Bihar News: बिहार पुलिस के DGP विनय कुमार ने हाल ही में राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिस बल की कार्यशैली को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं हैं, जो विभाग और समाज के लिए चेतावनी हैं. उन्होंने साफ़ कहा कि वर्दी और पिस्तौल मिलने का मतलब 'अहंकार' नहीं है, बल्कि जनता की सेवा है. साथ ही उन्होंने पुलिस अफसरों पर भी जमकर निशाना साधा है.
युवाओं में बढ़ता 'गैंग कल्चर'
डीजीपी ने मोतिहारी में छात्र की हत्या पर गहरा दुख जताया. उन्होंने बताया कि आज के युवा 10-15 लड़कों का गुट बनाकर सोशल मीडिया पर अपना प्रचार कर रहे हैं. आपसी रंजिश और महिला मित्र को लेकर होने वाले विवाद अब जानलेवा साबित हो रहे हैं. उन्होंने अभिभावकों को आगाह किया कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें, क्योंकि यह सिर्फ पुलिस की नहीं, बल्कि माता-पिता की भी बड़ी जिम्मेदारी है.
अपनी संवेदना खो रहा है समाज
डीजीपी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि पहले गैंगरेप जैसी घटनाएं दुर्लभ होती थीं और पूरा जिला दहल जाता था. लेकिन आज ऐसी घटनाएं हर 3-4 दिनों में सामने आ रही हैं. यौन उत्पीड़न के केवल 2 प्रतिशत मामले ही दर्ज हो पाते हैं और बाकी दबा दिए जाते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में महिला अपराध कम हैं, लेकिन स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है.
पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार
डीजीपी ने उन पुलिसकर्मियों को सख्त चेतावनी दी जो केवल वेतन के लिए नौकरी कर रहे हैं. उन्होंने कहा महिला पुलिस पदाधिकारी अक्सर जनता से रूखा व्यवहार करती हैं, उन्हें सबसे सॉफ्ट होकर बात करनी चाहिए. मोतिहारी में पीड़ित से गाड़ी और पैसे मांगने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है.
डीजीपी ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे पुलिसकर्मियों को 'डूब मरना चाहिए'. दानापुर की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 10 साल से गवाही नहीं हुई है. केस का अनुसंधान और समय पर गवाही सुनिश्चित करना पुलिस का काम है.
दहेज और दोहरी शादी पर सख्त रुख
जहानाबाद में 50 लाख दहेज लेकर शादी से मुकरने और सीतामढ़ी में दरोगा द्वारा दूसरी शादी करने जैसे मामलों पर डीजीपी ने नाराजगी जताई. उन्होंने सीतामढ़ी एसपी की नरमी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए.
महिला पुलिस की बढ़ती ताकत
अच्छी बात यह है कि 2013 के बाद से पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है. आज करीब 30 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मी बल में शामिल हैं और हर थाने में महिला हेल्प डेस्क काम कर रही है. डीजीपी ने महिला थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे केवल 'टाइम पास' न करें बल्कि क्षेत्र में जाकर लोगों से संवाद करें.
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