भारत में Electric Mobility का बदलाव अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोपहिया, तिपहिया वाहनों से लेकर बसों और कमर्शियल ट्रक्स तक सड़क पर इसके बड़े फायदे साफ दिखने लगे हैं. देश में गाड़ी की इस हरित क्रांति को सबसे बड़ा सहारा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना PM E-DRIVE से मिल रहा है. ये तेजी से इस इकोसिस्टम को बढ़ाने का काम कर रही है.
योजना से जुड़े इस सबसे ताजा डेटा को 25 सितंबर 2026 को International Centre for Automotive Technology (ICAT), मानेसर में आयोजित "PM E-DRIVE: Dialogue with the Industry" कार्यक्रम के दौरान IFCI Ltd के सीजीएम Suneet Shukla ने पेश किया. ये कार्यक्रम ICAT के गौरवशाली 20 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिसमें सरकार, ऑटोमोटिव इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी से जुड़े सभी बड़े दिग्गजों ने देश के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम पर खुलकर चर्चा की.
दोपहिया EV की हिस्सेदारी 10% के करीब
इस रिपोर्ट का सबसे पहला प्वाइंट इलेक्ट्रिक दोपहिया (e-2W) वाहनों की बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी है. आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में कुल दोपहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक की हिस्सेदारी मात्र 1.9% थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 6.6% हो गई. वहीं, चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों (अप्रैल से अगस्त) में ही ये हिस्सेदारी रिकॉर्ड 9.9% पर पहुंच चुकी है.
भारी सफलता को देखते हुए सरकार ने PM E-DRIVE के तहत e-2W के लक्ष्य को 24.8 लाख वाहनों से सीधे बढ़ाकर 45.8 लाख वाहन कर दिया है. इस योजना को 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है. इस अकेले कंपोनेंट के लिए 2,767 करोड़ का बड़ा बजट आवंटित किया गया है. वर्तमान में इसके तहत 21 पंजीकृत OEM और 170 स्वीकृत मॉडल्स काम कर रहे हैं. आधिकारिक परिवहन डेटा के अनुसार, 19 सितंबर 2026 तक PM E-DRIVE के तहत 25 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बेचे जा चुके हैं.

कमर्शियल तिपहिया क्षेत्र में बेजोड़ परफॉर्मेंस
इलेक्ट्रिक तिपहिया (L5 कैटेगरी) वाहनों की अपनाए जाने की रफ्तार सबसे ज्यादा हैरान करने वाली रही है. L5 इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2021-22 के 4.7% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 31.7% हो गई थी, जो अप्रैल-अगस्त 2026-27 के बीच रिकॉर्ड 46.1% तक पहुंच गई है. इस कंपोनेंट के लिए 857 करोड़ आवंटित किए गए थे, जिसका लक्ष्य 2.89 लाख वाहनों का था. लेकिन लक्ष्य इतनी तेजी से पूरा हुआ कि सरकार को इसका इंसेंटिव 26 दिसंबर 2025 को ही बंद करना पड़ा. ये आंकड़ा देश के लास्ट-माइल ट्रांसपोर्टेशन में ईवी की जबर्दस्त मांग को दिखाता है.
मेट्रो शहरों के लिए लगभग 14,000 इलेक्ट्रिक बसें तैयार
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह से स्मोक-फ्री बनाने के लिए सरकार ने 4,391 करोड़ के बजट के साथ 14,028 इलेक्ट्रिक बसों का टारगेट रखा है. रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रमुख मेट्रो शहरों में 13,800 इलेक्ट्रिक बसों का टेंडर पूरा हो चुका है.
- बेंगलुरू: 4,500 बसें
- दिल्ली: 2,800 बसें
- हैदराबाद: 2,200 बसें
- अहमदाबाद: 1,200 बसें
- मुंबई: 1,500 बसें
- पुणे: 1,000 बसें
- सूरत: 600 बसें
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल सार्वजनिक बसों के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी अगस्त 2026 तक बढ़कर 8.32% हो चुकी है, जो पिछले वित्त वर्ष में 7.20% थी.
इलेक्ट्रिक ट्रक्स और चार्जिंग स्टेशनों का देशव्यापी जाल
भारी कमर्शियल ट्रक्स के लिए 500 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिसके तहत 5,600 से अधिक वाहनों का लक्ष्य है. इसके तहत 1.25 करोड़ से कम कीमत वाले N2 और N3 कैटेगरी के ट्रक्स को तभी सब्सिडी मिलेगी जब उनके पास पुराने प्रदूषण फैलाने वाले ट्रक को कबाड़ करने का स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट होगा. इसके लिए Tata Motors और IPL Tech के कई मॉडल्स को सर्टिफाइड भी कर दिया गया है.

ईवी की सफलता के लिए देशव्यापी चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क बहुत जरूरी है. इसके तहत 729.34 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी देकर देश भर में 7,254 नए चार्जर लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इसमें कर्नाटक को 1,571 चार्जर, दिल्ली को 1,146 और राजस्थान को 805 चार्जर्स की मंजूरी दी गई है. इन्हें HPCL, BPCL और IOCL जैसी सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर लगाया जाएगा.
सुरक्षित ईवी बैटरियों और वाहनों की क्वालिटी जांचने के लिए सरकार ने ARAI Pune, ICAT Manesar, GARC Chennai और NATRAX Indore के अपग्रेडेशन के लिए 776.29 करोड़ की रकमको मंजूरी दी है.
PM E-DRIVE योजना को शुरुआत में 10,900 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी गई थी. जिसे बाद में बढ़ाकर 11,900 करोड़ कर दिया गया है. इस डेटा से ये साफ पता चलता है कि भारत अब केवल ईवी को खरीदने पर ही छूट नहीं दे रहा है, बल्कि इसके लिए देश में चार्जिंग स्टेशनों, कड़े सुरक्षा टेस्टिंग और बड़े मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी बहुत तेजी से डेवलप कर रहा है.
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