पटना के टॉप-10 अपराधियों में शामिल और 25 हजार रुपए के इनामी बदमाश संजय कुमार उर्फ संतोष यादव उर्फ संतोष डॉन करोड़ों की संपत्ति का निकला है. उसके ठिकानों पर EOU ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की. खुसरूपुर प्रखंड के प्रमुख पति व सुकरबेगचक पंचायत के पैक्स अध्यक्ष के ठिकानों सहित नालंदा और पटना के लगभग 25 ठिकानों पर EOU की टीमों ने एक साथ दबिश दी है. इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. STF की भारी तैनाती के बीच EOU की अलग-अलग टीमों ने संतोष डॉन के मुख्य आवास, जगमालबीघा, सुकरबेगचक, मुस्तफापुर, चौड़ा फिर बाढ़ अनुमंडल के टेका बीघा और नालंदा जिले के खिदरचक स्थित ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की.
2025 में पुलिस को चकमा देकर भाग गया था संतोष डॉन
लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों और भूमि विवादों में संलिप्त संतोष डॉन को बिहार पुलिस ने 2026 में पटना जिले के टॉप-10 अपराधियों की सूची में डाला था. इससे पहले दिसंबर 2025 में भी खुसरूपुर थाना पुलिस ने उसके पचरुखिया आवास पर छापेमारी की थी, जहां से दो राइफलें बरामद हुई थीं और उसके दो अंगरक्षकों को हिरासत में लिया गया था.
केवल खुसरूपुर थाने संतोष डॉन पर 14 मामले दर्ज
अकेले खुसरूपुर थाने में ही उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, रंगदारी और अपहरण के करीब 14 मामले दर्ज हैं. साल 2015 से ही उसपर सरकारी कर्मचारियों पर हमला और फिरौती के लिए अपहरण जैसे बेहद संवेदनशील मामले दर्ज हुए हैं. साल 2023 और 2024 में भी उसके खिलाफ जानलेवा हमले और पुलिस ड्यूटी में बाधा डालने का मामला दर्ज हुआ था.
रंगदारी, लूट, हत्या, जबरन जमीन कब्जाने का आरोप
अवैध हथियारों के धड़ल्ले से इस्तेमाल के कारण उस पर आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हैं. संतोष डॉन फर्जी दस्तावेज तैयार कर, आपराधिक बल प्रयोग कर भूमि पर अवैध कब्जा करने, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से रंगदारी, लूट, अपहरण, हत्या का प्रयास एवं आर्म्स एक्ट सहित कई दर्जनों घटनाओं में संलिप्त रहा है.
साढ़े 7 कट्ठा से करोड़ों की संपत्ति का मालिक बना संतोष डॉन
वह एक संगठित आपराधिक गिरोह बनाकर विगत 11 वर्षों में बड़े पैमाने पर परिसंपत्तियां अर्जित कर रहा था. कुख्यात अपराधी संतोष डॉन वर्ष 2015 में अपराध जगत में आया था. वर्ष 2017 से 2025 के बीच उसने करोड़ों रुपये मूल्य की अपराधजनित परिसंपत्ति अपने और अपने परिजनों के नाम से निबंधित कराई. वर्ष 2015 के पूर्व इसे मात्र 7 कट्ठा जमीन पैतृक संपत्ति के रूप में प्राप्त थी.
कई थानों मे कुल 30 आपराधिक मामले दर्ज
संतोष डॉन के विरुद्ध फतुहा, खुसरूपुर (पटना), भागनबिगहा, सोहसराय, रहुई (नालंदा) आदि थानों में कुल 30 आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें रंगदारी, हत्या के प्रयास, चोरी, लूटपाट, आर्म्स एक्ट आदि धाराएं शामिल हैं. संतोष डॉन द्वारा चलाए जा रहे संगठित गिरोह में शामिल इसके सहित कुल 26 व्यक्तियों के विरुद्ध आर्थिक अपराध थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है.
जमीन कब्जाने के लिए रोड एक्सीडेंट करवाता था संतोष डॉन
इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद खौफनाक था. जांच में बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि संतोष जमीन मालिकों को डराने के लिए उनका 'रोड एक्सीडेंट' करवा देता था और फिर उनकी जमीन पर कब्जा कर लेता था.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक वाकया संतोष डॉन की नजर रविता देवी नामक महिला की एक कीमती जमीन पर थी. जब महिला ने अपनी जमीन सौंपने से साफ इनकार कर दिया, तो दो साल पहले बबूरबन्ना में उसके पति और बेटे को एक वाहन से बेरहमी से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया था. उस वक्त किसी भी पुख्ता सबूत के न मिलने के कारण पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड को एक साधारण सड़क दुर्घटना मानकर केस बंद कर दिया था.
