भारत का किराना बाजार आने वाले कुछ सालों में तेजी से बढ़ सकता है. रेडसीर की नई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2030 तक देश का किराना बाजार बढ़कर 992 अरब डॉलर का हो सकता है. इसे रुपये में कन्वर्ट करें तो ये मौजूदा वैल्यू में 93,71,433,92,00,000 रुपये के बराबर होता है. अभी इसका आकार करीब 658 अरब डॉलर है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आज भी 91% किराना खरीदारी ऑफलाइन स्टोर से होती है. इससे साफ है कि ऑनलाइन ग्रॉसरी की हिस्सेदारी अभी भी काफी कम है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2030 तक भारत के 15 करोड़ से ज्यादा परिवार हर साल मिलकर 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करेंगे. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा किराना सामान का होगा.
छोटे शहरों पर रहेगा फोकस
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में किराना कारोबार की सबसे ज्यादा ग्रोथ टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने की उम्मीद है. हालांकि, सिर्फ मेट्रो शहरों की रणनीति अपनाकर इन बाजारों में सफलता नहीं मिलेगी. कंपनियों को स्थानीय ग्राहकों की पसंद के हिसाब से अपने प्रोडक्ट, कीमत और डिस्ट्रीब्यूशन में बदलाव करना होगा. रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्राहक क्षेत्रीय वैरायटी, छोटे पैक साइज, किफायती कीमत और हेल्दी पैक्ड प्रोडक्ट्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
कम लागत और बचत पर जोर
रिपोर्ट के मुताबिक, 'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल तेजी से बढ़ रहा है. इसमें क्षेत्रीय प्रोडक्ट्स, प्राइवेट लेबल और कम लागत वाली डिलीवरी पर जोर दिया जाता है. रिपोर्ट का कहना है कि यह मॉडल भारत के अगले 10 करोड़ ऑनलाइन खरीदारों को डिजिटल कॉमर्स से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक 15 करोड़ से ज्यादा भारतीय परिवारों की खर्च करने की क्षमता हर साल करीब 4% से 5% की दर से बढ़ने का अनुमान है. इससे देश के किराना और रिटेल बाजार को लगातार बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
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