- प्रचार के अंतिम दो दिनों में बांकीपुर की सड़कों पर लगातार रोड शो और जनसंपर्क अभियान चले
- भाजपा के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है.
- प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है.
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार खत्म हो गया है. अब सभी उम्मीदवारों की किस्मत मतदाताओं के हाथ में है. इस बार यह चुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं है. यह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रतिष्ठा, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीतिक ताकत और बिहार की बदलती राजनीति की भी परीक्षा बन गया है. प्रचार के आखिरी दिनों में सभी बड़े नेताओं ने पूरी ताकत लगा दी. इससे साफ है कि इस सीट को सभी दल कितना महत्वपूर्ण मान रहे हैं.
प्रचार के अंतिम दो दिनों में बांकीपुर की सड़कों पर लगातार रोड शो और जनसंपर्क अभियान चले. भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने रोड शो किया. दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरे. उन्होंने कई जगह रोड शो और जनसंपर्क किया. लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान और भोजपुरी फिल्म अभिनेता पवन सिंह ने भी भाजपा के पक्ष में प्रचार किया. प्रचार के आखिरी दौर में सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत दिखाने की कोशिश की.
भाजपा के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल
भाजपा के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है. बांकीपुर को लंबे समय से भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है. नितिन नबीन कई बार यहां से विधायक चुने गए. उनके राज्यसभा जाने और भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह सीट खाली हुई. ऐसे में भाजपा किसी भी कीमत पर यह सीट अपने पास रखना चाहेगी. अगर भाजपा यह चुनाव जीतती है, तो यह उसके मजबूत संगठन और शहरी वोट बैंक की जीत मानी जाएगी.
दूसरी ओर प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है. उन्होंने पहली बार भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ में चुनाव लड़ने का फैसला किया है. अगर वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं या चुनाव को कड़ा मुकाबला बना देते हैं, तो बिहार की राजनीति में उनकी स्थिति और मजबूत होगी. इसलिए इस चुनाव पर पूरे राज्य की नजर है.
तेजस्वी यादव की भूमिका भी रही अहम
इस चुनाव में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की भूमिका भी अहम रही. छात्र आंदोलन के समय उनकी गैरमौजूदगी को लेकर भाजपा लगातार सवाल उठाती रही, लेकिन लौटने के बाद तेजस्वी यादव ने प्रचार की कमान संभाली. उन्होंने भाजपा पर लगातार हमला बोला और अपने समर्थकों को एकजुट करने की कोशिश की. प्रचार के आखिरी दिनों में उनकी सक्रियता से चुनाव में नया माहौल बना.
इस बार युवा मतदाता भी चर्चा में हैं. बांकीपुर में बड़ी संख्या में कॉलेज, विश्वविद्यालय और कोचिंग संस्थान हैं. इसलिए यहां युवाओं की संख्या काफी ज्यादा है. हाल के छात्र आंदोलन के बाद माना जा रहा है कि शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे कुछ युवाओं के मतदान को प्रभावित कर सकते हैं. हालांकि, यह देखना होगा कि आंदोलन का असर मतदान तक रहता है या नहीं.
जातीय और सामाजिक समीकरण रहेंगे महत्वपूर्ण
जातीय और सामाजिक समीकरण भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण रहेंगे. भाजपा अपने पुराने वोट बैंक, व्यापारी वर्ग, मध्यम वर्ग और मजबूत बूथ संगठन के भरोसे है. वहीं जन सुराज और दूसरे दल युवा मतदाताओं, नए वोटरों और बदलाव चाहने वाले लोगों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं. इस बार मतदान प्रतिशत भी अहम रहेगा. उपचुनाव में अक्सर मतदान कम होता है. अगर इस बार ज्यादा लोग वोट डालने निकलते हैं, तो इसका असर चुनाव के नतीजे पर पड़ सकता है. खासकर युवा मतदाताओं की भूमिका पर सभी की नजर रहेगी.
बांकीपुर का यह उपचुनाव सिर्फ एक विधायक चुनने का चुनाव नहीं है. यह भाजपा के गढ़ की परीक्षा है. यह प्रशांत किशोर की राजनीतिक ताकत की भी परीक्षा है. साथ ही यह भी पता चलेगा कि प्रचार के आखिरी दिनों में तेजस्वी यादव की सक्रियता का कितना असर हुआ. यही कारण है कि इस उपचुनाव पर सिर्फ पटना ही नहीं, पूरे बिहार की नजर लगी हुई है. इस चुनाव का नतीजा आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए बड़ा संदेश भी देगा.
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