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टूटे हैंडल, फटे टायर; गोपालगंज की जिस दिव्यांग लड़की को दी थी ट्राइसाइकिल, उसके साथ हो गया भद्दा मजाक

Gopalganj Viral School Girl:

टूटे हैंडल, फटे टायर; गोपालगंज की जिस दिव्यांग लड़की को दी थी ट्राइसाइकिल, उसके साथ हो गया भद्दा मजाक
gopalganj viral school girl
  • सोशल मीडिया पर सोनी का वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने बिहार सरकार से उसकी मदद में ट्राइसाइकिल की मांग की थी
  • गोपालगंज जिला प्रशासन ने सोनी को ट्राइसाइकिल दी, लेकिन वह टूटी-फूटी और सेकेंड हैंड जैसी निकली
  • सोनी का हौसला अभी भी कायम है, वह ट्राइसाइकिल न मिलने पर भी स्कूल जाना नहीं छोड़ेगी और डॉक्टर बनना चाहती है
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गोपालगंज:

पढ़ने के हौसले और दो किलोमीटर का पैदल सफर. दिव्यांग होने के बाद भी बिहार के गोपालगंज की इस बच्ची ने हौसला नहीं हारा और रोज स्कूल पढ़ने वह ऐसे ही पैदल जाती थी. सोशल मीडिया पर एक दिन किसी ने बच्ची का वीडियो वायरल कर दिया.लोगों की नजर पड़ी,सबने बिहार सरकार से एक ट्राइसाइकिल की डिमांड कर दी. गोपालगंज जिला प्रशासन ने यहीं गलती कर दी. ट्राइसाइकिल तो दी पर टूटी, सेकेंड हैंड जैसी. बच्ची के साथ ऐसा मजाक देख अब लोग भी गुस्से में हैं क्योंकि टूटी ट्राइसाइकिल की तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं. 

पिता का उठ गया साया,मां कर रही देखभाल 

गोपालगंज की ये कहानी उन दूसरे बच्चों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं जो अच्छे संसाधन होने के बावजूद स्कूल जाने से कतराते हैं. गोपालगंज की इस 15 साल की मासूम बच्ची की पढ़ाई के प्रति ललक और स्कूल जाने का संघर्ष हर किसी को हैरान कर देगा. हम बात कर रहे हैं उसी मासूम बच्ची की जो दोनों पैरों से दिव्यांग है,हाल ही में उसका सोशल मीडिया पर स्कूल जाता वीडियो खूब वायरल हुआ था. 15 साल की सोनी कुमारी गोपालगंज के भोरे प्रखंड के हुस्सेपुर गांव की रहने वाली है. सोनी के पिता नंदकिशोर राम की जन्म के बाद ही मौत हो गई थी. सोनी कुमारी की मां गुलाइची देवी बचपन से अपनी दिव्यांग बेटी को पालपोस रही है.

मां गुलाइची देवी के मुताबिक, वह बचपन से दोनों पैरों से दिव्यांग है. उनके पास इतने पैसे भी नहीं है कि वे अपनी बच्ची का इलाज करा सके. गुलाइची देवी कहती है कि वे गरीब हैं. घर का खर्चा भी मुश्किल से चल पाता है. ऐसे में वे अपनी बच्ची का इलाज कराए या फिर अपना परिवार चलाए.गुलाइची देवी ने अपनी बेटी का दाखिला अपने गांव के पास में ही पब्लिक स्कूल में कराया है. इस स्कूल की दूरी उनके गांव से करीब दो किलोमीटर है.

प्रशासन ने कर दी भारी चूक

हालांकि सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. इस योजनाओं में ट्राइसाइकिल भी शामिल है. जो दिव्यांगों को मुफ्त में उपलब्ध कराए जाती हैं, लेकिन उनकी बेटी को यह ट्राइसाइकिल भी मयस्सर न हो सकी. अब सोनी कुमारी की खबर जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुई वैसे ही उसकी मदद के लिए जगह-जगह से लोग सामने आने लगे. कुमार विश्वास से लेकर सोनू सूद तक और अन्य सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी उसे मदद की पेशकश की. गोपालगंज जिला प्रशासन ने दिव्यांग सोनी कुमारी को आनन-फानन में ट्राई साइकिल भी भेंट कर दी. जिला प्रशासन की ओर से ट्राई साइकिल भेंट करने की यह तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर भी की गई. इस दौरान मदद के साथ तत्काल ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के बाद प्रशासन ने खूब वाहवाही भी लूटी, लेकिन अब जिला प्रशासन की यही मदद उसके लिए गले की फांस बन गई है.
 

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ऐसी ट्राइसाइकिल का क्या करेगी बच्ची?

दरअसल सोनी कुमारी का अब एक नया वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है,जिसमें साफ देखा जा सकता है कि जिस ट्राईसाइकिल को गोपालगंज जिला प्रशासन ने दी थी वह तीन से चार दिन में ही डैमेज हो गई यानी कि वह अब इस्तेमाल करने के लायक नहीं है.उसके टायर पुराने थे जो फटने लगे हैं.उसमें हवा भरकर चलाना संभव नहीं है.इस साइकिल का हैंडल भी टूट चुका है. जिला प्रशासन की ऐसी मदद के बाद परिवार में मायूसी का माहौल है.

इस मामले में जब सोनी कुमारी और उसकी मां गुलाईची देवी से बात की गई तो उन्होंने बताया था कि स्थानीय अधिकारी उन्हें यह ट्राईसाइकिल तीन दिन पहले भेंट करके गए थे. तब उन्हें उम्मीद जगी थी उनकी बेटी अब इस ट्राईसाइकिल से आराम से स्कूल पढ़ने जा सकती है. उसे जगह-जगह से मदद भी मिली थी, लेकिन अब यह ट्राईसाइकिल किसी काम का नहीं है.गुलाइची देवी को इस मदद से मायूसी है.

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इतने पर भी नहीं टूटा लड़की का हौसला

दिव्यांग सोनी का हौसला अभी भी बरकरार है.उसका कहना है कि ट्राईसाइकिल नहीं भी मिले तो वह स्कूल जाना नहीं छोड़ेगी. वह पढ़कर डॉक्टर बनना चाहती है. वह अपने गांव समाज में ही रखकर समाज सेवा करेगी. हालांकि इस मामले में जब गोपालगंज के डीएम पवन कुमार सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो वे फोन पर उपलब्ध नहीं हो सके. वाट्सऐप पर भी सवाल भेजा गया था. लेकिन डीएम और डीपीआरओ की ओर से अबतक इस मामले में कोई जवाब नहीं मिला है.
 

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