढंग से ढालने में भी मदद मिलेगी.

ज्यादा कर्मचारियों को अपने-आप कानूनी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाकर, ये फैसला इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि औपचारिक रोजगार के साथ-साथ पोर्टेबल और पक्की सामाजिक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए. नियोक्ताओं के लिए भी, सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ने से कर्मचारियों को बनाए रखने, वर्कफोर्स में स्थिरता, मनोबल बढ़ाने और ज्यादा सुरक्षित भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स बनाने में मदद मिल सकती है.

सरकारी खजाने पर भी बढ़ेगा बोझ 

इस प्रस्ताव पर अलग-अलग मंत्रालयों के बीच विस्तार से बातचीत हुई और 16 जून 2026 को हुई बैठक में 'एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमिटी' ने इसकी सिफारिश की. सरकार का सालाना खर्च लगभग 11,339 करोड़ होने का अनुमान है, जबकि अभी सालाना बजट से लगभग 10,250 करोड़ की मदद मिलती है. 5 सालों में अनुमानित खर्च लगभग 56,696 करोड़ हो सकता है.

EPFO आज दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा सिस्टम में से एक चलाता है, जो एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF), एम्प्लॉई पेंशन स्कीम (EPS) और एम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLI) का प्रबंधन करता है. 

EPFO ​​के ताजा आंकड़ों के अनुसार, लगभग 7.68 लाख योगदान करने वाले संस्थानों में करीब 7.98 करोड़ सदस्य योगदान कर रहे हैं, जबकि EPS लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन का फायदा देता है. EDLI, EPF सदस्यता से जुड़ी बीमा सुरक्षा देता है.

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