एथेनॉल फ्यूल को लेकर काफी विवाद चल रहा है. लेकिन, अब पूरी तरह से एथेनॉल पर चलने वाली गाड़ी इस महीने लॉन्च होने वाली है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि इसी महीने यानी नवंबर 2026 में Toyota की एथेनॉल से चलने वाली Innova HyCross को लॉन्च होगी. ये फ्लेक्स-फ्यूल MPV खास तौर पर E100 यानी 100% एथेनॉल पर चलने के लिए डिजाइन की गई है, और इसके साथ ही यह पेट्रोल और एथेनॉल के दूसरे ब्लेंड्स पर भी आसानी से चल सकती है.
नितिन गडकरी की ये बड़ी घोषणा 2 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित ENRich 2026 कॉन्फ्रेंस के दौरान की. उन्होंने ये भी बताया कि वे खुद पिछले लगभग डेढ़ साल से Toyota की ओर उपलब्ध कराई गई Innova फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, ग्राहकों के लिए ध्यान रखना जरूरी है कि Toyota ने अभी तक शोरूम लॉन्च की तारीख, बुकिंग अमाउंट, कीमत या इसके प्रोडक्शन मॉडल की स्पेसिफिकेशन्स को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. ऐसे में ये अंतर समझना बेहद जरूरी है कि नितिन गडकरी की ओर से की जाने वाली अनवीलिंग और ग्राहकों के लिए गाड़ी की तुरंत बिक्री शुरू होना, दोनों अलग-अलग बातें हो सकती हैं.
साल 2023 में पेश हुआ था फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप
आपको बता दें कि ये तकनीक कोई नई नहीं है, क्योंकि Toyota किर्लोस्कर मोटर ने अगस्त 2023 में ही इनोवा हाईक्रॉस पर बेस्ड इस इलेक्ट्रिफाइड फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप को पेश कर दिया था. इस गाड़ी में एक ऐसे पेट्रोल इंजन का इस्तेमाल किया गया है जिसे ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल पर चलने के लिए मॉडिफाई किया गया है. साथ ही इसे एक दमदार स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड सिस्टम के साथ जोड़ा गया है. उस समय टोयोटा और सरकार ने साफ किया था कि इसे कमर्शियली उतारने से पहले कई तरह के टेस्ट, कैलिब्रेशन और सर्टिफिकेशन की जरूरत होगी.
इस गाड़ी में दिया गया हाइब्रिड सिस्टम काफी जरूरी है, क्योंकि एक सामान्य फ्लेक्स-फ्यूल इंजन को गाड़ी चलाने के लिए लगातार फ्यूल जलाना पड़ता है, जबकि टोयोटा का ये सिस्टम सही स्पीड होने पर इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी का इस्तेमाल करता है जिससे इंजन को कम चलना पड़ता है. ये तकनीक एथेनॉल के कम एनर्जी कंटेंट की कमी को पूरा करने में मदद कर सकती है. हालांकि, टोयोटा ने अभी तक इस आने वाले प्रोडक्शन मॉडल के सर्टिफाइड माइलेज या इलेक्ट्रिक रेंज के आंकड़े जारी नहीं किए हैं. गडकरी ने पहले इसके अक्टूबर में लॉन्च होने का इशारा किया था जो कि टल गया, और अब उन्होंने इसके लिए नवंबर का नाम लिया है.
E100 गाड़ियों अब सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क में शामिल
इसके अलावा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने हाल ही में 26 अक्टूबर को सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स में संशोधन करते हुए E100 को भी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क में शामिल कर लिया है, जबकि पहले केवल E85 तक के प्रावधान थे. इस बदलाव से अब वाहन निर्माताओं के लिए बहुत ज्यादा एथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियों को प्रमाणित कराना आसान हो गया है.
हालांकि, इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा सामान्य पेट्रोल कारों को सीधे शुद्ध एथेनॉल पर चलाया जा सकता है. एथेनॉल पर चलने के लिए गाड़ी की फ्यूल पाइप्स, सील्स, इंजन कंट्रोल्स और दूसरे पार्ट्स का इस फ्यूल के फ्रेंडली होना बेहद जरूरी होता है. आज बिकने वाली ज्यादातर कारें केवल E20 यानी 20% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल के लिए ही डिजाइन की गई हैं. इस वजह से मालिकों को केवल वही फ्यूल इस्तेमाल करना चाहिए जो उनकी गाड़ी के मैनुअल या स्टिकर पर लिखा हो. गडकरी ने इस दिशा में काम कर रही कंपनियों में टाटा मोटर्स, महिंद्रा, सुजुकी और हुंडई का भी नाम लिया. मारुति सुजुकी ने पहले ही अपनी WagonR Bioflex पेश की है, लेकिन जून 2026 में इसके लॉन्च के बाद से अब तक केवल 20 रजिस्ट्रेशन होना ये दिखाता है कि यह बाजार अभी शुरुआती चरण में है.
इस गाड़ी के साथ सबसे बड़ी चुनौती एथेनॉल फ्यूल की उपलब्धता को लेकर है. देश में E20 पेट्रोल तो आसानी से मिल जाता है, लेकिन शुद्ध एथेनॉल यानी E100 के पंप्स का कोई देशव्यापी नेटवर्क फिलहाल मौजूद नहीं है. हालांकि एक फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ी दूसरे ब्लेंडेड फ्यूल पर भी चल सकती है जिससे थोड़ी राहत जरूर मिलती है, लेकिन अगर घर के आसपास शुद्ध एथेनॉल ही उपलब्ध नहीं होगा तो ग्राहक के लिए इस तकनीक के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना घाटे का सौदा साबित हो सकता है. गडकरी ने अपने भाषण में एथेनॉल की कीमत लगभग 75 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत करीब 120 रुपये बताई थी.
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