Tata Sons IPO को लेकर बड़ा अपडेट आया है. टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स को बड़ा झटका लगा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कंपनी की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी(CIC) का रजिस्ट्रेशन वापस लेने की अर्जी खारिज कर दी है. इसके साथ ही टाटा सन्स के शेयर बाजार में लिस्ट होने का रास्ता लगभग साफ हो गया है.
कंपनी ने खुद को NBFC से बाहर निकालकर प्राइवेट बने रहने की कोशिश की थी. अब RBI के फैसले के बाद उसे अपर लेयर NBFC के नियमों का पालन करना होगा. .जानें क्यों कंपनी के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना अब अनिवार्य हो गया है.
RBI ने क्या कहा?
NDTV Profit ने सूत्रों के मुताबिक, RBI के फैसले की जानकारी टाटा सन्स के कंपनी सचिव और CFO को शनिवार को मिले पत्र के जरिए दी गई. इसके साथ ही मार्च 2024 में CIC के तौर पर रजिस्ट्रेशन खत्म करने के लिए दिया गया आवेदन भी निपट गया.हालांकि, RBI और टाटा सन्स ने इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
कर्ज चुकाकर भी कंपनी को नहीं मिली राहत
Tata Sons ने लिस्टिंग से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चुका दिया था. इसके बाद कंपनी ने अपना CIC रजिस्ट्रेशन वापस लेने की अर्जी दी.कंपनी का मकसद NBFC के नियमों से बाहर निकलकर प्राइवेट कंपनी के तौर पर काम करना था. RBI ने उस समय इस आवेदन पर फैसला नहीं किया और Tata Sons को लगातार अपर लेयर NBFC की लिस्ट में रखा.
₹1 लाख करोड़ की संपत्ति बनी बड़ी वजह
जून 2026 से लागू RBI के नए नियमों ने Tata Sons की मुश्किल और बढ़ा दी. नए नियमों के तहत 1 लाख करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की स्टैंडअलोन एसेट वाली NBFC अपने आप अपर लेयर में आती है.मार्च 2026 तक Tata Sons की स्टैंडअलोन एसेट 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई हैं. ऐसे में कंपनी के लिए इस कैटेगरी से बाहर निकलना आसान नहीं रहा.
अगस्त में जारी 2026-27 की अपर लेयर लिस्ट में Tata Sons 17 कंपनियों में एकमात्र ऐसी प्राइवेट कंपनी थी, जो शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है. इस लिस्ट में REC, PFC और IRFC जैसी सरकारी NBFC भी हैं. सरकारी NBFC को लिस्टिंग की अनिवार्यता से छूट है.
क्या अब Tata Sons का IPO आएगा?
RBI का आवेदन खारिज करने से अब कंपनी के पास प्राइवेट बने रहने का रास्ता काफी मुश्किल हो गया है. इसलिए अपर लेयर NBFC के तौर पर लिस्टिंग की शर्त पूरी करनी होगी.आरबीआई के इस कदम से यह तो साफ हो गया है कि टाटा सन्स को आईपीओ लाना ही होगा, लेकिन इसके साइज, शेयर बिक्री का स्ट्रक्चर और सटीक टाइमिंग को लेकर अब पूरी नजरें टाटा ग्रुप के अगले फैसले पर टिकी हैं.
शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद टाटा सन्स को अपना सारा हिसाब-किताब सार्वजनिक करना पड़ेगा. कंपनी कहां पैसा लगा रही है और कैसे काम कर रही है, इस पर शेयर बाजार के निवेशकों की भी पैनी नजर रहेगी.
शेयरधारकों के बीच खिंच गई हैं तलवारें
टाटा सन्स की लिस्टिंग के को लेकर शेयरधारकों के बीच भी लंबे समय से खींचतान चल रही है.नोएल टाटा की अगुवाई वाले टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा सन्स की 65% से ज्यादा हिस्सेदारी है,और वह लिस्टिंग के पक्ष में नहीं रहा है.
दूसरी तरफ शापूरजी पालोनजी ग्रुप के पास करीब 18% हिस्सेदारी है. समूह लंबे समय से लिस्टिंग की मांग कर रहा है उसका तर्क है कि इससे शेयरधारकों को अपनी निवेश की सही वैल्यू हासिल करने का मौका मिलेगा.
लीडरशिप में बदलाव के बीच बड़ा झटका
RBI का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा सन्स अपने चेयरमैन के बदलाव की तैयारी कर रहा है.मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद आगे पद पर न रहने और अगले कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला लिया है.
अब Tata Sons को यह तय करना होगा कि RBI के फैसले के बाद लिस्टिंग में कितनी तेजी से आगे बढ़ना है. कंपनी की IT, ऑटो, स्टील, कंज्यूमर, एविएशन, होटल और फाइनेंसियल सर्विस समेत कई बड़े कारोबारों में हिस्सेदारी है.
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