- बाराबंकी में वकीलों ने सहकर्मी के कार्यालय में घुसकर फर्नीचर तोड़ा. SC ने इसे गुंडागर्दी बताया.
- विवाद टोल टैक्स भुगतान से शुरू हुआ था जिसमें वकील और टोल कर्मचारियों के बीच झड़प हुई और वकीलों ने विरोध किया.
- SC ने वकील मनोज शुक्ला की तारीफ की जिन्होंने दबाव के बावजूद टोल कर्मचारियों की जमानत याचिका दायर की.
बाराबंकी में वकीलों द्वारा एक सहकर्मी के दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी करने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने इसे 'गुंडागर्दी' बताते हुए कहा कि यह कानूनी पेशे की प्रतिष्ठा को कलंकित करता है. यह मामला उस विवाद से जुड़ा है जिसमें टोल टैक्स देने से मना करने पर एक वकील और टोल प्लाजा कर्मचारियों के बीच झड़प हुई थी. इसके बाद बाराबंकी के वकीलों ने एक प्रस्ताव पारित कर दिया कि कोई भी वकील टोल कर्मचारियों का केस नहीं लड़ेगा.
क्या हुआ था?
14 जनवरी 2026 को वकील रत्नेश शुक्ला और टोल कर्मचारियों के बीच बहस हुई, जिसमें वकील पर हमला होने का आरोप लगा. वकीलों ने टोल कर्मियों के खिलाफ विरोध शुरू किया और बाद में एक अनौपचारिक प्रस्ताव जारी कर दिया कि कोई वकील उनका पक्ष नहीं लेगा. जब वकील मनोज शुक्ला ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए टोल कर्मचारियों की जमानत याचिका दायर की, तो दूसरे वकीलों ने कथित रूप से उनके ऑफिस में घुसकर फर्नीचर तोड़ा, आग लगाई और उनका पुतला जलाया.
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सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा, 'बाराबंकी बार एसोसिएशन के सदस्यों का व्यवहार बेहद दुखद और शर्मनाक है… यह वकालत का पेशा नहीं, खुलेआम हूलिगनिज्म (गुंडागर्दी) है.'
अदालत ने कहा कि यह घटनाक्रम कानूनी पेशे की गिरती स्थिति को दर्शाता है. वकीलों के फ्रेटरनिटी के नाम पर ऐसी हिंसा कभी भी स्वीकार्य नहीं हो सकती. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मनोज शुक्ला जैसे 'बहादुर वकील' की तारीफ की, जिन्होंने दबाव के बावजूद केस लड़ा.
टोल कर्मियों को जमानत, सुरक्षा देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने टोल प्लाजा कर्मचारियों को जमानत मंजूर की. यूपी के डीजीपी को आदेश दिया कि वे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें और उन्हें सुरक्षित स्थान तक ले जाएं.
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केस यूपी से दिल्ली ट्रांसफर
हिंसा के माहौल और स्थानीय वकीलों द्वारा केस न लेने की स्थिति को देखते हुए, अदालत ने पूरी कार्रवाई यूपी से हटाकर दिल्ली ट्रांसफर कर दी. अदालत ने कहा कि टोल कर्मचारियों का कानूनी अधिकार छिन गया था, क्योंकि कोई भी वकील उनके पक्ष में खड़ा होने को तैयार नहीं था.
UP बार काउंसिल को भी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यूपी बार काउंसिल ने भी मामले में दखल दिया और राज्य सरकार से NSA लगाने की अनुचित मांग कर डाली. जबकि मामला सिर्फ एक छोटी झड़प का था. अदालत ने उम्मीद जताई कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) इस घटना पर आवश्यक कार्रवाई करेगा.
दरअसल इस मामले ने तूल तब पकड़ा जब टोल कर्मियों ने हाई कोर्ट के वकील से टोल के पैसे मांगे और उसने टोल देने से इनकार किया, जिससे विवाद बढ़ा. उन पर हमला करने का मामला दर्ज हुआ और उन्हें 16 जनवरी को न्यायिक हिरासत भेजा गया. स्थानीय वकीलों के प्रदर्शन और मनोज शुक्ला के खिलाफ हिंसा के बाद टोल कर्मियों ने सुप्रीम कोर्ट में केस ट्रांसफर और सुरक्षा की मांग की थी.
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