Non Hindus Entry Ban Poetry Event: उज्जैन के महाकाल मंदिर में गैर‑हिंदुओं की एंट्री बैन का मुद्दा अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि छत्तीसगढ़ से एक नया विवाद सामने आ गया. इस बार मामला किसी मंदिर का नहीं, बल्कि एक कवि सम्मेलन का है. बिलासपुर में प्रस्तावित अखिल भारतीय हिंदू शौर्य कवि सम्मेलन के पोस्टर और अनाउंसमेंट में “सिर्फ हिंदुओं के लिए” लिखे जाने के बाद सियासी और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है.
पोस्टर और अनाउंसमेंट से भड़का विवाद
दरअसल, 31 जनवरी को बिलासपुर में होने वाले अखिल भारतीय हिंदू शौर्य कवि सम्मेलन के प्रचार‑प्रसार के दौरान विवाद तब बढ़ा, जब आयोजकों की ओर से किए गए अनाउंसमेंट में यह कहा गया कि कार्यक्रम में गैर‑हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है. इतना ही नहीं, पोस्टर पर भी साफ‑साफ लिखा गया कि यह आयोजन “सिर्फ हिंदुओं के लिए” है. जैसे ही यह बात सामने आई, शहर में चर्चा तेज हो गई.
सामाजिक संगठनों ने जताई कड़ी आपत्ति
मामले को लेकर शहर के कई सामाजिक संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई है. उनका कहना है कि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में धर्म के आधार पर प्रवेश पर रोक लगाना भेदभावपूर्ण है और यह संविधान की भावना के खिलाफ है. संगठनों का आरोप है कि इस तरह की भाषा समाज में विभाजन पैदा करती है और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाती है.
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शासकीय स्थल पर आयोजन पर भी सवाल
सिर्फ अनाउंसमेंट ही नहीं, बल्कि आयोजन स्थल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. सामाजिक संगठनों का कहना है कि पुलिस ग्राउंड जैसे शासकीय और सार्वजनिक स्थान पर इस तरह के आयोजन की अनुमति कैसे दी गई. उनका तर्क है कि सार्वजनिक जगह पर किसी भी समुदाय के प्रवेश पर रोक लगाना गलत परंपरा को बढ़ावा देता है.
'नियमों के तहत ही मिलती है अनुमति'
पूरे विवाद पर अब पुलिस विभाग की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. एसएसपी रजनेश सिंह ने साफ कहा है कि किसी भी आयोजन को तय नियमों और शर्तों के आधार पर ही अनुमति दी जाती है. उन्होंने कहा कि अगर आयोजकों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया पाया गया, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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