दुनिया के सबसे अमीर शख्स में शामिल दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट भले अरबों डॉलर की संपत्ति की मालिक हैं . लेकिन उनके बच्चों की जिंदगी बाकी अमीर परिवारों से काफी अलग रही है. वॉरेन बफेट ने अपने तीनों बच्चों को बेहद सादगी से पाल-पोसकर बड़ा किया.आपको भी ये जान कर यकीन नहीं होगा हालांकि ये सच है कि जब तक उनके बच्चे 20 साल के नहीं हुए, तब तक उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि उनके पिता अरबपति हैं.
पिता की अथाह दौलत से दूर उनके एक बेटे पीटर बफेट ने म्यूजिक को अपना करियर बनाया, जबकि दूसरे बेटे हॉवर्ड बफेट ने खेती की राह पकड़ी.
20 साल की उम्र में खुला पिता के अरबपति होने का राज
दुनिया भर में अपनी संपत्ति और निवेश के लिए पहचाने जाने वाले वॉरेन बफेट ने घर के भीतर अपनी दौलत की चमक-दमक कभी नहीं आने दी. उनके सबसे छोटे बेटे पीटर बफेट बताया है कि बचपन में उन्हें अपने परिवार की असली आर्थिक स्थिति का अंदाजा नहीं था. उनका बचपन बेहद सामान्य माहौल में बीता. पिता की दौलत घर में कभी इस तरह दिखाई नहीं गई कि बच्चों को लगे कि वे किसी बेहद अमीर परिवार से हैं.
एक बेटे ने चुना संगीत, तो दूसरे बेटे ने थामी खेती
वॉरेन बफेट के बच्चों ने वॉल स्ट्रीट की चकाचौंध से दूर अपनी अलग राह बनाई. तीन बच्चों में सबसे छोटे पीटर बफेट ने निवेश या कारोबार की जगह संगीत को चुना. उन्होंने म्यूजिक इंडस्ट्री में अपना करियर बनाया. उनका बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां परिवार की दौलत उनके रिश्तों पर हावी नहीं थी. उनके दोस्तों ने सिर्फ इसलिए दोस्ती नहीं की थी कि उनके पिता दुनिया के अमीर लोगों में शामिल हैं.
वहीं, उनके दूसरे बेटे हॉवर्ड ग्राहम बफेट ने कॉर्पोरेट ऑफिस के बजाय ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना. उन्होंने खेती और जमीन से जुड़ा काम शुरू किया.हॉवर्ड ने दशकों तक नेब्रास्का और इलिनॉय में मक्के और सोयाबीन की खेती के साथ जमीन बचाने और बेहतर खेती के तरीकों पर भी काम किया.
पिता ने खरीदा था 400 एकड़ का फार्म
हॉवर्ड की खेती की कहानी में उनके पिता की एक पुरानी डील भी काफी दिलचस्प है.साल 1986 में वॉरेन बफेट ने नेब्रास्का में 400 एकड़ का एक फार्म 2.80 लाख डॉलर में खरीदा और उसे हॉवर्ड को किराए पर दिया. यह कोई मुफ्त का तोहफा नहीं था, बफेट ने बेटे से 5% सालाना किराया और फार्म की कमाई का तय हिस्सा वसूल किया.
1,500 एकड़ के फार्म तक पहुंचा सफर
नेब्रास्का का फार्म हॉवर्ड की खेती का अकेला ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने इलिनॉय के पाना में करीब 1,500 एकड़ की जमीन पर भी खेती की.इसके साथ ही हॉवर्ड की संस्था ने अलग-अलग अमेरिकी राज्यों में खेती और जमीन से जुड़े रिसर्च प्रोजेक्ट्स में काम किया.
बच्चों को नहीं मिलेगी अरबों की दौलत, चैरिटी में जाएगी संपत्ति
वॉरेन बफेट ने अपनी संपत्ति को लेकर अपना इरादा पहले ही साफ कर रखा है. उनकी ज्यादातर दौलत बच्चों को विरासत के तौर पर नहीं मिलेगी.वे अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों में बांटने के बजाय चैरिटी के लिए दान देना चाहते हैं. उनके तीनों बच्चे भविष्य में एक चैरिटेबल ट्रस्ट की देखरेख करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि पैसा सही जगह और सही मकसद के लिए इस्तेमाल हो.
हालांकि उनके बेटे हॉवर्ड ने भी माना है कि इतनी बड़ी रकम को सही जगह लगाना आसान काम नहीं है. सिर्फ पैसा देना काफी नहीं, यह देखना भी जरूरी है कि उसका इस्तेमाल सही तरीके से हो और उससे लंबे समय तक फायदा मिले.
बर्कशायर हैथवे में क्या होगी बेटे की भूमिका?
खेती से जुड़े रहने के बावजूद हॉवर्ड का अपने पिता की कंपनी बर्कशायर हैथवे से रिश्ता बना हुआ है. वह 1993 से कंपनी के बोर्ड में हैं.1 जनवरी 2026 से बर्कशायर हैथवे के सीईओ की जिम्मेदारी ग्रेग एबेल संभाल रहे हैं जबकि वॉरेन वॉरेन बफेट चेयरमैन बने हुए हैं.
भविष्य में हॉवर्ड कंपनी में नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बन सकते हैं. इस पद पर रहते हुए उनका काम कंपनी का रोजमर्रा का बिजनेस चलाना नहीं, बल्कि अपने पिता द्वारा बनाए गए कल्चर और वैल्यूज को बचाकर रखना होगा.दिलचस्प बात यह है कि हॉवर्ड ने यह संकेत भी दिया है कि ऐसी जिम्मेदारी मिलने के बावजूद खेती से उनका रिश्ता खत्म नहीं होगा. अरबपति पिता का बेटा होने के बावजूद उन्होंने निवेश की दुनिया के बजाय खेतों को चुना. यही वॉरेन बफेट के परिवार की कहानी को बाकी अरबपति परिवारों से अलग बनाती है.
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