- बिहार में 2016 में शराबबंदी लागू होने के बावजूद राज्य में शराब की बिक्री और तस्करी जारी है.
- पिछले 5 वर्षों में बिहार पुलिस ने लगभग दो करोड़ लीटर शराब जब्त की है जो हर दिन दस हजार लीटर से अधिक है.
- 2024 और 2025 में क्रमशः एक लाख बीस हजार और एक लाख पच्चीस हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया.
Liquor Ban in Bihar: बिहार में साल 2016 में शराबबंदी लागू की गई थी. इसके बाद राज्य में घोषित तौर पर शराब की बिक्री बंद हो गई. शराब की दुकानें बंद हो गईं. लेकिन हकीकत यह है कि शराबबंदी के कड़े नियम लागू होने के करीब 10 साल बाद भी बिहार शराब से मुक्त नहीं हो सका है. शराब राज्य के हर जिले, शहर, कस्बों और गांवों में मिल रहा है. शराबबंदी के सरकारी आंकड़े भी चौंकाने वाली जानकारी दे रहे हैं. शराबबंदी वाले बिहार में हर दिन 10 हजार लीटर शराब जब्त की जा रही है. पुलिस प्रशासन की सक्रियता के बावजूद शराब के वितरण में कमी नहीं आ रही है. आंकड़े यही बता रहे हैं. पिछले 5 साल में करीब दो करोड़ लीटर शराब जब्त की गई है. 2025 में 36 लाख 39 हजार 599 लीटर शराब जब्त की गई है. 2025 में 2024 के मुकाबले 1 लाख 78 हजार लीटर अधिक शराब जब्त की गई.
बीते 5 साल में करीब 2 करोड़ लीटर शराब जब्त
आंकड़े बताते हैं कि बिहार में पिछले 5 साल में करीब 2 करोड़ लीटर शराब जब्त की गई है. सबसे अधिक 2021 में और सबसे कम 2020 में शराब जब्त की गई. इन आंकड़ों से पता चलता है कि हर साल औसतन 37 लाख 85 हजार 793 लीटर शराब जब्त होती है. यानी हर दिन 10 हजार 372 लीटर. यह आंकड़े सिर्फ जब्त शराब के हैं. खपत के नहीं.

बीते 5 साल में कब कितनी लीटर शराब हुईं जब्त
- 2021 में 45 लाख 37 हजार 81 लीटर
- 2022 में 33 लाख 27 हजार 827 लीटर
- 2023 में 39 लाख 63 हजार 366 लीटर
- 2024 में 34 लाख 61 हजार 96 लीटर
- 2025 में 36 लाख 39 हजार 599 लीटर
1 साल में शराब के मामले में सवा लाख गिरफ्तार
शराब तस्करी में शामिल लोग अकूत संपत्ति इकट्ठा कर रहे हैं. इसलिए तस्करी के धंधे में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है. बिहार पुलिस के मुताबिक 2024 में 1 लाख 21 हजार 671 लोगों के शराब पीने, बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. 2025 में 1 लाख 25 हजार 456 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. 76 हजार लोगों को शराब पीने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है तो 48 हजार अन्य लोग हैं. इनमें शराब बेचने वाले, उनके सहयोगी भी शामिल हैं.

हालांकि बिहार पुलिस अब इन तस्करों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू कर रही है. 2025 में पुलिस ने 289 ऐसे लोगों को चिन्हित किया था, जिनकी संपत्ति जब्त की जानी है. इनमें 132 लोगों की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है.
2016 से लागू शराबबंदी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था "दूरदर्शिता की कमी"
बिहार में 2016 में शराबबंदी की गई थी. उसके बाद से इसकी आलोचना होती रही. एनडीए में शामिल घटक दलों ने, खासकर जीतन राम मांझी ने कई बार शराबबंदी खत्म करने की मांग की है. दिसंबर 2020 में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने कहा था कि यह कानून दूरदर्शिता की कमी के साथ लाया गया था.

2022 में शराबबंदी कानून में संशोधन किया गया. पहले अगर कोई व्यक्ति शराब पीकर पहली बार पकड़ा जाता था तो उसे जेल भेजा जाता था. नए कानून के मुताबिक मजिस्ट्रेट के पास जुर्माना भर कर वह छूट सकता है. हालांकि यह अधिकार मजिस्ट्रेट के पास है कि वे इस पर क्या फैसला करते हैं.
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