इस खौफनाक साजिश का अंत यहीं नहीं हुआ. जब पीड़ित महिला को न्याय दिलाने और उसकी मदद करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि सतीश कुमार आगे आए, तो उन्हें भी रास्ते से हटाने की कोशिश की गई. संतोष डॉन के गुर्गों ने खिदरचक गांव के पास दोपहर के समय एक बिना नंबर प्लेट के ट्रक से सतीश कुमार की गाड़ी में सीधी और जोरदार टक्कर मार दी. इस जानलेवा हमले में जनप्रतिनिधि गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन खुशकिस्मती से उनकी जान बच गई थी.
जो जमीन देने में आनाकानी करता उसे कानूनी पचड़े में लपेटता था
वहीं इंडस्ट्रियल एरिया में यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन बेचने की बात करता, तो यह गिरोह उसके फर्जी कागजात बनाकर अपने गुर्गों के जरिए कोर्ट में टाइटल सूट दायर करवा देता था. इस कानूनी पचड़े और डर के मारे दबाव में आकर जमीन मालिक या तो उससे समझौता कर लेते थे या बेहद कम कीमत पर अपनी जमीन उसे बेच देते थे.
खुद संतोष डॉन के नाम पर 4 करोड़ से अधिक के जमीन
कागजातों की जांच में सामने आया है कि संतोष डॉन ने स्वयं अपने नाम पर कुल 22 परिसंपत्तियां नालंदा एवं पटना के विभिन्न निबंधन कार्यालयों जैसे ग्राम-इमामगंज, सिकंदरपुर, तूफानगंज, सुकरबेगचक, कटौना, हरदासबीघा, कासिमपुर, भूसकी, छोटकी नवादा एवं बैकटपुर आदि में निबंधित कराई हैं, जिनका निबंधन मूल्य करीब 4,43,55,800 रुपए है.
मां के नाम पर 3.35 करोड़ तो पत्नी के नाम 1.30 करोड़ के जमीन
उसने अपनी मां लालती देवी के नाम पर करीब 3,35,54,000 रुपये मूल्य की कुल 23 परिसंपत्तियां, प्रखंड प्रमुख व पत्नी अंजू देवी के नाम पर करीब 1,30,77,000 रुपये मूल्य की कुल 9 परिसंपत्तियां, सास मानो देवी के नाम पर करीब 83,45,000 रुपये मूल्य की कुल 4 परिसंपत्तियां और भाई बाल्मीकी यादव एवं उसकी पत्नी रिंकू देवी के नाम करीब 1,15,00,000 रुपये की परिसंपत्ति निबंधित कराई है.
8 करीबी सहयोगियों की संपत्तियां
इस प्रकार कुल लगभग 11.50 करोड़ की संपत्ति पाई गई है. इसके अलावा उसके 8 करीबी सहयोगियों मिक्कु कुमार, कर्मवीर, रौशन कुमार, रंजीत सिंह, बिट्टु कुमार, सत्य प्रकाश, संजीव कुमार, दिलीप कुमार आदि के नाम पर कुल 1,79,29,000 रुपये की 17 परिसंपत्तियां निबंधित पाई गई हैं.
फॉर्च्यूनर, स्कॉर्पियो सहित कई लग्जरी गाड़ियां
तलाशी के दौरान मुख्य अभियुक्त संतोष डॉन के घर से 5,60,000 रुपए नकद, जमीन एग्रीमेंट के पेपर, निवेश के कागजात, एक स्कॉर्पियो (GJ15BB2181), एक फॉर्च्यूनर (BR01PH0747) एवं एक महिंद्रा जीप (BR01BF9357) बरामद हुई. इसके अलावा अभियुक्त सत्यप्रकाश के घर से 2 लाख रुपये नकद, जमीन निबंधन के 14 कागजात, 7 एग्रीमेंट पेपर; अभियुक्त दिलीप कुमार के घर से 15,50,000 रुपये नकद व दो दस्तावेज; अभियुक्त रंजीत सिंह के घर से 3,97,000 रुपये नकद, 13 दस्तावेज व चार एग्रीमेंट पेपर और अभियुक्त ललेन्द्र कुमार उर्फ नरेन्द्र कुमार के घर से एक स्कॉर्पियो (BR01KC5322) बरामद हुई है. इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अब तक कुल 4 अभियुक्तों राकेश साहु, रंजीत सिंह, शशिभूषण कुमार और रविन्द्र कुमार की गिरफ्तारी सुनिश्चित की है.
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