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This Article is From Oct 25, 2019

प्राइम टाइम इंट्रो: महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणाम का विश्लेषण

Ravish Kumar
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    अक्टूबर 25, 2019 00:30 am IST
    • Published On अक्टूबर 25, 2019 00:30 am IST
    • Last Updated On अक्टूबर 25, 2019 00:30 am IST

महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी की सरकार बन रही है. देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर ही मुख्यमंत्री होंगे. प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दोनों के पिछले कार्यकाल की तारीफ की है और आगे के लिए बधाई दे दी है. इस चुनाव में जनता ने अपनी तरफ से विपक्ष को भी मज़बूत किया है. सत्ता नहीं दी है. विपक्ष के खेमे में अगर देखें तो लड़ाई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और जननायक जनता पार्टी ने ही लड़ी बाकी कांग्रेस को लेकर यही कहा जा रहा है कि उसके उम्मीदवार तो लड़ रहे थे मगर पार्टी नज़र नहीं आ रही थी. महाराष्ट्र के चुनावों की दो तस्वीरों की बात से इस चुनाव की कहानी शुरू करते हैं. जो प्रचार की आंधी तैयार करने वालों पर भारी पड़ गई.

बारिश में भाषण देते हुए शरद पवार की यह तस्वीर 19 अक्तूबर की है. सतारा लोकसभा क्षेत्र की. 79 साल के पवार भीगते रहे और आधे घंटे तक भाषण देते रहे. सतारा लोकसभा उपचुनाव में पवार उस उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार कर रहे थे जो 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हीं की पार्टी से जीता था. शिवसेना के वंशज माने जाने वाले उदयन राज भोंसले अपनी सीट से इस्तीफा देकर बीजेपी से लड़ रहे थे. इस सीट से उदयन राज तीन बार जीत चुके थे मगर बीजेपी के टिकट से हार गए. अब पवार की भींगती हुई इस तस्वीर के सामने बीजेपी की इस तस्वीर को देखिए जिसे बीजेपी ने आइकॉनिक पिक्चर बताया था. लगता है कि पूरी प्लानिग से ये तस्वीर ली गई है ताकि शिवाजी की प्रोफाइल से प्रधानमंत्री मोदी की प्रोफाइल मैच कर जाए. दोनों एक ही फ्रेम में एक जैसे नज़र आने लगे, लेकिन इस आइकॉनिक सीट का खास नतीजा नहीं निकला. यह सही है कि पनवेल की यह तस्वीर है और यहां से बीजेपी के उम्मीदवार की जीत हुई है. अगर इस आइकॉनिक सीट का जादू चलता तो बीजेपी अकेले सरकार बना रही होती. पवार की तस्वीर ज़रूर आइकॉनिक बन गई. उनकी सरकार भले न बनी मगर उनकी पार्टी ने अपना किला फिर से मज़बूत कर लिया. पवार की यह तस्वीर थके-बुझे विपक्ष के नेताओं के बीच किसी किंवदंती की तरह देखी जाएगी, सुनी जाएगी.

शिवसेना की क्या भूमिका होगी? उद्दव ठाकरे 50-50 फॉर्मूले की बात कर रहे हैं. ढाई साल बीजेपी और ढाई साल शिवसेना का मुख्यमंत्री का फॉर्मूला तय हुआ था. यह फॉर्मूला न तो सपा-बसपा के बीच यूपी में चला और न ही जम्मू कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी के बीच चला. शिवसेना को पिछली बार की तरह 63 सीटें तो नहीं मिली हैं, लेकिन बीजेपी 20-22 सीटें कम हो गईं. शिवसेना को लगा था कि उसे फिर से बड़ा भाई बनने का मौका मिला है. उद्धव ठाकरे ने कहा कि सरकार कैसी होगी बात करने के लिए अमित शाह को भी आने की ज़ररूत पड़ सकती है, लेकिन सरकार के मुखिया का एलान तो दिल्ली में ही हो गया. तब भी जब उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा कि वे हर बार बीजेपी के लिए जगह नहीं छोड़ेंगे.

महाराष्ट्र की राजनीति में एक दल का वर्चस्व नहीं है. जैसा पहले था वैसा हो गया है. ऐसा लगा था कि देवेंद फड़णवीस ने अपनी पार्टी के भीतर और बाहर सबको निपटा दिया है, वैसा नहीं हैं. शिवसेना, एनसीपी के अलावा कांग्रेस ने भी अच्छा ही किया है. 31 सीटें तो निर्दलीय और नए दलों को आई हैं. महाराष्ट्र में जनता ने चुनाव लड़ा है. जनता अपने मुद्दों के लिए लड़ रही थी, लेकिन पार्टियां अपने मुद्दों पर जनता को लड़वा रहे थे. मीडिया सत्ताधारी पार्टी के साथ चुनाव लड़ रहा था. प्रचार की आंधी जनता की हवा के सामने फेल हो गई. महाराष्ट्र किसी एक का नहीं है, मगर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को क्यों कहना पड़ा कि 15 अपक्ष विधायकों ने उनसे संपर्क किया है और वो सपोर्ट के लिए तैयार हैं.

