भारत के कई एथलीट आए और गए, लेकिन कोई भी कॉमनवेल्थ गेम्स में ट्रैक एंड फील्ड में दो गोल्ड मेडल नहीं जीत सका. अब यह इंतजार खत्म करने की जिम्मेदारी नीरज चोपड़ा के कंधों पर है. ग्लासगो में होने वाले पुरुषों के जैवलिन थ्रो फाइनल में अगर नीरज गोल्ड जीतते हैं तो वह सिर्फ अपना दूसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड नहीं जीतेंगे, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में ऐसा कारनामा करने वाले पहले खिलाड़ी भी बन जाएंगे. पुरुष जैवलिन थ्रो का फाइनल मुकाबला 31 जुलाई देर रात यानी 1 अगस्त को 12:45 बजे (भारतीय समयानुसार) पर शुरू होगा.
इतिहास रचने से सिर्फ एक जीत दूर
कॉमनवेल्थ गेम्स 1958 से अब तक भारतीय एथलेटिक्स ने कुल छह गोल्ड मेडल जीते हैं, लेकिन कोई भी भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट दो बार चैंपियन नहीं बन पाया. नीरज चोपड़ा ने 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था. अब अगर वह ग्लासगो 2026 में भी गोल्ड जीत लेते हैं तो वे कॉमनवेल्थ गेम्स में दो गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बन जाएंगे. इतना ही नहीं, वह एक से ज्यादा कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने वाले पहले एशियाई जैवलिन थ्रोअर भी होंगे.
नीरज ने फाइनल में पहुंचकर बढ़ाई उम्मीद
नीरज चोपड़ा ने पुरुषों के जैवलिन थ्रो क्वालीफिकेशन में 79.61 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हुए फाइनल में जगह बनाई. उनके साथ रोहित यादव (78.37 मीटर) और यशवीर सिंह (78.36 मीटर) ने भी मेडल राउंड के लिए क्वालिफाई किया, जिससे भारत की पदक उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं.
नीरज ने बताया क्यों मुश्किल रहा क्वालीफिकेशन?
फाइनल में पहुंचने के बाद नीरज ने बताया कि उनका लक्ष्य लंबी दूरी का थ्रो करना नहीं, बल्कि सुरक्षित तरीके से फाइनल में पहुंचना था. उन्होंने कहा कि ग्लासगो में ठंड और बदलती हवा की दिशा की वजह से जैवलिन थ्रो करना बेहद चुनौतीपूर्ण था. यही वजह रही कि कोई भी खिलाड़ी ऑटोमैटिक क्वालिफाइंग मार्क हासिल नहीं कर सका.
फाइनल को लेकर क्या बोले नीरज?
नीरज ने माना कि फाइनल बेहद कड़ा होने वाला है क्योंकि इसमें दुनिया के कई शीर्ष जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक पदक विजेता शामिल हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर मौसम साथ देता है तो दर्शकों को शानदार मुकाबला देखने को मिलेगा.
अपने खर्च पर नीरज का मार्गदर्शन कर रहे कोच
दरअसल, नीरज चोपड़ा के निजी कोच जयवीर चौधरी ग्लास्गो के स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में राष्ट्रमंडल खेलों के पुरुष भाला फेंक क्वालीफिकेशन राउंड के दौरान अपने शिष्य का मार्गदर्शन करते नजर आए. जयवीर भारतीय दल का आधिकारिक हिस्सा नहीं थे इसलिए वह अपने खर्च पर यहां पहुंचे. नीरज की अगुआई वाले 32 सदस्यीय भारतीय एथलेटिक्स दल के साथ पांच कोच, दो फिजियोथेरेपिस्ट, एक डॉक्टर और दो अन्य चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल थे। खेल मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त इस सहयोगी स्टाफ का नेतृत्व मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर कर रहे थे, लेकिन जयवीर चौधरी का नाम इस सूची में शामिल नहीं था.
हालांकि भारतीय दल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नीरज के शुरुआती कोच रहे जयवीर चौधरी अपने खर्च पर ग्लास्गो पहुंचे. वह स्विट्जरलैंड के बिएन शहर से यहां आए, जहां राष्ट्रमंडल खेलों से पहले नीरज प्रशिक्षण ले रहे थे. क्वालीफिकेशन मुकाबले के दौरान जयवीर को मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर के साथ कोचों के लिए निर्धारित क्षेत्र में बैठा देखा गया. यह स्थान उस ‘रन-अप' क्षेत्र के पास था, जहां से भाला फेंक खिलाड़ी अपने प्रयास शुरू कर रहे थे. नीरज के साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह ने पुरुष भाला फेंक फाइनल में जगह बनाई.
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