
बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि पिछले 48 घंटों में बिहार में बिजली गिरने की घटनाओं में कम से कम 34 लोगों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए. सबसे ज़्यादा छह-छह मौतें नालंदा और वैशाली में हुईं, इसके बाद शेखपुरा (पाँच), पटना और औरंगाबाद (तीन-तीन), नवादा और बांका (दो-दो) में हुईं.
इसके अलावा, भोजपुर, भागलपुर, रोहतास, गयाजी, समस्तीपुर और जमुई ज़िलों में छह-छह मौतें हुईं.
CM नीतीश ने लोगों से की ये अपील
CM नीतीश ने लोगों से अपील की है कि सभी लोग खराब मौसम में पूरी सतर्कता बरतें. खराब मौसम होने पर वज्रपात से बचाव के लिये आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किये गये सुझावों का अनुपालन करें. खराब मौसम में घरों में रहें और सुरक्षित रहें.
किस घटना को कहते हैं बिजली गिरना?
मौसम वैज्ञानिकों और भौतिकविदों के मुताबिक बिजली गिरने की घटनाएं दो तरह की होती हैं. पहली बादल और जमीन क बीच और दूसरी बादलों के बीच.इस दौरान हाई वोल्टेज बिजली का प्रवाह होता है.इसके साथ एक तेज चमक या अक्सर गरज-कड़क के साथ बिजली गिरती है.दुनिया में बिजली गिरने का औसत प्रति सेकंड 50 का है. देश में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतें चिंता का कारण बनती जा रही हैं. विशेषज्ञ इस दिशा में कदम उठाने की अपील कर रहे हैं.
मैदानी इलाकों में तूफान और बिजली गिरने की संभावना
रिपोर्ट में कहा गया है कि मैदानी इलाकों में तूफान और बिजली गिरने की संभावना रहती है, क्योंकि उत्तर-पश्चिम भारत की गर्म, शुष्क हवा बंगाल की खाड़ी से निकलने वाली नम हवा के साथ मिलती है, जिससे गहरे संवहन बादलों के निर्माण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं.
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