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बिहार बजट 2026 में किसका पलड़ा भारी? भाजपा या जेडीयू? आप भी जान लीजिए

पुलिस को बेहतर साधन देने, महिलाओं की सुरक्षा, और अपराध पर काबू पाने के लिए ज्यादा पैसा रखा गया है. 2025-26 में यह विभाग रोजमर्रा के प्रशासन तक सीमित था, लेकिन अब इसे ज्यादा मजबूत और आधुनिक बनाने की कोशिश दिखती है. यह भाजपा की कानून और व्यवस्था वाली सोच को दर्शाता है.

बिहार बजट 2026 में किसका पलड़ा भारी? भाजपा या जेडीयू? आप भी जान लीजिए
बिहार सरकार के बजट में किसका दिखा 'पावर'
NDTV
  • बिहार सरकार के बजट में जदयू के विभागों को शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और कृषि में विशेष ध्यान दिया गया है
  • जदयू के विभागों में 2026-27 के बजट में सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और डिजिटल शिक्षा पर जोर दिया गया है
  • गृह विभाग में पुलिस सुधार, महिलाओं की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए बजट में वृद्धि की गई है
पटना:

बिहार सरकार के 2026-27 के बजट की तुलना जब 2025-26 के बजट से की जाती है और साथ ही यह देखा जाता है कि कौन से विभाग भाजपा और कौन से विभाग जदयू के पास हैं, तो यह साफ दिखाई देता है कि दोनों दलों की सोच और प्राथमिकताएँ अलग-अलग हैं. बजट में हुई कुल बढ़ोतरी से दोनों पार्टियों को अपने-अपने विभागों में ज्यादा पैसा खर्च करने का मौका मिला है.जदयू के पास जो विभाग रहे हैं, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, कृषि और सामाजिक कल्याण, उनमें दोनों वर्षों में लगातार ध्यान दिया गया है. 2025-26 में इन विभागों का मुख्य काम था पहले से चल रही योजनाओं को ठीक से चलाना, जैसे स्कूल, अस्पताल, गांवों की योजनाएं और गरीबों की मदद.

2026-27 में इन्हीं विभागों में थोड़ा ज्यादा पैसा दिया गया है ताकि सेवाओं की गुणवत्ता सुधरे. शिक्षा में अब केवल स्कूल खोलने पर ही नहीं, बल्कि पढ़ाई को बेहतर बनाने, डिजिटल शिक्षा और बच्चों को काम के लायक बनाने पर जोर दिया गया है. इससे लगता है कि जदयू समाज से जुड़े क्षेत्रों को अपनी राजनीति का मुख्य आधार मानती है.स्वास्थ्य विभाग में भी यही फर्क दिखता है. 2025-26 में सरकार का ध्यान दवाइयों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामान्य इलाज पर था. 2026-27 में अस्पतालों को बेहतर बनाने, नए मेडिकल कॉलेज खोलने और गांवों में इलाज की सुविधा बढ़ाने के लिए ज्यादा पैसा रखा गया है.

इससे साफ है कि जदयू स्वास्थ्य को लोगों की बुनियादी जरूरत मानकर आगे बढ़ रही है.ग्रामीण विकास और कृषि विभागों में 2026-27 का बजट 2025-26 से ज्यादा असरदार लगता है. पहले गांवों में काम और सहायता देने पर ध्यान था, अब किसानों की आमदनी बढ़ाने, सिंचाई सुधारने और गांवों की सड़कों व सुविधाओं को मजबूत करने पर ज्यादा जोर दिया गया है. यह जदयू की ग्रामीण और गरीब वर्ग से जुड़ी राजनीति को दिखाता है.

भाजपा के पास जो विभाग रहे हैं, जैसे सड़क निर्माण, शहरी विकास, गृह विभाग और ऊर्जा, उनमें 2026-27 के बजट में ज्यादा तेजी से पैसा बढ़ाया गया है. 2025-26 में इन विभागों में सामान्य कामकाज चलाने जितना ही खर्च था, लेकिन 2026-27 में बड़ी सड़कों, पुलों और शहरों की सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान दिया गया है. इससे साफ होता है कि भाजपा विकास को दिखने वाली चीजों, जैसे सड़क और शहर, से जोड़कर देखती है.गृह विभाग में भी 2026-27 में ज्यादा खर्च किया गया है.

पुलिस को बेहतर साधन देने, महिलाओं की सुरक्षा, और अपराध पर काबू पाने के लिए ज्यादा पैसा रखा गया है. 2025-26 में यह विभाग रोजमर्रा के प्रशासन तक सीमित था, लेकिन अब इसे ज्यादा मजबूत और आधुनिक बनाने की कोशिश दिखती है. यह भाजपा की कानून और व्यवस्था वाली सोच को दर्शाता है.ऊर्जा विभाग में भी बदलाव दिखता है. 2025-26 में बिजली सप्लाई बनाए रखना ही मुख्य लक्ष्य था. 2026-27 में गांव और शहर दोनों जगह बेहतर बिजली, कम कटौती और उद्योगों के लिए बिजली पर ज्यादा ध्यान दिया गया है.

इससे व्यापार और रोजगार बढ़ाने में मदद मिल सकती है. कुल मिलाकर देखा जाए तो 2026-27 का बजट, 2025-26 की तुलना में ज्यादा सक्रिय और आगे देखने वाला बजट है. जदयू के विभागों में लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और गांवों के विकास पर लगातार ध्यान दिया गया है. वहीं भाजपा के विभागों में सड़क, शहर, बिजली और सुरक्षा जैसे कामों पर ज्यादा पैसा लगाया गया है. यह बजट दिखाता है कि बिहार में सरकार सामाजिक जरूरतों और भौतिक विकास, दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है.

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