- अमेरिका के न्याय विभाग ने अदाणी ग्रुप के खिलाफ लगे धोखाधड़ी के आरोप वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है
- वरिष्ठ वकील संजय अशर ने बताया कि यूएस न्याय विभाग के पास कोई सबूत नहीं था, इसीलिए मुकदमा सेटल कर रही है
- CIPP के CEO यतीश रजावत ने कहा कि यह मुकदमा भारत को झुकाने के लिए राजनीतिक दबाव के तहत दर्ज किया गया था
अमेरिका में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के खिलाफ लगे धोखाधड़ी के आरोप जल्द ही खत्म हो सकते हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने इस मामले को सुलझाने और केस को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस तरह से पिछले एक साल से जारी कानूनी विवाद खत्म हो सकता है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी लीगल डिपार्टमेंट (न्याय विभाग) इसी हफ्ते अदाणी के खिलाफ लगे आरोपों को वापस लिए जाने की घोषणा कर सकता है. अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) भी गौतम अदाणी और अन्य के खिलाफ नागरिक धोखाधड़ी (सिविल फ्रॉड) के मामले को निपटाने की तैयारी कर रहा है.
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संगीत रागी ने कहा कि भारत के कुछ कॉरपोरेट लोगों की वजह से ही अदाणी ग्रुप पर केस दर्ज किया गया है. अदाणी ग्रुप की कॉरपोरेट क्षमता भारत में बढ़ी है. गौतम अदाणी आज बहुत बड़े उद्योगपति के रूप में खड़े हुए हैं. ऐसे में ये देखना होगा कि कौन उनसे ईष्या करता है और कौन उनकी इमेज खराब करना चाहता है? कॉरपोरेट के अंदर उनके बढ़ते हुए अंपायर को कौन रोकना चाहता है?
'अमेरिका में इस मामले का जुरिसडिक्शन नहीं बनता...': प्रो. संगीत रागी, दिल्ली यूनिवर्सिटी
— NDTV India (@ndtvindia) May 15, 2026
गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिका में खत्म हो सकता है केस - ब्लूमबर्ग रिपोर्ट#GautamAdani | @vikasbha pic.twitter.com/TeSXtm4U3w
प्रोफेसर संगीत रागी ने कहा, "अदाणी ग्रुप के मामले में राजनीति साफ तौर पर नजर आ रही है. भारत में जिस कथित रिश्वत देने के आरोप लगाए जा रहे हैं, क्या उसकी जांच हुई है? क्या किसी लेने या देने वाले का नाम सामने आया है? अदाणी ग्रुप ने कभी जांच से मना नहीं किया है. भारत में इसको लेकर कुछ निकला नहीं है. ऐसे में अपने आप में ये केस झूठा था."

उन्होंने कहा कि यूएस में ये बस अनुमान लगा लिया गया कि भारत में ऐसा हुआ होगा. अगर उनके पास ऐसा कोई सबूत था तो वो दिखाते. अदाणी ग्रुप के वकील ने कोर्ट में कहा भी कि अमेरिका में इस मामले का जुरिसडिक्शन ही नहीं बनता है. अगर आपके पास इसको लेकर कोई सबूत है तो दिखाएं और अगर ऐसा नहीं है तो ये केस अपने आप में कमजोर हो जाता है. ऐसे में किरकिरी आरोप लगाने वाले और वहां की सरकार की ही होगी.
संगीत रागी ने कहा कि पूरा मामला अदाणी ग्रुप को भारत के अंदर नुकसान पहुंचाने के लिए शुद्ध रूप से राजनीति और कॉरपोरेट विरोध का दिखता है. उन्होंने कहा कि दूसरे देशों में किसी बड़े प्रोजेक्ट या पावर प्लांट बनाने से क्या भारत की क्षमता नहीं बढ़ती है? क्या इससे भारत को फायदा नहीं होता है? उन्होंने कहा कि दूसरे किसी बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष जब भारत आते हैं तो अपने साथ कॉरपोरेट के लोगों को लेकर आते हैं. ऐसे में अगर देश के कॉरपोरेट की क्षमता बढ़ेगी तो भारत मजबूत होगा. ये देश के एसेट हैं.
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वहीं क्रॉफर्ड बेली एंड कंपनी के पार्टनर और वरिष्ठ वकील संजय अशर ने कहा, 'अमेरिका के जो आरोप थे, उसका कोई आधार नहीं था. फिर भी एसईसी और डीओजे ने मुकदमा चालू किया और अभी सेटलमेंट भी कर लिया है. इसका मतलब ये भी निकलता है कि जो भी आरोप लगाए गए थे, उसमें कोई दम नहीं था. इसीलिए एसईसी ने भी एक्सेप्ट कर लिया है कि हमको सेटल करना चाहिए. क्योंकि ये अगर आगे बढ़ेगा तो उसमें एसईसी का जो दावा है, एसईसी के जो आरोप हैं, वो सब डिसमिस हो जाएंगे.'

