बिहार विधानसभा में पेश किए गए राज्य बजट के बाद प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है. बजट में कई अहम विभागों के आवंटन में अपेक्षित बढ़ोतरी न होने और कुछ क्षेत्रों में हिस्सेदारी घटने के आरोपों के बीच आज विपक्ष ने विधानसभा के भीतर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. बजट सत्र के दौरान विपक्षी विधायकों ने सदन में नारेबाजी की, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और इस बजट को जनविरोधी बताते हुए कार्यवाही बाधित की. इससे साफ हो गया है कि बजट अब सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है.
विपक्षी दलों का कहना है कि इस बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और सामाजिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की अनदेखी की गई है. उनका आरोप है कि कई विभागों को पिछले साल की तुलना में कम प्राथमिकता मिली है, जिसे वे सीधी कटौती मान रहे हैं. विपक्ष का तर्क है कि अगर बजट का असर आम आदमी की जिंदगी में सुधार के रूप में नहीं दिखता, तो ऐसे बजट का कोई मतलब नहीं रह जाता. इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने आज विधानसभा के भीतर आक्रामक रुख अपनाया.
कृषि क्षेत्र को लेकर विपक्ष खास तौर पर सरकार पर हमलावर है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि बिहार की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए बजट में ठोस कदम नहीं उठाए गए. सिंचाई, फसल बीमा, कृषि आधारभूत ढांचे और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े प्रावधानों को विपक्ष नाकाफी बता रहा है. आज के विरोध प्रदर्शन के दौरान भी कई विधायकों ने किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा और कहा कि यह बजट गांव और किसान दोनों के साथ अन्याय है.
स्वास्थ्य और शिक्षा के मुद्दे पर भी विपक्ष ने सदन में सरकार को कटघरे में खड़ा किया. विपक्ष का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी पहले से ही गंभीर समस्या है. ऐसे में स्वास्थ्य बजट में अपेक्षित बढ़ोतरी न होना चिंता का विषय है. शिक्षा को लेकर विपक्ष का आरोप है कि स्कूलों और कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की नियुक्ति और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. आज के विरोध के दौरान इन मुद्दों को बार-बार उठाया गया.
सामाजिक कल्याण योजनाओं को लेकर भी विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा. दलित, पिछड़े, अति पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए चलने वाली योजनाओं के बजट पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने कहा कि सामाजिक न्याय की बातें सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गई हैं. विपक्ष का आरोप है कि कमजोर वर्गों के लिए बजट में पर्याप्त धन नहीं होने से इन योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पाएगा. इसी को लेकर आज सदन में विपक्षी विधायकों ने सरकार से जवाब मांगा.
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बजट में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है. सरकार का कहना है कि बजट का कुल आकार बढ़ा है और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकताओं का पुनर्गठन किया गया है. सरकार के मुताबिक, पूंजीगत खर्च और बुनियादी ढांचे पर जोर देकर राज्य के दीर्घकालिक विकास की नींव रखी जा रही है. सरकार ने यह भी कहा कि सिर्फ बजट की राशि नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन से विकास तय होता है.
हालांकि विपक्ष सरकार के इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिख रहा है. विपक्ष का कहना है कि सरकार आंकड़ों के जरिए सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है. विपक्षी नेताओं ने आज सदन में कहा कि अगर बजट वास्तव में जनहित में होता, तो उसे लेकर इतनी नाराजगी और विरोध देखने को नहीं मिलता. उनका कहना है कि बजट का असली चेहरा तब सामने आएगा, जब इसके प्रभाव से आम जनता को राहत नहीं मिलेगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आज का विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि विपक्ष बजट के मुद्दे को आने वाले दिनों में और आक्रामक तरीके से उठाएगा. विधानसभा के भीतर हंगामा, बाहर प्रेस वार्ताएं और जनसभाओं के जरिए सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जा रही है. खासकर चुनावी माहौल को देखते हुए विपक्ष इस मुद्दे को लंबे समय तक जिंदा रखना चाहता है.
कुल मिलाकर बिहार का बजट अब केवल वित्तीय नीति का दस्तावेज नहीं रह गया है. यह सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी लड़ाई का केंद्र बन गया है. आज विधानसभा के भीतर हुए विरोध प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि बजट पर टकराव अभी थमने वाला नहीं है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार अपने बचाव में कौन से कदम उठाती है और विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच कितनी मजबूती से ले जा पाता है.
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