पहली नजर में ये आपको बिल्कुल असली नवजात बच्चे लगेंगे, नरम त्वचा, छोटे-छोटे हाथ-पैर और चेहरे के भाव तक असली जैसे. लेकिन, असल में ये गुड़िया हैं, जिन्हें Reborn Dolls कहा जाता है. दुनियाभर में इनका क्रेज तेजी से बढ़ रहा है और खासकर महिलाएं इन्हें सिर्फ खिलौना नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारे के रूप में अपना रही हैं.
क्या हैं Reborn Dolls?
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, Reborn Dolls बेहद खास तरह की गुड़िया होती हैं, जिन्हें इतनी बारीकी से बनाया जाता है कि ये असली बच्चों जैसी लगती हैं. इनकी खासियत हैं- हाथों से पेंट की गई त्वचा, असली जैसे बाल (मोहायर से बनाए गए), वजन ऐसा कि गोद में लेने पर असली बच्चा लगे, चेहरे के एक्सप्रेशन भी बिल्कुल रियल. इनकी कीमत कुछ सौ डॉलर से लेकर हजारों डॉलर तक हो सकती है.
इस ट्रेंड की शुरुआत 20वीं सदी के आखिर में संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई थी. शुरुआत में कलाकार सामान्य गुड़ियों को बदलकर उन्हें असली बच्चों जैसा बनाने लगे. धीरे-धीरे यह एक खास कला बन गई और आज यह एक बड़ा सबकल्चर बन चुका है.
क्यों बढ़ रहा है इन डॉल्स का क्रेज?
1. मानसिक शांति और थेरेपी- कई लोग इन डॉल्स को पकड़कर या उनकी देखभाल करके मानसिक शांति महसूस करते हैं. यह चिंता (anxiety), डिप्रेशन और PTSD जैसी समस्याओं में मददगार माना जाता है.
2. दुख और अकेलेपन से उबरने का सहारा- जिन महिलाओं ने बच्चे को खोया हो, गर्भपात हुआ हो या जो मां नहीं बन पा रही हों, उनके लिए ये डॉल्स एक भावनात्मक सहारा बनती हैं.
3. डिमेंशिया और बुजुर्गों की देखभाल- अल्जाइमर या डिमेंशिया के मरीजों के लिए भी ये डॉल्स उपयोगी साबित हो रही हैं. इनकी देखभाल करने से उन्हें एक उद्देश्य और सुकून मिलता है.
4. आर्ट और कलेक्शन का शौक- कुछ लोग इन्हें एक आर्ट पीस के रूप में खरीदते हैं. इनकी बारीकी और रियल लुक इन्हें कलेक्टर्स के बीच खास बनाती है.
5. सोशल मीडिया का असर- इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर इन डॉल्स के अनबॉक्सिंग और केयर वीडियो लाखों व्यूज बटोरते हैं, जिससे इनकी लोकप्रियता और बढ़ रही है.
क्या है विवाद?
जहां कई लोग इसे फायदेमंद मानते हैं, वहीं कुछ लोग इसे अजीब या डरावना भी कहते हैं. आलोचकों का मानना है कि यह असली और नकली के बीच की सीमा को धुंधला कर सकता है. कुछ मामलों में यह मानसिक समस्याओं का संकेत भी हो सकता है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसे संतुलित तरीके से अपनाया जाए, तो यह नुकसानदायक नहीं है और कई लोगों के लिए मददगार साबित हो सकता है.
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