संजय अशर ने कहा, "अपने लगाए आरोपों में दम नहीं देखकर ही एसईसी ने कहा है कि चलो, हम उसको सेटल कर देते हैं. अगर उनके आरोपों में कुछ भी गंभीर बात होती तो एसईसी उसको सेटल नहीं करती. केस को और आगे जाने देती. तो इससे ये साबित होता है कि जो आरोप लगाए गए थे, उसमें कोई भी ज्यादा दम नहीं था. इसीलिए एसईसी ने ये सेटलमेंट का प्रपोजल सेटल कर लिया है."
'...जो भी आरोप लगाए गए थे उनमें कोई दम नहीं था': संजय अशर, वरिष्ठ वकील, पार्टनर, क्रॉफर्ड बेली एंड कंपनी
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सीआईपीपी के सीईओ यतीश रजावत ने अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के खिलाफ दायर इस मुकदमे को भारत को झुकाने की कोशिश बताया है. उन्होंने कहा कि इस मुकदमा को दर्ज करने का समय काफी महत्वपूर्ण है. जिस समय यह मामला दर्ज हुआ उस समय भारत और अमेरिका एक बड़ी डील पर बात कर रहे थे, भारत इस डील में झुकने को तैयार नहीं था. अमेरिका में भारत को झुकाने के लिए यह मुकदमा दर्ज हुआ. लेकिन इससे न तो भारत पर कोई असर पड़ा और न ही अदाणी ग्रुप पर. यह देखने के बाद अमेरिका ने यह मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है.
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यतीश रजावत ने कहा, ''देखिए डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने जिस तरह से केस फ्रेम किए थे और जो इसका समय था वह काफी महत्वपूर्ण है. उस समय भारत-अमेरिका में एक बड़ी डील को लेकर बातचीत कर रहे थे. एपस्टीन पर बात हो रही थी. अमेरिका ने हम पर भारी-भरकम टैरिफ लगा रखा था. एक दबाव तो टैरिफ का था और दूसरा यह कि हम भारत को कैसे रोक सकते हैं. कैसे भारत पर दबाव डाल सकते हैं.''

ये मामला नवंबर 2024 में शुरू किया गया था. अदाणी ग्रुप शुरुआत से ही इन आरोपों का खंडन करता रहा है. इन मामलों के अंत से अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार अदाणी ग्रुप के लिए फिर से खुल जाएंगे, जिससे ग्रुप को अपनी योजनाओं को विस्तार देने के लिए आगे बढ़ने में मदद मिलेगी.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि अमेरिकी लीगल डिपार्टमेंट देश के बाहर घटित घटनाक्रम से संबंधित मामले में आरोपों को खत्म करने की प्रक्रिया को अपना सकता है. हालांकि अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने इस मामले में कोई भी टिप्पणी करने से फिलहाल मना कर दिया है.
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(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)
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