आज देश भर भारत बंद का असर दिख रहा है. ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों ने लेबर कोड के खिलाफ हड़ताल कर रहे है. इसी बीच एक नया सर्वे सामने आया है, जो एक अलग तस्वीर दिखाता है.लेबर मंत्रालय के तहत काम करने वाले नोएडा स्थित वी वी गिरि नेशनल लेबर इंस्टीट्यूट ने एक सर्वे किया है. इस सर्वे में देश भर के हजारों कर्मचारियों और एम्प्लॉयर की राय ली गई. नतीजों के मुताबिक ज्यादातर कर्मचारी मानते हैं कि नए लेबर कोड लागू होने से उनकी काम करने की स्थिति बेहतर हो सकती है.
कितने लोगों ने लिया हिस्सा?
इस स्टडी में कुल 6,435 लोगों से बात की गई. इसमें 5,720 कर्मचारी और 715 एम्प्लॉयर शामिल थे. कर्मचारियों से सीधे बातचीत और समूह चर्चा के जरिए राय ली गई, जबकि एम्प्लॉयर की राय बड़े उद्योग समूह, MSME और छोटे कारोबार से जुड़े संगठनों के जरिए ली गई.
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60 प्रतिशत कर्मचारियों को सुधार की उम्मीद
सर्वे में करीब 60 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि नए लेबर कोड लागू होने से उनकी कुल कामकाजी स्थिति बेहतर होगी. 63 प्रतिशत कर्मचारियों को लगता है कि काम के घंटे सही तरीके से तय होंगे और 60 प्रतिशत को उम्मीद है कि आराम और छुट्टी से जुड़ी व्यवस्था बेहतर होगी.
महिलाओं की सुरक्षा पर भरोसा
करीब 66 प्रतिशत कर्मचारियों ने माना कि सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट और निगरानी से जुड़ी व्यवस्था मजबूत होने से महिला कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ेगी. 63 प्रतिशत का कहना है कि जरूरी सुरक्षा उपकरण और बचाव उपाय से वर्कप्लेस ज्यादा सुरक्षित बनेंगे.
समय पर वेतन और आय की सुरक्षा
लगभग 64 प्रतिशत कर्मचारियों को उम्मीद है कि वेतन में पारदर्शिता आएगी और इनकम की सुरक्षा मजबूत होगी. 54 प्रतिशत को लगता है कि वेतन समय पर मिलने की व्यवस्था बेहतर होगी.
सोशल सिक्योरिटी में बदलाव
सर्वे के मुताबिक 68 प्रतिशत कर्मचारियों ने ई श्रम और वेलफेयर बोर्ड जैसी योजनाओं को आसान पहुंच का जरिया बताया. 63 प्रतिशत का मानना है कि कॉन्ट्रैक्ट और गिग वर्कर को भी ज्यादा सुविधा मिलेगी और वे अलग अलग जगह काम करने पर भी अपने लाभ जारी रख पाएंगे.
करीब 76 प्रतिशत नियोक्ताओं ने कहा कि वर्कर में फ्लैक्सिबिलिटी बिजेनेस के लिए जरूरी है. 64 प्रतिशत को फिक्स्ड टर्म नौकरी का मॉडल अपने बिजनेस के लिए सही लगता है. उतने ही नियोक्ताओं का मानना है कि समय पर वेतन के नियम से कामकाज में अनुशासन आएगा.
करीब 73 प्रतिशत नियोक्ताओं को लगता है कि आने वाले समय में नियमों का पालन करना आसान होगा और कागजी काम कम होगा. 62 प्रतिशत को उम्मीद है कि कर्मचारियों के लिए सोशल सिक्योरिटी का दायरा बढ़ेगा.
लागू कब होंगे नए लेबर कोड?
सरकार ने चारों लेबर कोड को नवंबर में अधिसूचित किया था और दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट नियमों पर सुझाव मांगे थे. सरकार की योजना है कि 1 अप्रैल 2026 से इन्हें पूरी तरह लागू किया जाए.
अगर आप नौकरी करते हैं, तो आने वाले समय में काम के घंटे, छुट्टी, वेतन और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव दिख सकता है. सरकार का दावा है कि इससे जीवन आसान होगा .हालांकि कुछ संगठनों की आपत्ति भी है, जिसके कारण आज भारत बंद का आह्वान किया गया है. नए लेबर कोड पर बहस जारी है, लेकिन सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में कर्मचारी और नियोक्ता इसे बदलाव के रूप में देख रहे हैं. अब सबकी नजर इस बात पर है कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने के बाद जमीन पर इसका असर कैसा दिखेगा.
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