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ब्लॉग राइटर
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‘दुखी दलित’ का सुख किसमें है...सदगति या अस्तित्व में?
प्रेमचंद की कहानी ‘सदगति’ में दुखी दलित नायक अपने घर में एक पूजा के लिए गांव के ब्राह्मण को बुलाने जाता है। ब्राह्मण इस शर्त पर चलने को राज़ी होता है कि बदले में दुखी दलित उसके (ब्राह्मण के) घर का वो सारा काम करेगा जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है, मसलन झाड़ू, घर लीपना, गाय को घास डालना, वगैरह वगैरह।
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पंकज रामेंदु
- जुलाई 27, 2016 15:55 pm IST
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