Global CEOs are Lining up to Write Cheques for India: जब दुनियाभर के ज्यादातर देशों की इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ रही है, दुनिया जियो-पॉलिटिकल तनावों से जूझ रही है, उसी समय ग्लोबल बोर्ड रूम यानी दुनिया की दिग्गज कंपनियां भारत को 'भविष्य के ग्रोथ इंजन' के रूप में देख रही है. दुनिया भर की दिग्गज कंपनियों के CEOs भारत में भारी-भरकम पूंजी लगाने के लिए कतार में खड़े हैं.
फरवरी के तीसरे हफ्ते से लेकर जून के आखिरी हफ्ते के बीच भारतीय बाजार में अरबों डॉलर के निवेश के लिए घोषणाएं हो चुकी हैं. गूगल से लेकर अमेजन तक, अगले कुछ वर्षों में कई कंपनियां भारतीय बाजार में करीब 9 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही हैं.
अभी एक दिन पहले ही, 25 जून, गुरुवार को अमेजन के CEO एंडी जैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) से मुलाकात की और साल 2030 तक भारत में अपने निवेश को बढ़ा कर 48 बिलियन डॉलर करने की बात कही. इसमें कंपनी का नया एआई (AI) और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार भी शामिल है. अमेजन से पहले कई टेक कंपनियां निवेश का ऐलान कर चुकी हैं.
कौन-सी कंपनियां कितने पैसे लगाने वाली हैं?
अमेजन के अलावा डिजिटल और एआई के क्षेत्र में अन्य टेक दिग्गज भी पीछे नहीं हैं.
- 18 फरवरी 2026 को गूगल ने भारत के लिए पांच साल के 15 बिलियन डॉलर के 'एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लान' का ऐलान किया था. इस योजना के तहत Sub-Sea कनेक्टिविटी (समुद्र के नीचे के केबल), डेटा सेंटर्स, क्लाउड क्षमता और भारत में युवाओं के लिए एआई स्किलिंग (कौशल विकास) पर काम किया जा रहा है.
- डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ डेटा सेंटर्स के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड तोड़ निवेश आ रहा है. 5 जून 2026 को ऑस्ट्रेलिया की कंपनी एयरट्रंक (AirTrunk) ने साल 2030 तक भारत में 5 गीगावाट (GW) की डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने के लिए 30 बिलियन डॉलर के निवेश की योजना पेश की.

- वहीं, 17 जून 2026 को कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPP Investments) ने भारत के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और हाइपरस्केल डेटा सेंटर क्षमता को बढ़ाने के लिए CtrlS डेटा सेंटर्स के साथ मिलकर 7,000 करोड़ रुपये तक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है.
- 9 मार्च 2026 को एबीबी (ABB) ने प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी विनिर्माण और आरएंडडी (अनुसंधान एवं विकास) क्षमताओं को बढ़ाने के लिए भारत में 75 मिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की थी.
- इसके बाद, 18 जून 2026 को फ्रांस की दिग्गज कंपनी सेंट-गोबैन (Saint-Gobain) ने अगले पांच वर्षों में भारत में एक बिलियन यूरो (€1 बिलियन) के निवेश का ऐलान किया और भारत को अपने सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बताया.
इन धुआंधार निवेशों से एक बात पूरी तरह साफ है कि वैश्विक कंपनियों के प्रमुख भारत की आर्थिक क्षमता को पहचान चुके हैं. वे सही समय पर भारत के इस विकास चक्र में शामिल होकर भारी निवेश के जरिए अपनी मौजूदगी को मजबूत कर रहे हैं.
कैसे देश में बदल सकती है ई-कॉमर्स की तस्वीर?
बड़े टेक और डिजिटल इंफ्रा निवेशों का ई-कॉमर्स पर सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है. अमेजन तो खैर पहले से ही ई-कॉमर्स में सक्रिय है और अब क्विक कॉमर्स में भारतीय कंपनियों जेप्टो, ब्लिंकिट से मुकाबला करना चाहती है. Amazon, Google और AirTrunk जैसे निवेश क्लाउड, डेटा सेंटर, AI और कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगे, जिससे ऑर्डर प्रेडिक्शन, वेयरहाउस मैनेजमेंट और रूट ऑप्टिमाइजेशन जैसी क्षमताएं बेहतर हो सकती हैं. क्विक कॉमर्स का बिजनेस मॉडल इसी तेज और सटीक टेक-लॉजिस्टिक्स बैकबोन पर टिका होता है, इसलिए ये निवेश उसकी ऑपरेशनल दक्षता बढ़ा सकते हैं.
- क्लाउड और डेटा सेंटर निवेश से क्विक कॉमर्स की टेक क्षमता बढ़ेगी. अमेजन, गूगल और एयरट्रंक जैसे निवेशों से डेटा प्रोसेसिंग, AI, रूट-ऑप्टिमाइजेशन, इन्वेंट्री प्रेडिक्शन और फुलफिलमेंट सिस्टम मजबूत होंगे, जो 10-30 मिनट डिलीवरी मॉडल के लिए जरूरी हैं.
- लॉजिस्टिक्स और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगी. जब डेटा सेंटर, डिजिटल इंफ्रा और कनेक्टिविटी में पैसा आएगा, तो ऑर्डर मैनेजमेंट, वेयरहाउस-टू-डिलीवरी समन्वय और शहरी फुलफिलमेंट नेटवर्क ज्यादा कुशल हो सकते हैं.
- प्रतिस्पर्धा तेज होगी. अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ई-कॉमर्स खिलाड़ी पहले से मौजूद ब्लिंकिट (Blinkit), इंस्टामार्ट(Instamart) और जेप्टो (Zepto) को टक्कर देने के लिए और आक्रामक निवेश कर सकते हैं, जिससे क्विक कॉमर्स में कैपेक्स, छूट और मार्केट-शेयर की जंग बढ़ सकती है.
- उपभोक्ता व्यवहार और कैटेगरी मिक्स बदल सकता है. तेज इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर AI से ग्रॉसरी, पैकेज्ड फूड, फॉर्मेसी और रोजमर्रा की जरूरत वाले सामानों की डिलीवरी और मजबूत हो सकती है, जिससे क्विक कॉमर्स का दायरा बढ़ेगा.
जानकार बताते हैं कि इनसे सीधा फायदा होगा, जब ये निवेश फुलफिलमेंट, AI प्लानिंग, क्लाउड बेस्ड डिमांड फोरकास्टिंग और लास्ट माइल ऑप्टिमाइजेशन में बदले जाएं. उन्होंने कहा कि सिर्फ बड़ा निवेश अपने-आप क्विक कॉमर्स को नहीं बदलता, लेकिन ये उस टेक और ऑपरेशनल बैकबोन को मजबूत करता है जिस पर क्विक कॉमर्स चलता है.
ये भी पढ़ें: 93,71,433,92,00,000 रुपये... महज 4 साल के भीतर इतने का होगा देश में ग्रॉसरी का बाजार
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं