- SKM और 10 ट्रेड यूनियनों ने भारत-US व्यापार समझौते और श्रम कानूनों के विरोध में भारत बंद का आह्वान किया है.
- किसान संगठन मानते हैं कि व्यापार समझौता अमेरिकी कंपनियों को लाभ पहुंचाकर कृषि बाजार को नुकसान पहुंचाएगा.
- ट्रेड यूनियनों ने चार नए लेबर कोड को मजदूर विरोधी करार देते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की है.
Bharat Bandh Today: संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने आज भारत बंद का ऐलान किया है. इस भारत बंद का असर देशभर के सैकड़ों जिलों तक पहुंचने की संभावना है.
किसान और ट्रेड यूनियनों के विरोध का कारण
1. भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध
SKM (संयुक्त किसान मोर्चा) और किसान संगठनों का आरोप है कि यह समझौता अमेरिकी कंपनियों को बढ़त देगा और भारतीय कृषि-बाजार पर दबाव बढ़ाएगा. उनका कहना है कि इससे डेयरी उत्पाद, अनाज, सोयाबीन तेल, पशु चारा जैसे उत्पाद सस्ते दामों पर भारत में आएंगे और भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे. SKM ने इसे किसानों के साथ विश्वासघात और 'पूरी तरह सरेंडर' कहा है.
2. चार नए लेबर कोड की वापसी की मांग
2025 में लागू चार नए लेबर कोड ने 29 पुराने श्रम कानूनों को बदल दिया था. यूनियनों का आरोप है कि यह कोड मजदूरों की सुरक्षा कमजोर करते हैं. हड़ताल व यूनियन गतिविधियों पर रोक बढ़ाते हैं. कंपनियों को निकालने-भर्ती में अत्यधिक छूट देते हैं. इसलिए इन्हें 'anti-worker' बताया जा रहा है और वापसी की मांग की जा रही है.

3. सरकारी उपक्रमों के निजीकरण का विरोध
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि PSU (सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम) बेचने से नौकरी का जोखिम बढ़ता है, सामाजिक सुरक्षा घटती है और मजदूरों का भविष्य अस्थिर होता है. कई राज्य इकाइयों के कर्मचारियों ने विशेष रूप से इसका विरोध जताया है.
4. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
कर्मचारियों की मांग है कि OPS वापस लाई जाए. नई पेंशन स्कीम (NPS) बाजार आधारित है और रिटायरमेंट सुरक्षा कमजोर करती है. कई यूनियनों ने इसे प्रमुख मांग बताया है.
5. न्यूनतम वेतन में वृद्धि
संगठनों का कहना है कि महंगाई बढ़ने के बावजूद वेतन वृद्धि नहीं हुई. योजना कर्मचारियों (आंगनबाड़ी, आशा आदि) को भी न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा मिले.
6. निर्माण व बिजली क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा
बिजली संशोधन विधेयक 2025 का विरोध होलरहा है. किसान और मजदूर संगठनों का कहना है कि इससे बिजली महंगी होगी, स्मार्ट मीटर व पीक-ऑवर चार्ज बढ़ेंगे. मजदूरों को अस्थायीता और संविदा व्यवस्था का खतरा बढ़ेगा.
7. कृषि नीतियों में बदलाव की मांग
किसान संगठन MSP गारंटी, भूमि-बीज कानूनों में पारदर्शिता और ग्रामीण रोज़गार मिशन में सुधार की मांग कर रहे हैं.
इसके अलावा Draft Seed Bill, Electricity Amendment Bill, SHANTI Act और VB-G RAM G Act 2025 का भी विरोध किया जा रहा है.

किन सेवाओं पर पड़ेगा असर?
1. परिवहन सेवाएं
कई राज्यों में बस, ऑटो और लॉरी ड्राइवर्स यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक व निजी परिवहन प्रभावित हो सकता है. बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था में बाधा आने की संभावना है.
2. बैंकिंग सेवाएं
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं. चेक क्लीयरेंस में देरी की आशंका बनी हुई है. हालांकि, बैंक बंद नहीं होंगे और ऑनलाइन लेन-देन व एटीएम सेवाएं सामान्य रहेंगी.
3. बाजार और व्यापार
कई व्यापारिक संगठनों और मंडियों ने हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है, जिससे बड़े शहरों में थोक और खुदरा बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रह सकते हैं.
4. सरकारी कार्यालय
ट्रेड यूनियनों के अधिक प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहने की संभावना, जिससे सरकारी कामकाज धीमा हो सकता है.
5. स्कूल और कॉलेज
सुरक्षा और परिवहन समस्याओं को देखते हुए, कुछ राज्यों में जिला प्रशासन स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर सकता है.
जो सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी
- एंबुलेंस, अस्पताल और अन्य आपातकालीन सेवाएं
- दमकल विभाग
- हवाई यात्रा और एयरपोर्ट संचालन
- डिजिटल बैंकिंग और एटीएम
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