- वॉरेन बफेट 56 वर्षों के बाद बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन पद से हट गए और चेयरमैन एमेरिटस बनेंगे
- उन्होंने 2026 में CEO पद छोड़ दिया था और अब बेटे हॉवर्ड बफेट कंपनी के बोर्ड में प्रमुख भूमिका निभाएंगे
- बर्कशायर हैथवे की स्थापना टेक्सटाइल कंपनी के रूप में हुई थी, जिसे उन्होंने निवेश कंपनी में बदला था
दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक वॉरेन बफेट 56 से ज्यादा सालों के बाद इन्वेस्टमेंट फर्म बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन पद से हट गए हैं. स्टॉक में दांव लगाकर उन्होंने अपनी दौलत बनाई और स्टॉक मार्केट के किंग कहलाए. इन्वेस्टमेंट की दुनिया के इस दिग्गज की उम्र 96 साल है. हालांकि, वह अभी पूरी तरह से रिटायर नहीं हो रहे हैं. वह तुरंत 'चेयरमैन एमेरिटस' की भूमिका संभालेंगे और अपने बेटे हॉवर्ड बफेट के लिए रास्ता बनाएंगे, जो 1993 से ही कंपनी के बोर्ड में शामिल हैं.
बफेट का भावुक पत्र
"ओरेकल ऑफ़ ओमाहा" (वॉरेन बफेट का उपनाम) एक और भूमिका नहीं छोड़ेंगे, और वह है डायरेक्टर की भूमिका. एक साल में यह दूसरा पद है जिससे उन्होंने इस्तीफा दिया है. 2026 की शुरुआत में, वह चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) की भूमिका से हट गए थे. ग्रेग एबेल ने उनसे 1 ट्रिलियन डॉलर की इस बड़ी कंपनी की कमान संभाली थी. उन्होंने कंपनी के स्टेकहोल्डर्स को एक भावुक पत्र लिखकर भरोसा दिलाया कि कंपनी सही हाथों में है. शेयरहोल्डर्स को लिखे एक पत्र में बफेट ने कहा, "मैंने 1965 से बर्कशायर की सेवा की है. 60 से ज़्यादा साल बीतने के बाद भी, मेरे पास दुनिया की सबसे अच्छी नौकरी है. मेरी उम्र के बहुत कम लोग ऐसा कह सकते हैं, और आगे क्या होने वाला है, इसे लेकर मुझे कभी इतना अच्छा महसूस नहीं हुआ. ग्रेग कंपनी चलाते हैं; हॉवर्ड इसकी संस्कृति और मूल्यों की रक्षा करेंगे - ये दोनों ही हमारी बैलेंस शीट की किसी भी चीज से ज्यादा कीमती हैं. हॉवर्ड को एक ऐसी पॉलिसी की तरह समझें जिसके मालिक शेयरहोल्डर हैं और जो उम्मीद करते हैं कि उन्हें कभी इसका क्लेम न करना पड़े."
बफेट ने न्यूजपेपर भी बेचा था
1930 में अमेरिका के नेब्रास्का राज्य के ओमाहा में जन्मे बफेट अमेरिकी कांग्रेसी हॉवर्ड बफेट के बेटे हैं. उन्होंने 11 साल की उम्र में अपना पहला स्टॉक खरीदा था केवल 13 साल की उम्र में अपना पहला टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया था. एक स्कूली छात्र के रूप में, उन्होंने न्यूजपेपर, च्यूइंग गम और कोका-कोला बेचा. किशोरावस्था तक वे छोटे बिजनेस से लगातार कमाई भी कर रहे थे.
उन्हें हार्वर्ड बिजनेस स्कूल ने एडमिशन नहीं दिया तो बफेट ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इकनॉमिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की. यहां उन्होंने वैल्यू इनवेस्टमेंट के जनक (फादर) कहे जाने वाले बेंजामिन ग्राहम के अंदर पढ़ाई की. बफेट ने 1962 में बर्कशायर हैथवे के शेयर लगभग 7.60 डॉलर प्रति शेयर पर खरीदना शुरू किया. उस समय बर्कशायर हैथवे एक जूझती हुई कंपनी थी और उसका नाम न्यू इंग्लैंड टेक्स्टाइल कंपनी था.
दान करने में भी पीछे नहीं
बफेट की कुल संपत्ति बर्कशायर हैथवे के स्टॉक से आती है. यह कंपनी पहले न्यू इंग्लैंड की एक टेक्सटाइल फर्म हुआ करती थी. बाद में यह एक इन्वेस्टमेंट कंपनी बन गई. बफेट अपने दान-पुण्य के कामों के लिए भी जाने जाते हैं. 2006 से अब तक उन्होंने 66 अरब डॉलर के शेयर दान में दिए हैं. बर्कशायर हैथवे के CEO के तौर पर उनके कार्यकाल में, कंपनी ने S&P 500 के मुकाबले लगभग दोगुना रिटर्न दिया. इंडेक्स की 10.4% की बढ़त के मुकाबले कंपनी की सालाना कंपाउंडेड ग्रोथ रेट 19.9% रही. एबेल ने एक बयान में कहा, "अमेरिकी बिजनेस के इतिहास में बर्कशायर और उसके मालिकों पर वॉरेन का असर बेमिसाल है. वॉरेन ने जो कल्चर बनाया और जिन मूल्यों को बढ़ावा दिया, वे बर्कशायर के मूल में बने रहेंगे और हॉवर्ड उनके संरक्षक होंगे."
कहां कर रखा है निवेश
बफेट पिछले छह दशकों से ओमाहा में रह रहे हैं और उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा निवेशक माना जाता है. उन्होंने GEICO जैसी इंश्योरेंस कंपनियों, बड़ी यूटिलिटी कंपनियों, मैन्युफैक्चरर्स और डेयरी क्वीन व BNSF रेलरोड जैसे जाने-माने ब्रांड्स में निवेश करके देश के विकास में योगदान दिया. इस साल की शुरुआत में, उन्होंने हर साल दान की जाने वाली रकम को काफी बढ़ाने का संकल्प लिया था. GEICO के अलावा, कंपनी की हिस्सेदारी ड्यूरासेल, कोका-कोला और बैंक ऑफ अमेरिका में भी है.
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