शरद पवार भी कह रहे हैं कि शिवसेना के साथ सरकार नहीं बनाएंगे. एनसीपी ने अपना प्रदर्शन अच्छा कर लिया. जिसे माना जा रहा था कि समाप्त हो जाएगी. कांग्रेस के भी साफ होने की बात कही जा रही थी मगर उसके उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन ऐसा कांग्रेस के प्रदर्शन से तो नहीं हुआ. एक मज़बूत विपक्ष की भूमिका मिली है. राजनीति के लिहाज़ से देखें तो जिस धनगर समाज के ज़रिए पवार को रोकने की कोशिश की गई थी. पवार की पार्टी ने धनगर बहुल क्षेत्र में बीजेपी से ज्यादा सीटें जीती हैं. पंकजा मुंडे 30,000 वोटों से चुनाव हार गई हैं. बारामती से एनसीपी के अजित पवार महाराष्ट्र में सबसे अधिक वोटों से जीतने वाले नेता हैं. 1 लाख 65 हज़ार 265 वोटों से बीजेपी के उम्मीदवार को हराया है. शरद पवार शुक्रवार को सतारा जा रहे हैं धन्यवाद करने. दिवाली के बाद राज्य का दौरा करेंगे.

हरियाणा में क्या हुआ? एग्ज़िट पोल के दावों के हिसाब तो नहीं हुआ, लेकिन पिछली बार की तुलना में 7 सीटें कम होने के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी हरियाणा की जीत को अभूतपूर्व बता रहे हैं. विपक्ष और विशेषज्ञ मनोहर लाल खट्टर को बीजेपी के खराब प्रदर्शन का कारण बता रहे हों, लेकिन प्रधानमंत्री ने मनोहर लाल खट्टर की तारीफ कर दी. उन्हें फिर से मुख्यमत्री बनाए रखने का एलान कर दिया. जननायक जनता पार्टी को 10 सीटें मिली हैं और कांग्रेस को 31. कांग्रेस को 16 सीटों का फायदा मिला. मगर सरकार नहीं बन पाई. शायद कांग्रेस चुनाव लड़ती तो जनता का साथ मिलता. क्या महाराष्ट्र की तरह हरियाणा की जनता भी अपना चुनाव खुद लड़ रही थी? इस चुनाव का संदेश साफ है. जनता विपक्ष है. मनोहर लाल खट्टर नारा दे रहे थे अबकी बार 75 बार. 7 सीटें कम हो गईं. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हार गए. कई मंत्री हार गए. फिर भी प्रधानमंत्री इसे अभूतपूर्व जीत बता रहे हैं. खुद खट्टर की जीत का अंतर कम हो गया.

2014 में करनाल से खट्टर 63773 वोटों से जीते थे. इस बार 45,188 वोटों से जीते. दुष्यंत चौटाला पर आज काफी फोकस रहा, लगा कि बगैर उनके सरकार नहीं बनेगी. मगर अब ऐसा नहीं लगता है. हरियाणा में कांग्रेस और जजपा के मिलकर सरकार बनाने की संभावना समाप्त हो गई है. सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बीजेपी ही उभरी है तो उसे ही सरकार बनाने का न्योता मिलेगा. बीजेपी बहुमत से सिर्फ 5 अंक दूर है, जिसे जुटाना बहुत मुश्किल नहीं है.

ये अमित शाह स्टाइल है. सीटें कम होती हैं मगर कम होना हार नहीं होती. दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ प्रधानमंत्री मोदी भी आए. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी भी आए. बीजेपी के कार्यवाहक अध्यक्ष जेपी नड्डा भी थे. कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को स्पष्ट जीत नहीं मिली थी फिर भी इसी मुख्यालय पर आए थे. रात के वक्त. भाषण में जीत का जज़्बा झलक रहा था इस बार भी.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा मोदी-2 में पहले दोनों चुनाव बीजेपी जीतकर आगे बढ़ी है. हरियाणा में 3 प्रतिशत अधिक वोट मिले हैं. सबसे बड़ी पार्टी बने हैं. अमित शाह ने देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर दोनों की तारीफ की है कहा है कि दोनों राज्यों की जनता ने हमारे मुख्यमंत्रियों के काम पर ठप्पा लगाने का काम किया है. दोनों को बधाई दी और अभिनंदन दिया. क्या अमित शाह ने यह साफ कर दिया कि बीजेपी कहीं भी सहयोगी के दबाव में अपना मुख्यमंत्री नहीं बदलने जा रही है. इसी मौके पर अमित शाह ने दिल्ली की अनियमति कॉलोनियों का ज़िक्र कर बता दिया कि दोनों चुनाव बीत गए हैं. आगे की सोचना है. इसके बाद प्रधानमंत्री ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. उन्होंने भी आज के नतीजों को उनकी सरकारों के प्रति जनता का विश्वास बताया है. प्रधानमंत्री ने हरियाणा की जीत को अभूतपूर्व विजय बताया.

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